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Lucknow News: हिंदी को मिलनी चाहिए सरकार से आश्वस्ति
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वरिष्ठ साहित्यकार उदय प्रताप सिंह और प्रमिला भारती को जीवन सिद्धि सम्मान से सम्मानित करते डॉ शि
लखनऊ। उत्तर प्रदेश साहित्य सभा के चौथे स्थापना दिवस ‘आश्वस्ति’ का आयोजन मंगलवार को अंतरराष्ट्रीय बौद्ध संस्थान के सभागार में किया गया। इस अवसर पर साहित्यकारों को सम्मानित किया गया। वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. शिवओम अम्बर ने कहा कि हिंदी अपनी अंतिम सांसें गिन रही है। इसे सरकार से आश्वस्ति की जरूरत है। उन्होंने वर्तमान व्यवस्था को लेकर तंज भी कसा और कहा कि हवाई जहाज में बैठे लोग जमीन की हकीकत समझें।
उन्होंने मांग की कि विद्यालयों में सभी विषय हिंदी में पढ़ाना अनिवार्य किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार को हिंदी के उत्थान के लिए सकारात्मक प्रयास करने होंगे वर्ना हिंदी का भविष्य अंधकारमय हो जाएगा। उत्तर प्रदेश साहित्य सभा, साहित्य के प्रश्रय, प्रस्तुति और प्रशंसा की त्रिवेणी का संगम है। इससे पहले कार्यक्रम का शुभारंभ महापौर सुषमा खर्कवाल व अन्य अतिथियों ने दीप प्रज्ज्वलन कर किया। महापौर ने कहा कि साहित्यकारों ने सदैव समाज को नई दिशा दी है। हम ऐसे आयोजनों से अपनी सांस्कृतिक विरासत को संजोते हैं।
समारोह के विशिष्ट अतिथि एमएलसी पवन सिंह चौहान व इंजीनियर अवनीश सिंह, डॉ. शिवओम अम्बर, विष्णु सक्सेना और सुधांशु मोहन श्रीवास्तव ने साहित्यकारों व चयनित रचनाकारों को प्रतीक चिह्न, अंगवस्त्र और सम्मान पत्र भेंट कर सम्मानित किया। रचनाकारों ने काव्यपाठ भी किया।
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इस अवसर पर उत्तर प्रदेश साहित्य सभा के कार्यकारिणी सदस्य डॉ. विष्णु सक्सेना, मुकुल महान, गजेंद्र प्रियांशु, अर्जुन सिंह चांद, आशीष अनल, अर्जुन सिसौदिया, बलराम श्रीवास्तव, सोनरूपा विशाल, राजीव राज, गिरिधर खरे, शफीकुर्रहमान कश्फी, रश्मि श्रीवास्तव शफक, राजीव राज, अभय सिंह निर्भीक, योगी योगेश, प्रवीण अग्रहरि, पंकज प्रसून सुभाष चंद्र रसिया सहित प्रदेशभर से आए साहित्यकारों की उपस्थिति रही।
डॉ. उदय प्रताप व प्रमिला भारती को जीवन सिद्धि सम्मान
उत्तर प्रदेश साहित्य सभा की ओर से वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. उदय प्रताप सिंह और प्रमिला भारती को जीवन सिद्धि सम्मान से नवाजा गया। इस दौरान उदय प्रताप ने अपने मुक्तकों व गजलों से दर्शकों को भावविभोर कर दिया। उन्होंने पढ़ा- जहां जाते हैं हम कोई कहानी छोड़ आते हैं, जरा सा प्यार कुछ आंखों में पानी छोड़ आते हैं। प्रमिला भारती ने भी अपनी रचना मुझे गोद ले लो रिटायर हूं मैं... सुनाकर सभी को भावुक कर दिया। डॉ. राम बहादुर मिश्र को लोक साहित्य उन्नयन सम्मान, डॉ. अवधी हरि को सनातन साहित्य सृजन सम्मान, माध्यम साहित्यिक संस्थान को सार्थक साहित्यिक संस्था सम्मान और कवि अटल नारायण को साहित्य नवोन्मेष सम्मान से अलंकृत किया गया। इसके साथ ही साहित्य के उन्नयन में विशेष योगदान देने वाली भावना सिंह, रीना सिंह, शर्मिला सिंह, अनिल अग्रवाल और आनंद शेखर सिंह को साहित्य उन्नायक सम्मान से नवाजा गया।
गीत प्रतियोगिता में मयंक को मिला प्रथम पुरस्कार
