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26 महीने से पगार न मिलने पर हाईकोर्ट ने दिया दखल, कहा-सरकार निकाले कोई तरीका
Tue, 10 Sep 2019 11:11 PM IST
Amulya Rastogi
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: Amulya Rastogi
Updated Tue, 10 Sep 2019 11:11 PM IST
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Lucknow High Court
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कर्मचारी कल्याण निगम के कई कर्मचारियों को 26 महीने से पगार न मिलने के मामले में हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने सरकार को इसके लिए तरीका निकालने को कहा है। कोर्ट सरकार की तरफ से पेश अपर स्थायी अधिवक्ता को इस बाबत सक्षम प्राधिकारियों से निर्देश हासिल कर अदालत को अवगत कराने के आदेश दिए हैं।
न्यायमूर्ति राजेश सिंह चौहान ने यह आदेश केबला नंद जोशी की याचिका पर दिया। याची के अधिवक्ता आलोक कुमार त्रिपाठी ने कोर्ट को बताया कि याची ने सरकार की योजना के तहत स्वैच्छिक सेना निवृत्ति (वीआरएस) के लिए आवेदन किया था पर इस पर कोई फैसला नहीं किया गया।
इतना ही नहीं याची समेत निगम के कई कर्मियों को पगार भी नहीं दी जा रही है। याची को पिछले 26 महीने से पगार न मिलने की वजह से परिवार भीषण संकट से गुजर रहा है और उनके पास परिवार के किसी सदस्य के बीमार पड़ने व बच्चों के स्कूल की फीस जमा करने के लिए भी रकम नहीं है।
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न्यायमूर्ति राजेश सिंह चौहान ने यह आदेश केबला नंद जोशी की याचिका पर दिया। याची के अधिवक्ता आलोक कुमार त्रिपाठी ने कोर्ट को बताया कि याची ने सरकार की योजना के तहत स्वैच्छिक सेना निवृत्ति (वीआरएस) के लिए आवेदन किया था पर इस पर कोई फैसला नहीं किया गया।
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इतना ही नहीं याची समेत निगम के कई कर्मियों को पगार भी नहीं दी जा रही है। याची को पिछले 26 महीने से पगार न मिलने की वजह से परिवार भीषण संकट से गुजर रहा है और उनके पास परिवार के किसी सदस्य के बीमार पड़ने व बच्चों के स्कूल की फीस जमा करने के लिए भी रकम नहीं है।
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इस मामले में सरकार की तरफ से पेश अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि पहले निगम को वैट व राज्य सरकार केअन्य करों पर छूट मिलती थी जिससे निगम लाभ में चल रहा था। अब जीएसटी का प्रावधान लागू हो गया है और निगम ने इसमें छूट के लिए प्रस्ताव भेजा हुआ है जिस पर फिलवक्त कोई निर्णय नहीं लिया जा सका है। सरकारी वकील ने दलील दी कि घाटे में होने की वजह से निगम आर्थिक संकट केदौर से गुजर रहा है।
इस पर कोर्ट ने कहा कि अदालत यह अपेक्षा करती है कि राज्य सरकार कोई तरीका निकालेगी जिससे याची को कम से कम पगार दी जा सके। शेष देयों के भुगतान को लेकर बाद में निर्णय कर लिया जाए। अदालत ने कहा कि अपर स्थायी अधिवक्ता इस विषय में सक्षम प्राधिकारियों से निर्देश हासिल कर कोर्ट को अवगत कराएं। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 24 सितंबर को नियत की है।
इस पर कोर्ट ने कहा कि अदालत यह अपेक्षा करती है कि राज्य सरकार कोई तरीका निकालेगी जिससे याची को कम से कम पगार दी जा सके। शेष देयों के भुगतान को लेकर बाद में निर्णय कर लिया जाए। अदालत ने कहा कि अपर स्थायी अधिवक्ता इस विषय में सक्षम प्राधिकारियों से निर्देश हासिल कर कोर्ट को अवगत कराएं। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 24 सितंबर को नियत की है।