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तकनीक : बिना सर्जरी बदल दिया दिल का वॉल्व
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अब बिना सर्जरी दिल के वॉल्व बदलना संभव हो गया है। डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान में शुक्रवार को ट्रांस कैथेटर एओर्टिक वॉल्व रिप्लेसमेंट (टीएवीआर) तकनीक से बिना चीरा लगाए महज 45 मिनट में मरीज के दिल का वॉल्व बदल दिया गया।
दिल की बीमारी से पीड़ित संत कबीर नगर निवासी 71 वर्षीय बुजुर्ग को पिछले सप्ताह संस्थान में भर्ती किया गया था। कार्डियोलॉजी विभाग में डॉ. भुवन चन्द्र तिवारी के निर्देशन में उनका इलाज शुरू किया गया। जांच में पता चला कि उनके एओर्टिक वॉल्व में सिकुड़न है। ऐसे में वॉल्व बदलना जरूरी था। इसके लिए सर्जरी की जरूरत पड़ती है, जिसमें बुजुर्गों को खतरा रहता है। ऐसे में डॉक्टरों ने टीएवीआर विधि से वॉल्व बदलने का सुझाव दिया। इसमें सीने की हड्डी नहीं काटी जाती है। एंजियोप्लास्टी की तरह मरीज की जांघ की नस में छोटा सा चीरा लगाकर पंचर करके कैथेटर के जरिये वॉल्व को हृदय तक ले जाकर प्रत्यारोपित किया जाता है। सर्जरी से वॉल्व बदलने में करीब चार घंटे लगते हैं, वहीं इस तकनीक में सिर्फ 45 मिनट लगे। डॉ. भुवनचंद्र तिवारी ने बताया कि अहमदाबाद के एक डॉक्टर की मदद के साथ संस्थान के डॉ. सुदर्शन और उनकी टीम ने नई विधि से पहला वॉल्व प्रत्यारोपण किया।
जल्द मिल जाएगी छुट्टी
टीएवीआर तकनीक में आमतौर पर वॉल्व बदलने के दूसरे दिन से ही मरीज चलना-फिलना शुरू कर देते हैं। पांच दिन की निगरानी के बाद छुट्टी दे दी जाती है। डिस्चार्ज होने के बाद कुछ समय तक मरीज को डॉक्टर की निगरानी में ही रखा जाता है।
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दिल की बीमारी से पीड़ित संत कबीर नगर निवासी 71 वर्षीय बुजुर्ग को पिछले सप्ताह संस्थान में भर्ती किया गया था। कार्डियोलॉजी विभाग में डॉ. भुवन चन्द्र तिवारी के निर्देशन में उनका इलाज शुरू किया गया। जांच में पता चला कि उनके एओर्टिक वॉल्व में सिकुड़न है। ऐसे में वॉल्व बदलना जरूरी था। इसके लिए सर्जरी की जरूरत पड़ती है, जिसमें बुजुर्गों को खतरा रहता है। ऐसे में डॉक्टरों ने टीएवीआर विधि से वॉल्व बदलने का सुझाव दिया। इसमें सीने की हड्डी नहीं काटी जाती है। एंजियोप्लास्टी की तरह मरीज की जांघ की नस में छोटा सा चीरा लगाकर पंचर करके कैथेटर के जरिये वॉल्व को हृदय तक ले जाकर प्रत्यारोपित किया जाता है। सर्जरी से वॉल्व बदलने में करीब चार घंटे लगते हैं, वहीं इस तकनीक में सिर्फ 45 मिनट लगे। डॉ. भुवनचंद्र तिवारी ने बताया कि अहमदाबाद के एक डॉक्टर की मदद के साथ संस्थान के डॉ. सुदर्शन और उनकी टीम ने नई विधि से पहला वॉल्व प्रत्यारोपण किया।
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जल्द मिल जाएगी छुट्टी
टीएवीआर तकनीक में आमतौर पर वॉल्व बदलने के दूसरे दिन से ही मरीज चलना-फिलना शुरू कर देते हैं। पांच दिन की निगरानी के बाद छुट्टी दे दी जाती है। डिस्चार्ज होने के बाद कुछ समय तक मरीज को डॉक्टर की निगरानी में ही रखा जाता है।
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