{"_id":"5d7fea768ebc3e017a2109bb","slug":"home-buyers-are-against-rera-s-new-order-lucknow-news-lko4819226140","type":"story","status":"publish","title_hn":"रेरा के नए आदेश के विरोध में घर खरीदार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
रेरा के नए आदेश के विरोध में घर खरीदार
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
रेरा के नए आदेश के विरोध में घर खरीदार
सभी जरूरी एनओसी मिलने और काम पूरा करने को भी पूर्णता प्रमाण पत्र और कब्जा प्रमाण पत्र मानते हुए होम बायर्स को कब्जा देना शुरू करने पर रेरा की सहमति का विरोध शुरू हो गया है। होम बायर्स का कहना है कि सोमवार को रेरा का यह नया आदेश उनकी जगह बिल्डर कंपनियों, एलडीए व आवास विकास परिषद को राहत देने वाला है जोकि अपने वायदे पूरे नहीं कर रहे।
होम बायर्स की लड़ाई लड़ रहे पार्श्वनाथ प्लेनेट निवासी आलोक सिंह का कहना है कि बिल्डर एक फॉर्म भरकर विकास प्राधिकरण में जमा कर दे। सात दिन तक कोई जवाब नहीं मिला तो खुद से पूर्णता प्रमाण पत्र जारी होना मान लिया जाए। अपार्टमेंट एक्ट में होम बायर्स से भी फीडबैक विकास प्राधिकरण द्वारा लिए जाने की व्यवस्था है। ऐसा कभी नहीं किया जाता। खुद पारिजात जैसे अपार्टमेंट के लिए एलडीए पर सवाल उठे हुए हैं। रेरा खुद को प्रभावी बनाने की जगह समझौता करने पर तुला हुआ है। यह ठीक नहीं है। वहीं एलडीए के पारिजात अपार्टमेंट की संघर्ष समिति के समन्वयक समर विक्रम सिंह का कहना है कि इससे होम बायर्स की लड़ाई कमजोर होगी। पूर्णता प्रमाण पत्र और कब्जा प्रमाण पत्र की अनिवार्यता होम बायर्स के लिए बड़ा जरिया थी, जिसके जरिए रेरा से न्याय की मांग की जा सकती थी। अब होम बायर्स पर ही खुद कब्जा लेने और रजिस्ट्री कराने का दबाव रहेगा।
विज्ञापन
सभी जरूरी एनओसी मिलने और काम पूरा करने को भी पूर्णता प्रमाण पत्र और कब्जा प्रमाण पत्र मानते हुए होम बायर्स को कब्जा देना शुरू करने पर रेरा की सहमति का विरोध शुरू हो गया है। होम बायर्स का कहना है कि सोमवार को रेरा का यह नया आदेश उनकी जगह बिल्डर कंपनियों, एलडीए व आवास विकास परिषद को राहत देने वाला है जोकि अपने वायदे पूरे नहीं कर रहे।
होम बायर्स की लड़ाई लड़ रहे पार्श्वनाथ प्लेनेट निवासी आलोक सिंह का कहना है कि बिल्डर एक फॉर्म भरकर विकास प्राधिकरण में जमा कर दे। सात दिन तक कोई जवाब नहीं मिला तो खुद से पूर्णता प्रमाण पत्र जारी होना मान लिया जाए। अपार्टमेंट एक्ट में होम बायर्स से भी फीडबैक विकास प्राधिकरण द्वारा लिए जाने की व्यवस्था है। ऐसा कभी नहीं किया जाता। खुद पारिजात जैसे अपार्टमेंट के लिए एलडीए पर सवाल उठे हुए हैं। रेरा खुद को प्रभावी बनाने की जगह समझौता करने पर तुला हुआ है। यह ठीक नहीं है। वहीं एलडीए के पारिजात अपार्टमेंट की संघर्ष समिति के समन्वयक समर विक्रम सिंह का कहना है कि इससे होम बायर्स की लड़ाई कमजोर होगी। पूर्णता प्रमाण पत्र और कब्जा प्रमाण पत्र की अनिवार्यता होम बायर्स के लिए बड़ा जरिया थी, जिसके जरिए रेरा से न्याय की मांग की जा सकती थी। अब होम बायर्स पर ही खुद कब्जा लेने और रजिस्ट्री कराने का दबाव रहेगा।
विज्ञापन