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Lucknow News: फगुआ गीतों के बीच खेली फूलों की होली
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होली गीतों के पुस्तक का विमोचन करतीं महिलाएं।
लखनऊ। गोमतीनगर के विश्वासखंड में रविवार को होली संगीत हुआ। लोक संस्कृति शोध संस्थान और लखनऊ लिटरेरी क्लब के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित समारोह में फगुआ की गूंज के बीच फूलों की होली भी खेली गई। इस दौरान वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. करुणा पाठक की होली पर लिखी कृति ‘होली के रंग कुमाऊं के संग’ का विमोचन भी किया गया।
शुभारंभ रुपाली श्रीवास्तव ने गणेश वंदना से किया। देवताओं का आवाहन गीत सिद्धि को दाता विघ्न विनाशन..., हिमालय डाना लाल भयो..., शिवशंकर खेलत हैं होरी..., आज बिरज में होली रे रसिया..., आयो नवल बसंत... आदि गीतों की प्रस्तुति दी। निर्मला पंत, अरुणा उपाध्याय, शारदा पांडेय, नीरा मिश्रा, ज्योति किरन रतन, डाॅ. अंजू भारती, सरिता सिंह, नीना सिंह, अनामिका, अनीता गुप्ता, गीता चौधरी, डा. मंजू मेहरोत्रा, रीता अग्रवाल, पूनम कनवाल, कुमकुम मिश्रा, हेमलता त्रिपाठी, अर्चना गुप्ता, लक्ष्मी जोशी, किरन यादव, स्वरा त्रिपाठी, हरीतिमा पन्त, प्रो. सीमा सरकार आदि हुरियारों ने पारंपरिक होली गीत से माहौल को फागुनी बनाया। महिलाओं ने मनमोहक नृत्य से सभी का दिल जीत लिया। अनिल पांडेय, चेतन बिष्ट, डाॅ. एसके गोपाल, शशांक, ललित भट्ट आदि मौजूद रहे।
अपनी मिट्टी से जुड़े गीतों से दूर होती जा रही युवा पीढ़ी
डाॅ. करुणा पांडेय ने कहा कि समय के साथ हमारी कई समृद्ध परंपराएं लुप्त हो रही हैं। नई पीढ़ी फिल्मी गीतों के होली संगीत को तो जानती है लेकिन अपनी मिट्टी से जुड़े गीतों से दूर होती जा रही है। कहाए मैंने इस कृति में कुमाऊं अंचल की खड़ी होली, बैठकी होली और महिला होली की परंपरा के 123 गीतों को सहेजने का प्रयास किया है। पद्मश्री डाॅ. विद्याविंदु सिंह ने पारंपरिक फाग गीतों को लोक संस्कृति की अमूल्य धरोहर बताते हुए कहा कि होली का त्योहार लोक मन के उल्लास को मुखर अभिव्यक्ति देता है। कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी की पूर्व अध्यक्ष डाॅ. पूर्णिमा पांडेय, वरिष्ठ गायिका पद्मा गिडवानी, विमल पंत, उमा त्रिगुणायत, विनीत सिन्हा, उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान की प्रधान संपादक डाॅ. अमिता दुबे, राज्य कर्मचारी साहित्य संस्थान की महामंत्री डाॅ. सीमा गुप्ता, लोक संस्कृति शोध संस्थान की सचिव डाॅ. सुधा द्विवेदी, डाॅ. राधा बिष्ट आदि ने भी अपने विचार व्यक्त किए। प्रेरणा पांडेय ने आगंतुकों का अबीर-गुलाल से स्वागत किया।
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शुभारंभ रुपाली श्रीवास्तव ने गणेश वंदना से किया। देवताओं का आवाहन गीत सिद्धि को दाता विघ्न विनाशन..., हिमालय डाना लाल भयो..., शिवशंकर खेलत हैं होरी..., आज बिरज में होली रे रसिया..., आयो नवल बसंत... आदि गीतों की प्रस्तुति दी। निर्मला पंत, अरुणा उपाध्याय, शारदा पांडेय, नीरा मिश्रा, ज्योति किरन रतन, डाॅ. अंजू भारती, सरिता सिंह, नीना सिंह, अनामिका, अनीता गुप्ता, गीता चौधरी, डा. मंजू मेहरोत्रा, रीता अग्रवाल, पूनम कनवाल, कुमकुम मिश्रा, हेमलता त्रिपाठी, अर्चना गुप्ता, लक्ष्मी जोशी, किरन यादव, स्वरा त्रिपाठी, हरीतिमा पन्त, प्रो. सीमा सरकार आदि हुरियारों ने पारंपरिक होली गीत से माहौल को फागुनी बनाया। महिलाओं ने मनमोहक नृत्य से सभी का दिल जीत लिया। अनिल पांडेय, चेतन बिष्ट, डाॅ. एसके गोपाल, शशांक, ललित भट्ट आदि मौजूद रहे।
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अपनी मिट्टी से जुड़े गीतों से दूर होती जा रही युवा पीढ़ी
डाॅ. करुणा पांडेय ने कहा कि समय के साथ हमारी कई समृद्ध परंपराएं लुप्त हो रही हैं। नई पीढ़ी फिल्मी गीतों के होली संगीत को तो जानती है लेकिन अपनी मिट्टी से जुड़े गीतों से दूर होती जा रही है। कहाए मैंने इस कृति में कुमाऊं अंचल की खड़ी होली, बैठकी होली और महिला होली की परंपरा के 123 गीतों को सहेजने का प्रयास किया है। पद्मश्री डाॅ. विद्याविंदु सिंह ने पारंपरिक फाग गीतों को लोक संस्कृति की अमूल्य धरोहर बताते हुए कहा कि होली का त्योहार लोक मन के उल्लास को मुखर अभिव्यक्ति देता है। कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी की पूर्व अध्यक्ष डाॅ. पूर्णिमा पांडेय, वरिष्ठ गायिका पद्मा गिडवानी, विमल पंत, उमा त्रिगुणायत, विनीत सिन्हा, उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान की प्रधान संपादक डाॅ. अमिता दुबे, राज्य कर्मचारी साहित्य संस्थान की महामंत्री डाॅ. सीमा गुप्ता, लोक संस्कृति शोध संस्थान की सचिव डाॅ. सुधा द्विवेदी, डाॅ. राधा बिष्ट आदि ने भी अपने विचार व्यक्त किए। प्रेरणा पांडेय ने आगंतुकों का अबीर-गुलाल से स्वागत किया।
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