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गिरधारी एनकाउंटर मामला : फिलहाल पुलिसकर्मियों पर नहीं दर्ज होगा हत्या का मुकदमा

Tue, 02 Mar 2021 10:56 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Tue, 02 Mar 2021 10:56 PM IST
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high court stays filing case on police men in Girdhari encounter case.
एनकाउंटर में मारा गया था गिरधारी। - फोटो : amar ujala

गिरधारी एनकाउंटर मामले में शामिल रहे पुलिस अफसरों व कर्मियों पर फिलहाल हत्या का मुकदमा दर्ज नहीं होगा। हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने हत्या का मुकदमा दर्ज करने के निचली अदालत के आदेश पर अपने अगले आदेश तक रोक लगा दी है। कोर्ट ने केस दर्ज करने की अर्जी देने वाले को नोटिस जारी कर मामले की अगली सुनवाई 15 मार्च नियत की है।

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न्यायमूर्ति दिनेश कुमार सिंह ने यह आदेश राज्य सरकार की पुनरीक्षण याचिका पर दिया। इसमें मुकदमा दर्ज करने संबंधी सीजेएम लखनऊ के आदेश को चुनौती दी गयी है। राज्य सरकार की तरफ  से अपर महाधिवक्ता विनोद कुमार शाही की दलील थी कि अभियोजन की स्वीकृति के बगैर सरकारी कर्मियों के खिलाफ  वादी की अर्जी पर मुकदमा दर्ज करने का आदेश नहीं दिया जा सकता था। ऐसे में सीजेएम का आदेश कानून की मंशा के खिलाफ होने की वजह से रद्द किए जाने लायक है।
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सीजेएम लखनऊ की अदालत ने आजमगढ़ के सर्वजीत सिंह की अर्जी पर 26 फरवरी को एनकाउंटर टीम में शामिल रहे डीसीपी ईस्ट संजीव सुमन, विभूतिखंड थाने के इंस्पेक्टर चंद्रशेखर सिंह व अन्य पुलिस अफसरों-कर्मियों पर हत्या का केस दर्ज करने का आदेश दिया था। सीजेएम की कोर्ट ने इस मामले में सुसंगत धाराओं में मुकदमा दर्ज कर विवेचना का आदेश इंस्पेक्टर हजरतगंज को दिया था। साथ ही एफआईआर की प्रति सात दिन में अदालत में पेश करने को कहा था।

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पहले दिया था ये आदेश

25 फरवरी को कोर्ट ने एफआईआर दर्ज करने का आदेश देते हुए कहा था कि किसी एक घटना में मात्र एक पक्ष की ओर से ही मुकदमा दर्ज कराए जाने का कोई प्रावधान नहीं है। घटना के दूसरे पक्ष को, जो खुद को घटना से या दर्ज मुकदमे से पीड़ित मानता है, उसे भी अपना पक्ष रखने का पूरा अधिकार है।

कोर्ट ने कहा था कि थाने से प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार एक व्यक्ति की मृत्यु मुठभेड़ के दौरान हुई। मृत्यु पुलिस द्वारा आत्मरक्षा में हुई या आत्मरक्षा के दायरे से बाहर जाकर कोई कृत्य किया गया, यह विवेचना का विषय है। अजीत हत्याकांड के आरोपी गिरधारी विश्वकर्मा उर्फ डॉक्टर की पुलिस कस्टडी के दौरान कथित मुठभेड़ में मौत मामले में सीजेएम सुशील कुमारी ने कहा था कि ऐसे मामलों में सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट दिशा निर्देश है कि संलिप्त पुलिस टीम के खिलाफ किसी नजदीकी थाने में मामला पंजीकृत होना चाहिए और उसकी विवेचना संलिप्त पुलिस टीम के मुखिया से वरिष्ठ श्रेणी के अधिकारी द्वारा की जानी चाहिए।

कोर्ट ने यह भी कहा था कि मामले के संज्ञान के समय अभियोजन स्वीकृति के संदर्भ में यह स्थिति है कि मात्र प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कराया जाना संज्ञान लेने की परिधि में नहीं आता है। इसके साथ ही उक्त संरक्षण किसी भी लोक सेवक को ऐसे कृत्य के विरुद्ध प्राप्त नहीं होता, जिसमें स्वीकृत रूप से एक आपराधिक कृत्य हुआ है।

कोर्ट ने कहा था कि गिरधारी के विरुद्ध विवेचक द्वारा दर्ज मामलों की विवेचना सहायक पुलिस आयुक्त हजरतगंज लखनऊ द्वारा की जा रही है। इसलिए हजरतगंज थाने में ही एफआईआर दर्ज कराया जाना न्यायोचित है। कोर्ट ने प्रभारी निरीक्षक हजरतगंज को नियमानुसार विवेचना की कार्रवाई अपने वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार दिए गए निर्देश के अनुसार संपादित कराने का निर्देश दिया।

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