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'बगैर प्रक्रिया संपत्ति नहीं ले सकती सरकार'
रमाकांत मिश्र/लखनऊ
Updated Wed, 09 Oct 2013 02:28 AM IST
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हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने सड़क, बिल्डिंग, पुल या चकरोड बनाने के लिए कानून का उल्लंघन कर किसी की निजी जमीन व भवन आदि को सरकार की तरफ से हड़पे जाने पर रोक लगा दी है।
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लोगों के संपत्ति के हक को अहम मुकाम देने वाले इस राहत भरे फैसले से 36 साल से सरकारी चंगुल से अपनी संपत्ति छुड़ाने की कानूनी लड़ाई लड़ रहे याची को न्याय के साथ हर्जाना भी मिला है।
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कोर्ट ने इस मामले में राज्य सरकार पर पांच लाख का हर्जाना ठोंका है। इसमें से तीन लाख रुपये याचिकाकर्ता को मिलेंगे। बाकी रकम हाईकोर्ट के मीडियेशन सेंटर को दी जाएगी।
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साथ ही सूबे के गृह विभाग द्वारा पुलिस विभाग की सुरक्षा शाखा के लिए राजधानी में ‘ओम निवास’ नामक भवन लिए जाने पर सख्त एतराज जताया है।
कोर्ट ने इस भवन में कराए गए निर्माण को सरकारी खर्चे पर ढहाकर इसकी पहले जैसी स्थिति बहाल कर याची को तीन माह में वापस किए जाने के निर्देश दिए हैं।
अदालत ने सरकार द्वारा विभिन्न निर्माणों के लिए कानूनी प्रक्रिया का पालन किए बगैर लोगों की जमीन व परिसर लिए जाने के बढ़ रहे मामलों का शिद्दत से संज्ञान लेते हुए इसे कानून की मंशा के खिलाफ करार दिया है।
न्यायमूर्ति देवी प्रसाद सिंह व न्यायमूर्ति अशोक पाल सिंह की खंडपीठ ने दूरगामी महत्व का यह फैसला श्रीनारायण सिंह की रिट मंजूर कर मंगलवार को सुनाया।
इसमें याची ने वर्ष 1977 में ली गई अपनी बिल्डिंग को सरकार के चंगुल से छुड़ाए जाने का आग्रह किया था। याची का कहना था कि उसे बीच में सीलिंग कानून के अपीलीय कोर्ट समेत हाईकोर्ट से भी राहत मिली, इसके बावजूद सरकार ने उसका भवन मुक्त नहीं किया और उसे कब्जा पाने के लिए कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ी।
मुख्य सचिव डीएम व अफसरों को जारी करें सर्कुलर
कोर्ट ने फैसले की कॉपी सूबे के मुख्य सचिव को भेजकर निर्देश दिया कि वह प्रदेश के जिलाधिकारियों व अन्य अफसरों को तीन माह में सर्कुलर जारी करें कि वे कानूनी मंशा के खिलाफ किसी की निजी संपत्ति में दखल देने पर जवाबदेह होंगे।
अदालत ने अफसरों को यह भी निर्देश दिए जाने की सख्त ताकीद की है कि कानून के तहत अधिग्रहण किए बगैर सड़क, बिल्डिंग, पुल या चकरोड आदि बनाने के लिए लोगों की निजी संपत्ति न लें व न इसमें दखल दें।
कोर्ट ने इस आदेश के पालन की रिपोर्ट भी हलफनामे पर पेश करने को कहा है। साथ ही फैसले की कॉपी सूबे के प्रमुख सचिव विधि एवं केंद्रीय विधि सचिव को दो हफ्ते में इस आशय के साथ भेजने को कहा है कि नौकरशाहों समेत सभी केंद्रीय व राज्य सरकार के कर्मचारियों के प्रशिक्षण कार्यक्रम में टॉपिक रूल आफ लॉ (कानून का शासन) को शामिल करने पर गौर किया जाए।
तीन माह में याची को दिलाएं कब्जा
अदालत ने राज्य सरकार समेत अन्य पक्षकारों को निर्देश दिया है कि तीन माह में याची की संपत्ति को पहले जैसी स्थिति में बहाल कर इसका कब्जा उसे दिया जाए।
कोर्ट ने ताकीद की कि ऐसा न किए जाने पर तीन माह बाद लखनऊ के डीएम व एसएसपी याची को तत्काल इसका कब्जा दिलाने की कार्रवाई करेंगे।
कोर्ट ने सख्त आदेश दिया कि इस जमीन पर चाहे जैसा भी निर्माण किया गया हो, उसे राज्य सरकार के खर्चे पर पहले जैसी यथास्थिति बहाली के लिए ढहाया जाएगा।
अफसरों से वसूलें हर्जाना की रकम
अदालत ने मामले में पांच लाख रुपये का हर्जाना लगाते हुए सरकार को छूट दी है कि इसकी वसूली उन अफसरों से की जा सकती है, जिन्होंने अवैधानिकता को बढ़ावा दिया और याची की जमीन कब्जे में रखी।
कोर्ट के इस फैसले से राजधानी की पुलिस सुरक्षा शाखा के दफ्तर को ढहाए जाने का रास्ता साफ हो गया है।