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मुख्यमंत्री योगी की हाईकोर्ट से गुहार-पाक्सो एक्ट के मामलों की प्राथमिकता से हो सुनवाई
Sun, 11 Oct 2020 11:03 PM IST
पंकज श्रीवास्तव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: पंकज श्रीवास्तव
Updated Sun, 11 Oct 2020 11:03 PM IST
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
- फोटो : amar ujala
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाईकोर्ट से गुहार लगाई है कि पाक्सो एक्ट के मामलों की सुनवाई प्राथमिकता से कराए जाने के लिए निचली अदालतों को निर्देश जारी करें। सरकार ने हाईकोर्ट से यह अनुरोध प्रदेश में दुष्कर्म के लंबित मामलों की बढ़ती संख्या को देखते हुए किया गया है।
प्रदेश में 20 हजार से अधिक दुष्कर्म के मामले अदालतों में लंबित हैं। प्रदेश सरकार की कोशिश है कि महिला संबंधी अपराधों में अपराधियों को कम से कम समय में सजा दिलाई जाए जिससे लोगों का न्यायिक व्यवस्था पर भरोसा बढ़े। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खुद भी महिला संबंधी अपराधों को लेकर संवेदनशील हैं और समय समय पर अधिकारियों को निर्देश देते रहते हैं। यही वजह है कोविड काल में भी महिला संबंधी अपराधों में 1835 वाद का निपटारा किया गया। इस दौरान 612 मामलों में अभियुक्तों को सजा भी हुई। इसमें 193 मामलों में आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई।
महिला संबंधी अपराधों में सजा दिलाने में यूपी नंबर एक
नेशनल क्राइम रिकार्ड ब्यूरो के 2019 के आंकड़ों की बात करें तो उत्तर प्रदेश महिला संबंधी अपराधों में सजा दिलाने के मामले में नंबर एक रहा है। इस दौरान कुल 15116 मामले निस्तारित हुए। वहीं 2016 के मुकाबले दुष्कर्म के मामलों में 42 प्रतिशत व महिला अपहरण
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प्रदेश में 20 हजार से अधिक दुष्कर्म के मामले अदालतों में लंबित हैं। प्रदेश सरकार की कोशिश है कि महिला संबंधी अपराधों में अपराधियों को कम से कम समय में सजा दिलाई जाए जिससे लोगों का न्यायिक व्यवस्था पर भरोसा बढ़े। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खुद भी महिला संबंधी अपराधों को लेकर संवेदनशील हैं और समय समय पर अधिकारियों को निर्देश देते रहते हैं। यही वजह है कोविड काल में भी महिला संबंधी अपराधों में 1835 वाद का निपटारा किया गया। इस दौरान 612 मामलों में अभियुक्तों को सजा भी हुई। इसमें 193 मामलों में आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई।
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महिला संबंधी अपराधों में सजा दिलाने में यूपी नंबर एक
नेशनल क्राइम रिकार्ड ब्यूरो के 2019 के आंकड़ों की बात करें तो उत्तर प्रदेश महिला संबंधी अपराधों में सजा दिलाने के मामले में नंबर एक रहा है। इस दौरान कुल 15116 मामले निस्तारित हुए। वहीं 2016 के मुकाबले दुष्कर्म के मामलों में 42 प्रतिशत व महिला अपहरण
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