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हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से मांगा जवाब : पंचायत चुनाव में कोरोना से मरने वाले कर्मियों के मुआवजे के शासनादेश को चुनौती

Sat, 27 Nov 2021 02:43 PM IST
पंकज श्रीवास्‍तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: पंकज श्रीवास्‍तव Updated Sat, 27 Nov 2021 02:43 PM IST
सार

सुप्रीम कोर्ट ने रीपक कंसल के केस में कहा है कि कोरोना से दो से तीन माह में मरने वालों के परिजनों को मुआवजा दिया जा सकता है। जबकि राज्य सरकार के बीते एक जून के शासनादेश में यह अवधि 30 दिन कर दी गई है, जो तर्कसंगत नहीं है।

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High court seeks reply from state government challenging mandate of compensation of workers who died of corona in panchayat elections
लखनऊ हाईकोर्ट

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने पंचायत चुनाव में ड्यूटी के दौरान कोरोना से मरने वाले कर्मियों के मुआवजे के शासनादेश को चुनौती देने के मामले में राज्य सरकार से तीन सप्ताह में जवाब मांगा है। इसमें चुनाव ड्यूटी से 30 दिन में कोरोना से मरने वाले सरकारी कार्मिकों के आश्रितों को ही मुआवजा देने का प्रावधान किया गया है। न्यायमूर्ति मनीष माथुर ने यह आदेश कुशलावती की याचिका पर दिया। 

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याची के अधिवक्ता शरद पाठक की दलील थी कि सुप्रीम कोर्ट ने रीपक कंसल के केस में कहा है कि कोरोना से दो से तीन माह में मरने वालों के परिजनों को मुआवजा दिया जा सकता है। जबकि राज्य सरकार के बीते एक जून के शासनादेश में यह अवधि 30 दिन कर दी गई है, जो तर्कसंगत नहीं है। कोर्ट ने याचिका को गौर करने लायक करार देकर राज्य सरकार समेत अन्य पक्षकारों को मामले में जवाबी हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया है। अदालत ने अगली सुनवाई 17 दिसंबर को नियत की है।

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