प्राइवेट प्रैक्टिस करने वाले डॉक्टरों की मुसीबत बढ़ी, हाईकोर्ट सख्त
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने मनाही के बावजूद प्रदेश के सरकारी अस्पतालों समेत केजीएमयू के कुछ डॉक्टरों द्वारा धड़ल्ले से प्राइवेट प्रैक्टिस करने के खिलाफ सख्त रुख अख्तियार किया है।
अदालत ने प्रमुख सचिव चिकित्सा-स्वास्थ्य को शिकायतों की जांच करवाने और प्राइवेट प्रैक्टिस की बात सही पाए जाने पर छह माह में इनके खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
कोर्ट ने केजीएमयू के कुलपति को भी निर्देश दिया कि वे अपने यहां के कुछ डॉक्टरों के खिलाफ प्राइवेट प्रैक्टिस की शिकायतों का परीक्षण कर कानूनी कार्रवाई करें।
ऐसे डॉक्टरों पर हो सख्त कार्रवाई
न्यायमूर्ति अमरेश्वर प्रताप साही और न्यायमूर्ति डॉ. विजयलक्ष्मी की खंडपीठ ने यह आदेश श्याम बहादुर सिंह की पीआईएल पर दिया। इसमें मनाही के बावजूद प्राइवेट प्रैक्टिस करने वाले सरकारी डॉक्टरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई किए जाने की गुजारिश की गई थी।
याची के वकील राजकरन सिंह का कहना था कि कई शासनादेशों के तहत रोक के बावजूद कुछ सरकारी डॉक्टर खुलेआम प्राइवेट प्रैक्टिस कर रहे हैं। केजीएमयू अधिनियम के तहत विश्वविद्यालय कार्य परिषद इसकेखिलाफ समुचित कार्रवाई कर सकती है।
वहीं जिलों के सरकारी अस्पतालों के डॉक्टरों के प्राइवेट प्रैक्टिस करने की शिकायतों का निपटारा प्रमुख सचिव मेडिकल-हेल्थ कर सकते हैं।