जवान महिलाओं को होती है ये गंभीर बीमारी
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
40 वर्ष से कम उम्र की महिलाओं में रक्तचाप की बीमारी ‘ताकायाशू आर्टराइटिस’ हो सकती है। ये बीमारी अधिकतर युवा महिलाओं को होती है। इसकी वजह से शरीर को खून की आपूर्ति करने वाली धमनियां (आर्टरी) सिकुड़ जाती हैं।
इससे खून की दौड़ान रुकने लगती है और रक्तचाप बढ़ने लगता है। सही इलाज न होने पर मरीज की मौत हो सकती है। किंग जार्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) के रुमेटोलॉजी विभाग के 10वें स्थापना दिवस के मौके पर आयोजित व्याख्यान में यह जानकारी क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज वेल्लूर के डॉ. देवाशीष डांडा ने दी।
डॉ. डांडा ने बताया कि ताकायाशू आर्टराइटिस बीमारी 10 में से नौ महिलाओं को हो सकती है। इस रोग के बारे में सही जानकारी ने होने के कारण अधिकतर मरीजों की पहचान नहीं हो पाती है।अधिकतर मरीज जब उन्हें हाथ या पैर में गैंगरीन हो जाता है तब वो सर्जरी विभाग या फिर उच्चरक्चाप का इलाज कराने मेडिसिन विभाग पहुंचते हैं।
इस बीमारी में नहीं मिलती मरीज की नाड़ी
यदि मरीज का ब्लड प्रेशर और पल्स की सही से जांच कर ली जाए तो डॉप्लर या फिर एंजियोग्राफी की जरूरत पड़ती है। जांच के बाद धमनियों में जहां सिकुड़न होती है वहां स्टेंट डालकर खून की दौड़ान सामान्य कर दी जाती है।
उन्होंने बताया कि ताकायाशू आर्टराइटिस में मरीज की पल्स (नाड़ी) नहीं मिलती है। यदि फिजीशियन पूरे शरीर की सभी आर्टरी में पल्स की जांचकर ले तो बीमारी का पता लग जाता है।
यदि किसी भी धमनी की पल्स नहीं मिलती है तो फिर ताकायाशू आर्टराइटिस हो सकती है। शुरुआती दौर में बीमारी पकड़ने से इलाज संभव हैं। बाद में हाथ-पैर काटने की नौबत आ सकती है। ज्यादा गंभीर होने पर मरीज की मौत हो जाती है।
डॉ. देवाशीष ने बताया कि ताकायाशू आर्टराइटिस का पता लगाने के लिए दोनों हाथों का ब्लड प्रेशर नापना चाहिए। सामान्यत: एक हाथ से दूसरे हाथ के ब्लड प्रेशर में 5 से 10 का अंतर होता है लेकिन बीमारी होने पर ये अंतर बहुत अधिक होता है।
क्या है ताकायाशू आर्टराइटिस
ये एक ऑटो इम्यून डिजीज है। ऑटो इम्यून का मतलब ये है कि ऐसी बीमारी जिसमें शरीर का प्रतिरक्षण तंत्र शरीर के खिलाफ काम करने लगता है। ये प्रतिरक्षण तंत्र आमतौर पर शरीर की बीमारियों से रक्षा करता है।
जैसे ही कोई वायरस या बैक्टीरिया शरीर में प्रवेश करता है प्रतिरक्षण तंत्र तुरंत उसके विरोध करता है और उसे खत्म कर देता है। जब इम्यून सिस्टम (प्रतिरक्षण तंत्र) कमजोर होता है तो यही वायरस व बैक्टीरिया बीमारियां पैदा करते हैं।
इस बीमारी की खोज जापान के डॉ. ताकायाशू ने की थी। मूलरूप से आंख के विशेषज्ञ डॉ. ताकायाशू ने रेडिटना की धमनियों में पहली बार ये संक्रमण देखा था। उस दौरान वो बीमारी के बारे में नहीं जान पाए लेकिन जब शोध के बाद बीमारी के बारे में पूरी तरह से पता चला तो उन्हीं के नाम से इसे जाना गया।