बुलंदशहर रेपकांड पर हाईकोर्ट ने अखिलेश सरकार को घेरा, पूछे ये सवाल
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बुलंदशहर रेप कांड को लेकर हाईकोर्ट ने गहरी चिंता जताई है। हाईकोर्ट ने कहा है कि इस प्रकार की घटनाएं मामूली नहीं होती हैं। इससे पता चलता है कि कानून-व्यवस्था की क्या स्थिति है। ऐसा चलता रहा तो जनता का भरोसा कानून पर से उठ जाएगा।
घटना पर स्वत: संज्ञान लेने के बाद सोमवार को मुख्य न्यायाधीश दिलीप बी भोसले और न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा की पीठ ने कहा कि हम इस मामले की जांच सीबीआई से कराने का आदेश देंगे। सरकार बताए कि सीबीआई जांच में उसे क्या आपत्ति है या सरकार स्वयं इस मामले को सीबीआई के हवाले कर दे। वहीं, प्रदेश सरकार ने कहा है कि अगर हाईकोर्ट आदेश करे तो वह सीबीआई जांच कराने के लिए तैयार है।
पीठ ने बुधवार, 10 अगस्त को महाधिवक्ता से सरकार का पक्ष रखने के लिए कहा है। पीठ ने कहा कि सिर्फ सीबीआई जांच का आदेश देकर केस बंद नहीं किया जाएगा बल्कि हम लगातार इस प्रकरण और महिलाओं की सुरक्षा तथा कानून-व्यवस्था की मॉनिटरिंग करेंगे। महाधिवक्ता विजय बहादुर सिंह ने भी यह स्वीकार किया कि घटना शर्मनाक है और सरकार इसे लेकर बेहद गंभीर है।
‘क्या राजनीतिक दल से संबंधित हैं अधिकारी?’
यूपी पुलिस जांच कर रही है। अदालत ने महाधिवक्ता को दो दिन में बताने को कहा है कि राजमार्गों पर सुरक्षा के लिए क्या इंतजाम किए गए हैं। घटना में शामिल अपराधियों की सामाजिक और राजनीतिक पृष्ठभूमि की भी जानकारी मांगी गई है। यदि उनका किसी राजनीतिक दल से संबंध है तो इसकी जानकारी अदालत को दी जाए।
पीठ ने एसपी बुलंदशहर को इस मामले में जांच की प्रगति बताने को कहा है। यह भी पूछा है कि राजमार्गों पर सुरक्षा के क्या प्रबंध हैं, क्या उचित स्थान पर चेक पोस्ट बने हैं और नियमित पेट्रोलिंग होती है या नहीं।
महाधिवक्ता ने बताया कि तीन लोग गिरफ्तार किए गए हैं। इस पर पीठ ने कहा, वह तीनों संदिग्ध हैं अभियुक्तों की गिरफ्तारी होनी चाहिए, वह क्यों नहीं हो पा रही है। इस मामले को लेकर लखनऊ खंडपीठ में भी याचिका दाखिल है जिसकी पत्रावली पीठ ने इलाहाबाद तलब कर ली है। याचिका पर 10 अगस्त को सुनवाई होगी।
पढ़ें हाईकोर्ट के सवाल
वहीं, हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने भी बुलंदशहर गैंगरेप मामले की जांच सीबीआई से करवाने के लिए दाखिल याचिका पर प्रदेश सरकार से सात दिन में जवाबी हलफनामा मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 22 अगस्त को निर्धारित की है।
इस मामले में संस्था द्वारा दाखिल याचिका में याची अधिवक्ता प्रिंस लेनिन ने मामले की जांच सीबीआई से करवाने का आग्रह किया था। उनका यह भी आग्रह था कि प्रदेश के राजमार्गों की सुरक्षा बढ़ाई जानी चाहिए। अपर महाधिवक्ता बुलबुल गोदियाल ने हाईकोर्ट में कहा कि याची का पुलिस की जांच पर भरोसा न जताया जाना सीबीआई को जांच देने की वजह नहीं हो सकती।
उन्होंने यह भी कहा कि अगर हाईकोर्ट सीबीआई जांच के लिए निर्देश देता है तो ऐसा करने में प्रदेश सरकार को कोई हिचकिचाहट नहीं होगी। जस्टिस अमरेश्वर प्रताप साही और जस्टिस डॉ. विजय लक्ष्मी की खंडपीठ ने दोनों पक्षों को सुनकर कहा कि प्रदेश सरकार पूरे मामले पर एक समुचित जवाबी हलफनामा एक सप्ताह के अंदर दायर करे।
हाईकोर्ट के गंभीर सवाल
1- जांच सीबीआई को सौंपने में क्या आपत्ति है
2- घटना क्यों हुई, इसका जिम्मेदार कौन है
3- अपराधियों की सामाजिक, राजनीतिक पृष्ठभूमि
4- अपराधियों का किसी पार्टी से संबंध तो नहीं है
4- अब तक क्या जांच हुई, कितने लोग गिरफ्तार हुए
5- पीड़ितों को मुआवजा देने के लिए क्या कदम उठाए
6- हाईवे पर अपराध रोकने के लिए क्या उपाय किए हैं
7- राजमार्गों पर अपराध रोकने के लिए क्या योजना है