फार्मासिस्टों की नियुक्ति पर कोर्ट ने लगाई रोक
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यूनानी फार्मासिस्टों के 89 पदों पर हुई नियुक्ति पर हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है। अनुसूचित जाति व जनजाति के अभ्यर्थियों की याचिका की सुनवाई करते हुए ये फैसला कोर्ट ने लिया था।
अभ्यर्थियों का आरोप है कि भर्ती में नियमानुसार आरक्षण का पालन नहीं किया गया। अनुसूचित जाति के 55 और जनजाति के चार पद रिक्त होने के बावजूद काउंसलिंग में इस श्रेणी के अभ्यर्थियों को मौका नहीं दिया गया।
यूनानी फार्मासिस्टों के कुल 263 पद सृजित हैं। इनमें से 95 पद रिक्त थे। जून 2014 में इन पदों पर नियुक्ति के लिए विज्ञापन निकाला गया। इसमें काउंसलिंग में शामिल होने वाले अभ्यर्थियों की कटऑफ 21 जुलाई 2009 थी। जिसे बाद में 10 अगस्त 2014 तक कर दिया गया था।
इसके बाद फार्मासिस्टों को काउंसलिंग में बुलाकर उनके बैच के अनुसार नियुक्ति कर दी गई।
अभ्यर्थियों ने ये लगाए आरोप
अभ्यर्थियों का आरोप है कि बैचवार नियुक्ति करने से 2012-13 व 2013-14 बैच को अनुसूचित जाति के 55 खाली पदों पर भर्ती का फायदा नहीं मिला। इसी के खिलाफ अनुसूचित जाति के अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी।
याचिकाकर्ता सत्येंद्र कुमार सिंह ने बताया कि हाईकोर्ट ने 15 सितंबर 2014 को काउंसलिंग अनुसूचित जाति के रिक्त 55 पदों के सापेक्ष करने के आदेश दिए थे। इसके बावजूद कोर्ट के आदेश की अवमानना की गई।
जबकि काउसंलिंग में 68 अनुसूचित जाति के अभ्यर्थी शामिल हुए थे। सत्येंद्र सिंह ने बताया कि हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद काउंसलिंग में शामिल अधिकतर अभ्यर्थियों को नियुक्ति दे दी गई है।
इस पर यूनानी निदेशक डॉ. सिकंदर हयात सिद्दीकी का कहना है कि नियुक्तियां कोर्ट के आदेश के अनुसार बैच व मेरिट के हिसाब से हुई हैं। कोर्ट के आदेश के बाद नियुक्ति पत्र देने का आरोप गलत है। 17 सितंबर को शाम 5.11 बजे एसएमएस से जॉइनिंग न कराने का आदेश मिला था। इसी के बाद सभी जिलों को नियुक्ति न कराने के निर्देश जारी कर दिए गए थे।