...और इस तरह बना लखनऊ का क्राइस्ट चर्च
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यह कम शान की बात नहीं है कि उत्तर भारत का पहला इंग्लिश चर्च लखनऊ में स्थापित किया गया। यह चर्च नवाबी नगरी में खास मायने रखता है।
भारत में ईसाई धर्म का प्रभाव 52 ईसा पूर्व हुआ था और पहला यूरोपियन चर्च 1510 में में कोचिन में स्थापित किया गया था, जहां वास्को डी गामा को 1524 में दफनाया गया था लेकिन बाद में उनके अवशेषों को लिसबन वापस ले जाया गया और दोबारा 1538 में दफनाया गया।
अंग्रेजो ने अपना पहला चर्च 1680 में मद्रास में बनाया था जिसे सेंट मैरी चर्च के नाम से जाना गया। इसके बाद 1770 में कोलकाता में चर्च का निर्माण कराया गया जिसे सेंट जॉन चर्च के नाम से जाना गया।
इसके बाद 1810 में लखनऊ में सेंट मेरी चर्च की लखनऊ में स्थापना हुई जिसके बाद लखनऊ तीसरा शहर बन गया इस दौरान 1770 से लेकर 1899 तक कोई भी इंग्लिश चर्च नहीं बना था।
रोजी लेलवेलिन जोंस ने 1837 में लिखी अपनी पुस्तक ‘ए फैटल फ्रेंडशिप में लिखा है 1830 में लखनऊ में गोथिक चर्च के निर्माण में केवल 540 पाउंड का खर्च आया था जिसमें 70 पाउंड गेट, दीवारों और किले के बाहरी हिस्से पर खर्च किया गया था।
हालांकि बहुत स्पष्ट नहीं हो पाता है कि इस भवन के निर्माण के लिए पैसा नवाब ने दिया था या ईस्ट इंडिया कंपनी ने।
1857-1858 में हुए विवाद के बाद सेंट मेरी चर्च को काफी नुकसान हुआ। 1858 में चर्च का स्केच एम.सी मैकम ने डिजाइन किया था जिसकी पेंटिंग रेजिडेंसी के मॉडल रूम रखी हुई है।