अल्पसंख्यक मामले में सरकार को चुनौती
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हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने समाजवादी पेंशन योजना के तहत अल्पसंख्यकों का 25 % कोटा तय करने के खिलाफ दायर पीआईएल पर राज्य सरकार से जवाब तलब किया है।
अदालत ने राज्य सरकार की तरफ से पेश अपर महाधिवक्ता के आग्रह पर मामले में जवाबी हलफनामा दाखिल करने के लिए तीन हफ्ते का वक्त दिया है।
न्यायमूर्ति वीके शुक्ल और न्यायमूर्ति बीके श्रीवास्तव द्वितीय की खंडपीठ ने बृहस्पतिवार को यह आदेश हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस समेत दस अधिवक्ताओं द्वारा दायर पीआईएल पर दिया।
इसमें उक्त पेंशन स्कीम के उस प्रावधान को रद्द करने की गुजारिश की गई है जिसके तहत अल्पसंख्यक समुदायों के लिए 25 फीसदी आरक्षण की व्यवस्था है।
याचियों की तरफ से अधिवक्ता हरिशंकर जैन का तर्क था कि इस पेंशन योजना का लाभ सूबे के 40 लाख लोगों को दिया जाना है।
7 फरवरी 2014 के संबंधित शासनादेश के पैरा 2.1 में इस योजना में 25 % कोटा अल्पसंख्यक समुदायों के लिए तय किया गया है। यानी पेंशन के लिए दस लाख अल्पसंख्यकों का कोटा निर्धारित है।
अपर महाधिवक्ता की दलील, पेंशन योजना सबके लिए
जैन की दलील थी कि अल्पसंख्यकों को विशेष सुविधा या लाभ नहीं दिया जा सकता बल्कि उन अल्पसंख्यकों को सुविधा या लाभ दिया जा सकता है, जो शैक्षणिक व सामाजिक रूप से पिछड़े हैं।
चूंकि यूपी के अल्पसंख्यक समुदायों को शैक्षणिक व सामाजिक रूप से पिछड़ा घोषित नहीं किया गया है, अत: इन्हें सरकार की तरफ से विशेष सुविधा या लाभ दिया जाना कानून की मंशा के खिलाफ है।
उधर, राज्य सरकार की तरफ से अपर महाधिवक्ता जफरयाब जीलानी की दलील थी कि यह योजना सबके लिए है, लिहाजा भेदभाव का सवाल ही नहीं।
उन्होंने जवाब दाखिल करने के लिए वक्त देने की गुजारिश की। इस पर अदालत ने तीन हफ्ते का समय दिया। अगली सुनवाई 7 नवंबर को होगी।