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Lucknow News: मां को एंबुलेंस में लेकर पांच घंटे भटका भर्ती होने के दो घंटे बाद चली गई जान

Fri, 18 Jul 2025 02:22 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Fri, 18 Jul 2025 02:22 AM IST
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He was wandering for five hours with his mother in the ambulance and died two hours after being admitted
लखनऊ। बीमार हेल्थ सिस्टम ने एक और मरीज की जान ले ली। एक मजबूर बेटा रात में पांच घंटे तक बुजुर्ग मां को एंबुलेंस में लेकर सरकारी अस्पतालों के चक्कर लगाता रहा, लेकिन समय रहते उसकी मां को इलाज नहीं मिला। जब उन्हें बलरामपुर अस्पताल में भर्ती किया गया, तब तक देर हो चुकी थी। दो घंटे बाद बुजुर्ग ने दम तोड़ दिया।
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लखीमपुर खीरी स्थित गोला निवासी शिक्षक संजीव शर्मा ने सांस लेने में तकलीफ होने पर मां कांती देवी (72) को 12 जुलाई को सिविल अस्पताल में भर्ती कराया था। उनकी सेहत में सुधार नहीं हुआ। बुधवार को हालत गंभीर होने पर डॉक्टर ने रात 10:30 बजे लोहिया अस्पताल रेफर किया। अस्पताल प्रशासन ने एंबुलेंस भी मुहैया कराई। हालांकि, लोहिया की इमरजेंसी में मौजूद डॉक्टरों ने आईसीयू व वेंटिलेटर खाली न होने की बात कहते हुए कांती देवी को भर्ती करने से इनकार कर दिया। इसे लेकर संजीव की दो घंटे तक कहासुनी होती रही।
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डेढ़ बजे मरीज को ठाकुरगंज संयुक्त चिकित्सालय भेज दिया गया। संजीव का कहना है कि यहां के डॉक्टरों ने भर्ती करने के लिए कहा, लेकिन मरीज की हालत नाजुक होने की जानकारी दी। इसके बाद आईसीयू व वेंटिलेटर की जरूरत बताकर बलरामपुर अस्पताल भेज दिया। यहां 3:30 बजे कांती देवी को इमरजेंसी में भर्ती करके वेंटिलेटर पर रखा गया। हालांकि, दो घंटे बाद ही उनकी मौत हो गई। संजीव ने लोहिया संस्थान के डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगाया है।
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12 तारीख को भी वापस कर दिया था लोहिया से

संजीव का आरोप है कि 12 जुलाई को वह मां को सबसे पहले लोहिया की इमरजेंसी ही ले गए थे। तब भी डॉक्टरों ने भर्ती लेने से मना कर सिविल अस्पताल रेफर कर दिया था। आरोप लगाया कि बुधवार रात भी जूनियर डॉक्टर मरीज को भर्ती करने पर राजी नहीं हुए।




सोशल मीडिया पर लगाई गुहार भी काम नहीं आई

संजीव ने परिजनों ने आला अफसरों से सोशल मीडिया पर मदद की गुहार लगाई। उम्मीद भी कि शायद उनकी गुहार जिम्मेदारों तक पहुंच जाए, पर ऐसा नहीं हो सका।





कोट्स

सिविल अस्पताल को मरीज रेफर करने से पहले संस्थान में जानकारी जुटाई जानी चाहिए कि बेड खाली है या नहीं। तीमारदार शिकायत करते हैं तो मामले की जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी।

डॉ. भुवन तिवारी, प्रवक्ता लोहिया संस्थान
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