'हथियार सुरक्षा के लिए हैं, स्टेटस सिंबल नहीं'
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हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने कहा है कि लाइसेंसी असलहे आत्मरक्षा के लिए ही प्रयोग होने चाहिए। लाइसेंसी असलहे जानलेवा हमले या स्टेटस सिंबल के लिए कतई नहीं हैं।
अदालत ने यह अहम टिप्पणी असलहों के दुरुपयोग व हर्ष फायरिंग रोकने संबंधी लंबित मामले में की। सूबे में लाइसेंसी असलहों को लेकर आईआईएम की रिपोर्ट के मद्देनजर जारी किए गए शासनादेश व सर्कुलरों को भी अदालत ने तलब किया है।
न्यायमूर्ति सुधीर कुमार सक्सेना और न्यायमूर्ति राकेश श्रीवास्तव की खंडपीठ ने कहा कि राज्य सरकार ने सचिवालय, हाईकोर्ट, एयरपोर्ट जैसे क्षेत्रों को आर्म्स फ्री जोन के रूप में चिह्नित करने के लिए अपना रुख साफ नहीं किया है।
अदालत ने कहा कि संबंधित समिति को इस संबंध में अपना दिमाग लगाना चाहिए और मुकम्मल रुख से अदालत को अवगत कराए। राज्य सरकार की तरफ से शासकीय अधिवक्ता रिशाद मुर्तजा पेश हुए।
तैयार हो रहा नेशन बेस्ड डाटा
कोर्ट ने राज्य सरकार को कहा कि आईआईएम लखनऊ केप्रोफेसर हिमांशु राय की रिपोर्ट के प्रकाश में जारी किए गए सर्कुलर व शासनादेशों को भी दाखिल किया जाए। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई की तारीख 12 नवंबर नियत कर उस रोज रिपोर्ट पेश करने वाले प्रोफेसर राय को भी अदालत में उपस्थित रहने को कहा है।
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया था कि लाइसेंस असलहा धारकों का नेशन बेस्ड डाटा बनाया जा रहा है, जिसकी आखिरी तारीख एक अक्टूबर है। इसपर अदालत ने इस पूरी स्कीम और उस पर राज्य सरकार ने क्या किया, इसका ब्यौरा पेश करने का निर्देश दिया।
दरअसल सूबे में लाइसेंसी असलहे स्टेटस का सिंबल बन गए हैं। प्रोफेसर हिमांशु राय की रिपोर्ट से खुलासा हुआ कि सूबे में पुलिस के पास मौजूद शस्त्रों से 5 गुना ज्यादा लाइसेंसी असलहे लोगों केपास हैं।
इससे पहले भी वर्ष 2012 में कोर्ट ने हर्ष फायरिंग की बढ़ती घटनाओं केमद्देनजर असलहों के दुरुपयोग पर प्रभावी अंकुश संबंधी निर्देश भी जारी किए थे।