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हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार से पूछा, केजीएमयू को कितना देते हैं फंड

Wed, 28 Jul 2021 02:00 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Wed, 28 Jul 2021 02:00 AM IST
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high court asked about fund releasing to kgmu
लखनऊ। हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने पिछली सरकार में केजीएमयू में पैथोलॉजिकल टेस्ट का शुल्क 33 से 50 फीसदी तक बढ़ाए जाने के मामले में राज्य सरकार से पूछा है कि केजीएमयू को कितना फंड दिया जाता है। कोर्ट ने यह बताने को राज्य सरकार को तीन हफ्ते का समय दिया है।
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न्यायमूर्ति ऋतुराज अवस्थी और न्यायमूर्ति दिनेश कुमार सिंह की खंडपीठ ने मंगलवार को यह आदेश लोक न्यायार्थ संस्था की तरफ से 2017 में दाखिल एक जनहित याचिका पर दिया। इससे पहले कोर्ट ने 27 फरवरी 2017 को केजीएमयू से उसे विभिन्न स्रोतों से प्राप्त होने वाले फंड की विस्तृत जानकारी मांगी थी और सरकार को हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया था। केजीएमयू ने अपना हलफनामा दाखिल कर दिया था। मंगलवार को सुनवाई के दौरान कोर्ट के सामने आया कि राज्य सरकार का हलफनामा अभी नहीं आया है। इस पर कोर्ट ने सरकार को तीन हफ्ते का समय दिया। हलफनामे में सरकार को यह भी बताना है कि केजीएमयू को कौन से वित्तीय संसाधन प्रदान किए गए व केजीएमयू की ओर से क्या अतिरिक्त मांग रही। 2017 की इस याचिका में केजीएमयू में पैथोलॉजिकल टेस्ट के शुल्क में बढ़ोतरी का मुद्दा उठाया गया है। कहा गया है कि अन्य सरकारी अस्पतालों में लगभग डेढ़ सौ टेस्ट फ्री हैं, जबकि केजीएमयू में ऐसा नहीं है। सरकारी वकील ने जवाबी हलफनामा दाखिल करने को तीन हफ्ते का समय देने का आग्रह किया। कोर्ट ने इसे देकर कहा कि इसके बाद हफ्ते हफ्ते भर में याची प्रतिउत्तर दाखिल कर सकेगा। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 4 सप्ताह बाद नियत की है।
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