फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   headache is dengerous

हल्के में न लें सिरदर्द, भारी पड़ सकता है

Tue, 12 Nov 2013 10:29 AM IST
अतुल भारद्वाज/लखनऊ
अतुल भारद्वाज/लखनऊ Updated Tue, 12 Nov 2013 10:29 AM IST
विज्ञापन
headache is dengerous

उफ्फ! ये सिरदर्द। जैसे सुई चुभ रही है। हथौड़ा बरस रहा है। जी मितला रहा है। ऐसी बातें हम अपने आसपास आए दिन सुनते रहते हैं, सिरदर्द के सैकड़ों कारण हो सकते हैं।

विज्ञापन


किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) के साइंटिफिक सेंटर में सोमवार को आयोजित ‘हेडेक अपडेट-2013’में देशभर से आए विशेषज्ञों ने माइग्रेन के तमाम रूपों पर फोकस किया।
विज्ञापन


केजीएमयू में न्यूरोलॉजी विभाग के प्रोफेसर डॉ. राकेश शुक्ला कहते हैं कि प्राइमरी हेडेक डिस्ऑर्डर की समस्या और उससे जुड़ी स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां आज एक आम समस्या बन गई है।
विज्ञापन
विज्ञापन


तनाव से होने वाले सिरदर्द की बात करें तो विकसित देशों में 80 प्रतिशत महिलाएं और दो तिहाई पुरुष इससे पीड़ित होते हैं।

बंगलूरू में हाल ही हुए एक रिसर्च का हवाला देते हुए डॉ. राकेश कहते हैं कि इनमें 22.8 फीसदी लोग माइग्रेन से,33.3 फीसदी लोग तनाव से जुड़े सिरदर्द और 2.1 फीसदी क्रॉनिक डेली हेडेक से पीड़ित पाए गए।

3.4 फीसदी लोगों में सिरदर्द का स्पष्ट कारण सामने नहीं आया। सिरदर्द के पीछे दवाओं की ओवरडोज भी एक कारण हो सकता है।

अ कप ऑफ कॉफी एंड एस्प्रिन
आम लोग सिरदर्द की समस्या को जितना हल्के में लेते हैं, उतनी ही समस्या इस क्षेत्र में देश में रिसर्च की भी है।

संजय गांधी पीजीआई में न्यूरोलॉजी के विभागाध्यक्ष डॉ.यूके मिश्रा कहते हैं, डॉक्टर भी मानकर चलते हैं कि यह तो ‘अ कप ऑफ कॉफी एंड एस्प्रिन’ वाली समस्या है।

जबकि हजारों साल पहले की चरक संहिता में कितने विस्तार से इस समस्या को लेकर अध्ययन मिलता है।

बड़ा दर्द दे रहा माइग्रेन
सिरदर्द का एक बड़ा कारण माइग्रेन हो सकता है। महिलाओं में तो यह समस्या ज्यादा ही देखने को मिलती है।

शोध के दौरान जुटाए गए आंकड़ों का विश्लेषण करें तो 18 फीसदी महिलाओं और 6 फीसदी पुरुषों में माइग्रेन की समस्या अस्पताल में रिपोर्ट होती है।

आखिर माइग्रेन है क्या
आसान शब्दों में इसे आधे सिर का दर्द कह सकते हैं। बोलचाल में इसे अधकपारी या आधासीसी के नाम से जाना जाता है।

विवेकानंद इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज कोलकाता के कंसल्टेंट न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. अम्बर चक्रवर्ती से जब हमने इसकी असल वजह जाननी चाही, तो उन्होंने कहा-जेनेटिकल समस्या।

इस समस्या के कारण किसी छोटी से छोटी चीज में बदलाव भी माइग्रेन को उभार सकता है। इसे साधारण भाषा में कारक या ट्रिगर कह सकते हैं। ये ट्रिगर हर केस में अलग-अलग हो सकते हैं।

तो क्या यह तंत्रिका तंत्र की समस्या है
विलिस के बाद हुए रिसर्च में सामने आया कि माइग्रेन की ज्यादातर समस्या तंत्रिका तंत्र से जुड़ी है। इसके बाद न्यूरल थ्योरी आई,जो ज्यादा मान्य हुई।

हालांकि यह थ्योरी भी विलिस को पूरी तरह से नहीं नकारती। यही वजह है कि इसे न्यूरो वैस्कुलर डिस्ऑर्डर के रूप में जाना जाने लगा।

कॉमन माइग्रेन ट्रिगर्स
शोरगुल, धूप में रहना, तनाव, यात्रा, शारीरिक श्रम, नींद की कमी, उपवास रहना,तेज गर्मी,मौसम में बदलाव-ये सब वे कारक हैं जो आए दिन माइग्रेन के दर्द को भड़का देते हैं।


वहीं महिलाओं के केसेज में व्रत रखने, बाल धोने या बालों के सूखे होने जैसे कारक प्रमुख रूप से सामने आते हैं। टीनएजर्स में ज्यादातर मामलों में भूखे रहने पर यह समस्या देखने को मिलती है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed