फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   High court says outsource employess are also have the rights to get minimum vages.

हाईकोर्ट का फैसला: आउटसोर्स कर्मचारियों को भी दें न्यूनतम वेतनमान, अपनी जिम्मेदारी से मुंह नहीं मोड़ सकती सरकार

Sun, 30 Apr 2023 03:24 PM IST
ishwar ashish संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Sun, 30 Apr 2023 03:24 PM IST
सार

हाईकोर्ट ने एक मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि राज्य सरकार दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों को न्यूनतम वेतन देने की जिम्मेदारी से मुंह नहीं मोड़ सकती है।

विज्ञापन
High court says outsource employess are also have the rights to get minimum vages.
- फोटो : Social Media

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने एक अहम फैसले में कहा कि सेवा प्रदाता एजेंसी के जरिए रखे गए दैनिक वेतन भोगी कर्मी को न्यूनतम वेतनमान देने की कानूनी बाध्यता की जिम्मेदारी से राज्य सरकार मुंह नहीं मोड़ सकती। कर्मियों के हित में इस अहम नजीर के साथ कोर्ट ने बागवानी व खाद्य प्रसंस्करण विभाग को आदेश दिया कि दैनिक वेतन भोगी कर्मी प्रेमचंद्र को उसके समान कार्यरत अन्य कर्मियों की तरह न्यूनतम वेतनमान प्रदान करें।

विज्ञापन


न्यायमूर्ति विवेक चौधरी की एकल पीठ ने यह फैसला व आदेश प्रेमचंद्र की याचिका पर दिया। याची राज्य टिशू कल्चर प्रयोगशाला के वैज्ञानिक विभाग में दैनिक वेतन भोगी चतुर्थ श्रेणी कर्मी के रूप में बतौर माली कार्यरत है। उसने अपने समान कार्यरत कर्मियों की तरह न्यूनतम वेतनमान की मांग के साथ विभाग को प्रत्यावेदन दिया था। पर बागवानी व खाद्य प्रसंस्करण विभाग के निदेशक ने न्यूनतम वेतनमान देने से इन्कार कर दिया था। इसके खिलाफ याची हाई कोर्ट पहुंचा।
विज्ञापन


ये भी पढ़ें - 'अखिलेश यादव को सारा सच पता है': महिला पहलवानों के आरोपों के बीच बोले बृजभूषण, UP-हरियाणा के रेसलर्स पर कहा ये
विज्ञापन
विज्ञापन


ये भी पढ़ें - माननीय भी मनमानी की पा रहे सजा: यूपी में लंबी हो रही सदस्यता खोने वाले सांसदों-विधायकों की फेहरिस्त


उधर, सरकारी वकील ने यह कहते हुए याचिका का विरोध किया कि याची एक सेवा प्रदाता एजेंसी के जरिए कार्यरत है। ऐसे में वह न्यूनतम वेतनमान पाने का हकदार नहीं है। कोर्ट ने विभाग के निदेशक का 15 जुलाई, 2019 का आदेश निरस्त कर नजीर के साथ याचिका को मंजूर कर लिया।

प्रदेश में तीन लाख आउटसोर्स कर्मी
- श्रम विभाग के 30 सितंबर, 2022 के शासनादेश के अनुसार, अकुशल श्रमिक की मजदूरी 9743 रुपये, अर्धकुशल की 10717 व कुशल की 12005 रुपये प्रतिमाह निर्धारित की गई है।

- वर्तमान में प्रदेश में विभिन्न विभागों में आउटसोर्सिंग पर करीब तीन लाख कर्मी कार्यरत हैं। इन कर्मियों के लिए 2022-23 में 1017 करोड़ और 2023-24 में 1135 करोड़ों रुपये का प्रावधान किया गया है। आउटसोर्सिंग के लिए सेवा प्रदाता का चयन जेम पोर्टल के माध्यम से किया जाता है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed