प्रदूषण पर हाईकोर्ट नाराजः जनरेटर और पटाखों को रोकने के दिए निर्देश
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इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने प्रदेश सरकार को कहा है कि विवाह समारोहों के दौरान जनरेटरों और पटाखों के इस्तेमाल पर रोक लगाने के लिए वह उचित निर्देश जारी करे।
रोक के दायरे में अन्य जुलूसों और आयोजनों को भी लाया जाए। साथ ही नगर निगम व अन्य संबंधित विभागों से शहर में लगे कूड़े के ढेर हटाने को कहा गया है। लखनऊ में स्मॉग को लेकर अजमल खान, महिमा पाहवा और अधिवक्ता डॉ. अशोक निगम ने याचिकाएं दायर की थीं।
इनकी सुनवाई करते हुए जस्टिस अमरेश्वर प्रताप साही और जस्टिस अनिल कुमार श्रीवास्तव (द्वितीय) की खंडपीठ ने कहा कि पूर्व में दिए निर्देशों के अनुरूप नगर निगम ने अखबारों में फोन नंबर छपवाए हैं, जिन पर गंदगी की समस्या और कूड़ा जलाकर प्रदूषण फैलाए जाने की सूचना दी जा सकती है।
वहीं, याची अजमल खान ने अमेरिका व ऑस्ट्रेलिया की इंटरनेशनल एन्वायर्नमेंट प्रोटेक्शन रिपोर्ट और प्रदूषण रोकने के लिए दिल्ली सरकार की ओर से उठाए गए कदमों के बारे में बताया।
मुख्य स्थायी अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के 10 नवंबर को दिए निर्देशों के अनुसार प्रदेश सरकार ने राज्य स्तरीय निगरानी समिति गठित की है। साथ ही मुख्य सचिव ने 12 नवंबर को सभी संबंधित विभागों के प्रमुख सचिवों से इस बारे में चर्चा की। गौरतलब है कि दीपावली के बाद लखनऊ के आसमान में देश में सबसे ज्यादा जहरीले तत्व पाए गए थे।
शहर में जहां-तहां नहीं छोड़ सकते गंदगी के ढेर
हाईकोर्ट ने अपने निर्णय में कहा कि मुख्य सचिव की बैठक में दिए गए निर्देशों पर संबंधित विभागों ने कोई एक्शन लेने संबंधी अनुपालना रिपोर्ट नहीं दी है। हाईकोर्ट ने नौ नवंबर को शहर में पेड़ों और पत्थर की कटाई रोकने, मिट्टी उड़ने की वजह बनने वाले निर्माण रोकने और कचरा जलाने पर रोक लगाने को कहा था।
इन्हीं निर्देशों और 10 नवंबर को एनजीटी की ओर से दिए निर्देशों के आधार पर मुख्य सचिव ने बैठक में सभी विभागों को कदम उठाने के लिए कहा था, लेकिन किसी भी विभाग ने ऐसे किसी एक्शन के बारे में अनुपालना रिपोर्ट नहीं दी।
हाईकोर्ट ने इस पर नाराजगी जताते हुए 24 नवंबर को सुनवाई के दौरान सभी विभागों से अनुपालना रिपोर्ट देने को कहा है। हाईकोर्ट ने कहा कि शादियों में जनरेटर और पटाखों पर रोक के लिए राज्य सरकार निर्देश जारी करेगी। वहीं प्रदूषण फैलने की दूसरी वजहों पर भी सरकार को कदम उठाने होंगे। सफाई एक बड़ा मुद्दा है। शहर में गंदगी के ढेरों को जहां का तहां नहीं छोड़ा जाएगा।