‘लटकती लाशें डाल पे, अखिलेश तेरे राज में’
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बृहस्पतिवार को बजट सत्र के पहले दिन विधानसभा में भाजपा और बसपा ने अराजकता की सारी हदें पार कर दीं और सदन की कार्रवाई नहीं चलने दी।
जैसी की उम्मीद की जा रही थी सत्र के शुरू होते ही बसपा ने कानून व्यवस्था को मुद्दा बनाकर सपा सरकार के खिलाफ नारे बाजी शुरू कर दी।
बसपा सदस्यों ने ‘अखिलेश तेरे जमाने में-इज्जत लुटती थाने में’, ‘लटकती लाशें डाल पे, अखिलेश तेरे राज में’, ‘यूपी बन गया दुष्कर्म प्रदेश, जिसके सीएम हैं अखिलेश’ जैसे नारे लिखे बैनर ले रखे थे।
वे ऐसे ही नारे लिखी नीली टोपियां भी पहने थे। कांग्रेस सदस्यों ने भी कानून-व्यवस्था और बिजली संकट के संबंध में नारे लिखे बैनर ले रखे थे।
भाजपाईयों ने की दबंगई
कार्यवाही शुरू होने से पहले भाजपा को छोड़ सभी दलों के सदस्य सदन में पहुंच गए थे। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव भी मौजूद थे।
भाजपा सदस्य उस दरवाजे को बंद कर धरने पर बैठ गए जहां से अध्यक्ष सदन में प्रवेश करते हैं। सुरक्षाकर्मियों ने किसी तरह भाजपा सदस्यों को हटाकर अध्यक्ष को सदन के भीतर पहुंचाया।
सुबह 11 बजे वंदे मातरम् के साथ बजट सत्र का आगाज हुआ। वंदे मातरम् खत्म होते ही सबसे पहले भाजपा सदस्य कानून-व्यवस्था, बिजली संकट आदि को लेकर वेल में पहुंचकर नारेबाजी करने लगे।
कांग्रेस सदस्यों ने भी कानून-व्यवस्था और बिजली संकट के संबंध में नारे लिखे बैनर ले रखे थे। रालोद सदस्य गन्ने के बकाये मूल्य के भुगतान की मांग कर रहे थे।
कानून व्यवस्था पर चर्चा करना चाहते थे भाजपाई
इसी बीच भाजपा सदस्यों ने अध्यक्ष की पीठ की तरफ भी बढ़ने की कोशिश की जिन्हें सुरक्षाकर्मियों ने रोक लिया। भाजपा के सदस्य नियम 311 के तहत सदन की कार्यवाही रोककर कानून-व्यवस्था पर चर्चा की मांग कर रहे थे जिसे अध्यक्ष ने नामंजूर कर दिया।
अध्यक्ष के बार-बार समझाने और अनुरोध के बाद भी विपक्षी सदस्य वेल में डटे रहे। अध्यक्ष का कहना था कि प्रश्न प्रहर के बाद नियम 56 के तहत दी गई नोटिसों को सुनेंगे लेकिन सदस्य वेल से नहीं हटे।
लगभग आधा घंटा तक हंगामा और नारेबाजी होती रही। 11.30 बजे अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही दोपहर 12.20 बजे तक के लिए स्थगित कर दी। अन्य दलों के सदस्य तो अपनी जगह पर आ गए लेकिन भाजपा सदस्य वेल में ही धरने पर बैठ गए।
12.20 पर सदन की कार्यवाही शुरू हुई तो भाजपा सदस्य फिर नारेबाजी करने लगे।
अपनी बात नहीं रख सके बसपाई
शोर-शराबे के बीच संसदीय कार्य मंत्री मो. आजम खां ने उप्र उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग (संशोधन) अध्यादेश, उप्र मूल्य संवर्धित कर (संशोधन) अध्यादेश व उप्र अधीनस्थ सेवा चयन आयोग अध्यादेश सदन के पटल पर रखा और प्रमुख सचिव प्रदीप दुबे ने सूचनाएं पढ़ीं।
अध्यक्ष ने सदन को 12 सदस्यों के इस्तीफे की सूचना दी और स्वीकृत किए गए कार्य स्थगन प्रस्तावों की जानकारी देते हुए कानून-व्यवस्था को लेकर दिए गए नोटिस पर बोलने के लिए नेता प्रतिपक्ष स्वामी प्रसाद मौर्य का नाम पुकारा।
मौर्य बोलने लगे तो वेल में खड़े भाजपा सदस्य उनके नजदीक आ गए। इस पर बसपा सदस्यों ने आगे जाकर मौर्य के पास से भाजपा सदस्यों को हटाया।
सदन अव्यवस्थित होने की वजह से मौर्य बोल नहीं पाए और बार-बार अध्यक्ष से सदन को व्यवस्थित करने का अनुरोध करते रहे। हंगामा जारी देख अध्यक्ष ने एजेंडे के शेष बिंदुओं को निपटाने के बाद कार्यवाही शुक्रवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी।