सहायक शिक्षक भर्ती परीक्षा के परिणाम घोषित करने पर हाईकोर्ट ने 29 जनवरी तक लगाई रोक
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इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने 69,500 सहायक शिक्षकों की भर्ती परीक्षा के परिणामों पर अगली सुनवाई तक रोक लगाते हुए यथा स्थिति बनाए रखने का आदेश दिया है। सोमवार सुबह हुई सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने 29 जनवरी को अगली सुनवाई रखी है।
परीक्षा के परिणाम 22 जनवरी को जारी किए जाने थे। हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार को हलफनामा प्रस्तुत करने के लिए कहा है। इससे पहले भी हाईकोर्ट ने 18 व 21 जनवरी तक यथा स्थिति बनाए रखने के निर्देश दिए थे।
इस संबंध में दाखिल सैकड़ों याचिकाओं की साथ सुनवाई करते हुए जस्टिस राजेश सिंह ने सरकारी वकील से कहा कि वह सरकार का पक्ष अब हलफनामे में दाखिल करें। वहीं, 29 जनवरी की सुनवाई के बाद प्रतिवादी पक्षों को दो दिन में अपना प्रतियुत्तर रखने के लिए कहा गया है।
आपको बता दें कि मामले में रिजवान अहमद समेत सैकड़ों शिक्षामित्रों ने हाईकोर्ट में याचिकाएं दायर की हैं, जिनकी एक साथ सुनवाई की जा रही है। याचिकाओं में सरकार द्वारा सात जनवरी को निकाले गए उस शासनादेश को चुनौती दी गई है, जिसमें परीक्षा के लिए कट ऑफ 65 (सामान्य) व 60 (आरक्षित वर्ग) निर्धारित किया गया था।
ये हैं याचिकाकर्ताओं की आपत्तियां
- परीक्षा से पहले कट ऑफ तय नहीं थी। जब परीक्षा हो चुकी है तो उसके बाद कट ऑफ तय नहीं की जा सकती।
- पिछली परीक्षा में अनारक्षित व आरक्षित वर्गों के लिए कट ऑफ क्रमश: 45 व 40 प्रतिशत रखा गया था। इस दफा बहुत ज्यादा रखा गया है।
- यूपी बेसिक शिक्षा (शिक्षक) सेवा (बीसवां संशोधन) नियमावली 2017 के अनुसार, अभ्यर्थी को केवल परीक्षा पास करनी होती है, कट ऑफ या क्वालीफाइंग मार्क्स का नियम नहीं है।
- परीक्षा होने के बाद नए नियम बनाए गए हैं, जो अवैधानिक हैं।
- किसी खेल के शुरू होने के बाद न तो उसके नियम बदले जा सकते हैं, न नए नियम जोड़े जा सकते हैं।
- सरकार का सात जनवरी को शासनादेश किन्हीं अन्य उद्देश्यों के प्रभाव में बनाया गया लगता है, जिससे बीएड डिग्री धारकों को फायदा मिले और शिक्षामित्र बाहर हो जाएं।
- शिक्षामित्रों को सुप्रीम कोर्ट ने टीईटी पास करने के बाद केवल दो दफा लगातार होने वाली भर्ती परीक्षा में शामिल होने का मौका दिया ह। यह दूसरा व अंतिम मौका है। उनका अवसर बना रहना चाहिए।