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धर्म स्थलों से लाउड स्पीकर न हटाने पर हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी, कहा, बहरे बने बैठे हैं अधिकारी

Thu, 21 Dec 2017 10:55 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Thu, 21 Dec 2017 10:55 AM IST
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high court strict comment on use of loudspeaker on mandir and Masjid
इलाहाबाद हाईकोर्ट लखनऊ बेंच।

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने राजधानी में धर्म स्थलों पर लगे लाउड स्पीकर हटाने में सरकारी अधिकारियों को पूरी तरह नाकाम बताते हुए कड़ी नाराजगी जताई है। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस अब्दुल मोईन ने प्रमुख सचिव गृह, सिविल सेक्रेटेरियट और यूपी प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड के चैयरमैन को अलग-अलग व्यक्तिगत हलफनामे छह हफ्ते में दाखिल करने के लिए कहा है। 

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अधिकारियों को हलफनामे में बताना होगा कि ध्वनि प्रदूषण रोकने के लिए बनी 2000 की नियमावली को सख्ती से लागू करने के लिए उन्होंने क्या कदम उठाए हैं? अगली सुनवाई एक फरवरी 2018 को होगी। जवाब नहीं दे पाने पर अगली तारीख पर इन अधिकारियों को हाईकोर्ट में उपस्थित रहना होगा। 
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वरिष्ठ अधिवक्ता मोतीलाल यादव ने याचिका दायर कर प्रार्थना की थी कि मंदिर, मस्जिद, चर्च, गुरुद्वारे आदि धर्म स्थलों से लाउड स्पीकर और पब्लिक एड्रेस सिस्टम हटाने के लिए सरकार को निर्देश जारी किए जाएं।
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धर्म स्थलों पर इनका उपयोग भविष्य में बैन करने के लिए संबंधित पक्षों को कड़े निर्देश दिए जाएं। ध्वनि प्रदूषण (नियमन व नियंत्रण) नियमावली 2000 को लागू करना सुनिश्चित करवाया जाए। इसका पालन न होने का दुष्परिणाम आम नागरिक भोग रहे हैं।

पढ़ाई और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे विद्यार्थी, बीमार नागरिक, बुजुर्गों को विकट स्थितियों में रहना पड़ रहा है। उनके सुनने की क्षमता और संवेदनाओं को नुकसान हो रहा है। 

अदालत ने कहा, बहरे बने बैठे हैं अधिकारी

हाईकोर्ट ने अपनी टिप्पणी में कहा, ‘विभिन्न अदालतों के ध्यान में लाउड स्पीकरों का मामला समय-समय पर लाया गया है। इसे लेकर सुप्रीम कोर्ट से लेकर हाईकोर्ट तक ने पिछले कुछ समय में आदेश दिए हैं, इसके बावजूद यह मामला खत्म नहीं हो रहा। इसकी वजह सरकारी अधिकारियों की अकर्मण्यता और जवाबदेही की कमी है। वे 2000 में बने नियमों को लागू नहीं करवा पा रहे। इन नियमों का खुलेआम उल्लंघन हो रहा है। ध्वनि प्रदूषण बेरोकटोक जारी है और अधिकारी बहरे बने बैठे हैं।’ 
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