उत्तर प्रदेश साहित्य सभा की ओर से आयोजित गीत प्रतियोगिता में उत्कृष्ट गीत लिखने वाले मुरादाबाद से मयंक शर्मा को प्रथम पुरस्कार मिला। सहारनपुर से बृजेंद्र पाल शर्मा को द्वितीय और दिल्ली से प्रीति त्रिपाठी को तृतीय पुरस्कार प्रदान किया गया। सोशल मीडिया पर सर्वाधिक प्रसार प्रतियोगिता की विजयी प्रतिभागी निशा नवल को विशेष पुरस्कार दिया गया।
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उन्होंने मांग की कि विद्यालयों में सभी विषय हिंदी में पढ़ाना अनिवार्य किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार को हिंदी के उत्थान के लिए सकारात्मक प्रयास करने होंगे वर्ना हिंदी का भविष्य अंधकारमय हो जाएगा। उत्तर प्रदेश साहित्य सभा, साहित्य के प्रश्रय, प्रस्तुति और प्रशंसा की त्रिवेणी का संगम है। इससे पहले कार्यक्रम का शुभारंभ महापौर सुषमा खर्कवाल व अन्य अतिथियों ने दीप प्रज्ज्वलन कर किया। महापौर ने कहा कि साहित्यकारों ने सदैव समाज को नई दिशा दी है। हम ऐसे आयोजनों से अपनी सांस्कृतिक विरासत को संजोते हैं।
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समारोह के विशिष्ट अतिथि एमएलसी पवन सिंह चौहान व इंजीनियर अवनीश सिंह, डॉ. शिवओम अम्बर, विष्णु सक्सेना और सुधांशु मोहन श्रीवास्तव ने साहित्यकारों व चयनित रचनाकारों को प्रतीक चिह्न, अंगवस्त्र और सम्मान पत्र भेंट कर सम्मानित किया। रचनाकारों ने काव्यपाठ भी किया।
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इस अवसर पर उत्तर प्रदेश साहित्य सभा के कार्यकारिणी सदस्य डॉ. विष्णु सक्सेना, मुकुल महान, गजेंद्र प्रियांशु, अर्जुन सिंह चांद, आशीष अनल, अर्जुन सिसौदिया, बलराम श्रीवास्तव, सोनरूपा विशाल, राजीव राज, गिरिधर खरे, शफीकुर्रहमान कश्फी, रश्मि श्रीवास्तव शफक, राजीव राज, अभय सिंह निर्भीक, योगी योगेश, प्रवीण अग्रहरि, पंकज प्रसून सुभाष चंद्र रसिया सहित प्रदेशभर से आए साहित्यकारों की उपस्थिति रही।
डॉ. उदय प्रताप व प्रमिला भारती को जीवन सिद्धि सम्मान
उत्तर प्रदेश साहित्य सभा की ओर से वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. उदय प्रताप सिंह और प्रमिला भारती को जीवन सिद्धि सम्मान से नवाजा गया। इस दौरान उदय प्रताप ने अपने मुक्तकों व गजलों से दर्शकों को भावविभोर कर दिया। उन्होंने पढ़ा- जहां जाते हैं हम कोई कहानी छोड़ आते हैं, जरा सा प्यार कुछ आंखों में पानी छोड़ आते हैं। प्रमिला भारती ने भी अपनी रचना मुझे गोद ले लो रिटायर हूं मैं... सुनाकर सभी को भावुक कर दिया। डॉ. राम बहादुर मिश्र को लोक साहित्य उन्नयन सम्मान, डॉ. अवधी हरि को सनातन साहित्य सृजन सम्मान, माध्यम साहित्यिक संस्थान को सार्थक साहित्यिक संस्था सम्मान और कवि अटल नारायण को साहित्य नवोन्मेष सम्मान से अलंकृत किया गया। इसके साथ ही साहित्य के उन्नयन में विशेष योगदान देने वाली भावना सिंह, रीना सिंह, शर्मिला सिंह, अनिल अग्रवाल और आनंद शेखर सिंह को साहित्य उन्नायक सम्मान से नवाजा गया।
गीत प्रतियोगिता में मयंक को मिला प्रथम पुरस्कार
उत्तर प्रदेश साहित्य सभा की ओर से आयोजित गीत प्रतियोगिता में उत्कृष्ट गीत लिखने वाले मुरादाबाद से मयंक शर्मा को प्रथम पुरस्कार मिला। सहारनपुर से बृजेंद्र पाल शर्मा को द्वितीय और दिल्ली से प्रीति त्रिपाठी को तृतीय पुरस्कार प्रदान किया गया। सोशल मीडिया पर सर्वाधिक प्रसार प्रतियोगिता की विजयी प्रतिभागी निशा नवल को विशेष पुरस्कार दिया गया।