साफ-सफाई के बहाने सियासी समीकरण साधने में जुटी भाजपा
तीन साल पहले गांधी जयंती यानी 2 अक्टूबर 2014 की तारीख। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का स्वच्छ भारत मिशन अभियान शुरू करने का एलान।
अब तीन साल बाद केंद्र की भाजपा सरकार का 15 सितंबर से गांधी जयंती 2 अक्टूबर 2017 तक ‘स्वच्छता ही सेवा’ अभियान का एलान।
देखने में भले ही यह सामाजिक सरोकारों से जुड़े सामान्य अभियान लगें लेकिन इनके पीछे सियासी समीकरण छिपे दिखाई देते हैं।
भले ही केंद्र का देश में स्वच्छता का माहौल बनाने और लोगों को इस मुद्दे पर जागरूक करने का आह्वान दलगत राजनीति से ऊपर उठकर इन अभियानों में हाथ बंटाने का हो।
पर, इसके पीछे कहीं न कहीं भाजपा द्वारा निकाय और लोकसभा चुनाव का गणित दुरुस्त करने की कोशिश दिख रही है। मामला दलित समीकरण साधने के एजेंडे पर आगे बढ़ने का भी है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सहित पार्टी के सभी नेता और प्रदेश सरकार के मंत्री प्रधानमंत्री मोदी के जन्मदिन पर रविवार को प्रदेश भर में स्वच्छता अभियान में हिस्सा लेंगे और कई जगह सफाई कर्मियों को सम्मानित करने का कार्यक्रम है।
प्रदेश में एक महीने बाद होने वाले निकाय चुनाव भाजपा के लिए काफी महत्वपूर्ण हैं। महत्वपूर्ण जीत-हार के लिहाज से नहीं बल्कि लोकसभा चुनाव 2019 के लिहाज से। नतीजों को केंद्र व प्रदेश सरकार के कामकाज से जोड़कर देखा जाएगा।
भाजपा के रणनीतिकारों को पता है कि नतीजे बेहतर आए तो लोकसभा चुनाव के लिए तैयारी में मदद मिलेगी और अच्छा माहौल बनेगा। दूसरी परिस्थिति में चुनौती बढ़ेगी। इसीलिए रणनीतिकारों का प्रयास है कि निकाय चुनाव में भाजपा के पक्ष में बेहतर नतीजे आएं।
आमतौर पर शहरी मतदाताओं की पसंद मानी जाने वाली भाजपा बुरे वक्त में भी इस चुनाव में अच्छा प्रदर्शन करती आई है। प्रदेश के जिन 12 नगर निगमों में 2012 में चुनाव हुए थे, उनमें 10 में भाजपा के महापौर जीते थे। मगर, तब इसकी एक वजह कोई नकारात्मक माहौल न होना था।
भाजपा के पास यह कहने का बहाना था कि शहरों की सफाई और सुविधाओं के लिए वह चाहकर भी बहुत कुछ नहीं कर पाती क्योंकि प्रदेश में दूसरे दलों की सरकार होने से पूरा सहयोग नहीं मिलता। केंद्र सरकार भी नगरों के विकास और नागरिकों की समस्याएं खत्म करने में मदद नहीं कर पाती।
यह भी है वजह
आज परिस्थितियां बदली हुई हैं। प्रधानमंत्री के स्वच्छ भारत मिशन के तीन साल पूरे होने के बाद भी स्वच्छता की कसौटी पर उप्र का कोई महानगर प्रथम दस स्थानों में नहीं आ पाया है।
इसे लेकर विरोधी दलों की तरफ से लगातार भाजपा पर निशाना साधा जाता रहा है। आंकड़ों की बात न भी करें तो भी सफाई के मामले में प्रदेश के बड़े और छोटे नगर लोगों को संतुष्ट नहीं करते। भले ही इसके कारण अलग-अलग हों।
लगता है कि भाजपा के रणनीतिकारों ने इस अभियान के सहारे 15 दिन तक कार्यकर्ताओं, नेताओं, प्रदेश सरकार के मंत्रियों व विधायकों को सफाई के एजेंडे के सहारे लोगों के बीच पहुंचाने की योजना बनाई है ताकि यह संदेश चला जाए कि सफाई और स्वच्छता भाजपा की प्रतिबद्धता है।
रणनीतिकारों का मानना है कि इससे भाजपा कार्यकर्ताओं का स्थानीय जनता के साथ संपर्क और संवाद हो जाएगा। यह संदेश देने में भी सफलता मिलेगी कि भाजपा को लोगों की समस्याओं की चिंता है। इसका लाभ निकाय चुनाव में मिलेगा।
पीएम के क्षेत्र में आज रहेंगे सीएम
सिर्फ सफाई के बहाने ही समीकरण दुरुस्त करने की कोशिश नहीं है बल्कि सफाई कर्मियों को साधकर दलित फैक्टर दुरुस्त करने पर भी ध्यान है।
स्वामी विवेकानंद द्वारा शिकागो में दिए गए विश्व प्रसिद्ध भाषण की 125 वीं वर्षगांठ पर अभी छह दिन पहले प्रधानमंत्री मोदी का यह कहना कि ‘हम स्वस्थ इसलिए नहीं हैं कि अच्छे अस्पताल और डॉक्टर हैं, हम स्वस्थ इसलिए हैं क्योंकि सफाई कर्मी सफाई कर रहे हैं।
वंदेमातरम कहने का हक सिर्फ सफाई कर्मियों को है क्योंकि वे देश को स्वच्छ रखने में जुटे हैं।’ प्रधानमंत्री के जन्मदिन पर रविवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ रविवार को वाराणसी में मोदी के संसदीय क्षेत्र में सफाई कर्मियों को सम्मानित करके इसी कोशिश को आगे बढ़ाने जा रहे हैं।
योगी के अलावा अन्य भाजपा नेता और प्रदेश सरकार के मंत्री भी जगह-जगह स्वच्छता अभियान में हिस्सा लेंगे और सफाई कर्मियों को सम्मानित करेंगे।
ऐसा माना जा रहा है कि भाजपा के रणनीतिकार सफाई कर्मियों के बहाने दलित फैक्टर साधने के साथ ही नगरों और महानगरों की मलिन बस्तियों में रहने वालों को साधकर भी समीकरण दुरुस्त कर लेना चाहते हैं।