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Madarsa News : हाईकोर्ट ने पूछा, जांच मे दोषी पाये गये अधिकारियों से अभी तक क्यों नहीं की गई वसूली

Thu, 12 Jan 2023 08:49 PM IST
पंकज श्रीवास्‍तव अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ Published by: पंकज श्रीवास्‍तव Updated Thu, 12 Jan 2023 08:49 PM IST
सार

न्यायालय ने निदेशक अल्पसंख्यक कल्याण से कहा है कि शपथपत्र दाखिल करे तथा उसमें यह भी बताने को कहा है कि वसूली न करने के लिए जिम्मेदार अधिकारियों से क्यों न घोटाले की रकम की वसूली की जाए।

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High Court asked, why the recovery has not been done yet from the officers found guilty in the investigation
लखनऊ हाईकोर्ट

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खण्डपीठ ने मदरसा छात्रों से जुड़े  करोड़ों रूपये के स्कालरशिप के घोटाले के लिये  साल 2014 में दाखिल याचिका पर सुनवाई के दौरान नाराजगी जताते हुये, निदेशक अल्पसंख्यक कल्याण से पूछा है कि विभागीय जांच मे दोषी पाए गए अधिकारी से अभी तक वसूली क्यों नहीं की गई।

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न्यायालय ने निदेशक अल्पसंख्यक कल्याण से कहा है कि शपथपत्र दाखिल करे तथा उसमें यह भी बताने को कहा है कि वसूली न करने के लिए जिम्मेदार अधिकारियों से क्यों न घोटाले की रकम की वसूली की जाए। न्यायालय मामले की अगली तारीख 25 जनवरी लगाते हुये कहा कि यदि अगली तारीख तक शपथपत्र नही आता है तो निदेशक अल्पसंख्यक कल्याण को कोर्ट में हाजिर होना होगा।
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यह आदेश मुख्य न्यायमूर्ति राजेश बिंदल और न्यायमूर्ति आलोक माथुर की खंडपीठ ने इस्लामिक मदरसा मॉर्डनाइजेशन टीचर्स एसोसिएशन की ओर से दाखिल वर्ष 2014 की जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान पारित किया। न्यायालय को प्रति शपथ पत्र के जरिए बताया गया कि हाथरस के तत्कालीन जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी बीपी सिंह ने छात्रों के फर्जी नाम से 24 करोड़ 92 लाख 76 हजार 312 रुपये के स्कॉलराशिप धनराशि की मांग की थी। यह भी बताया गया कि इस सम्बंध में 2011-12 व 2012-13 का कोई भी रिकॉर्ड कार्यालय में मौजूद नहीं है। मामले में बीपी सिंह के विरुद्ध एफआईआर दर्ज है, हालांकि निदेशक द्वारा संस्तुति देने के पश्चात वर्ष 2019 में अभियोजन शुरू हो सका है। इस पर न्यायालय ने नाराजगी जताते हुए कहा कि प्रतीत होता है कि वह स्वयं इसमें शामिल हो अथवा उसके कार्यालय के स्टाफ ने संस्तुति सम्बंधी फ़ाइल दबा रखी हो।
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न्यायालय को यह भी बताया गया कि दोषी पाए गए अधिकारी से 27 लाख 25 हजार रुपये वसूली की नोटिस भेजी गई थी, हालांकि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वसूली पर रोक लगा दी। इस पर न्यायालय ने कहा कि मामला करोड़ों का है तो सिर्फ 27 लाख 25 हजार की वसूली का विवरण ही क्यों दिया गया। न्यायालय ने यह भी पूछा है कि वसूली न हो पाने के लिए कौन से अधिकारी जिम्मेदार हैं।  

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