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हाशिम अंसारी बोले, राम की आजादी है मकसद

Thu, 08 May 2014 07:51 AM IST
धीरेंद्र सिंह/अमर उजाला, लखनऊ
धीरेंद्र सिंह/अमर उजाला, लखनऊ Updated Thu, 08 May 2014 07:51 AM IST
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मुद्दई हाशिम अंसारी का कहना है कि अयोध्या में राम मंदिर नहीं बने बल्कि जरूरत राम की आजादी की है।

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‘पहले तो असीर का गम था, आजाद हुए तो ये गम है। हर साख पर उल्लू बैठा है, अंजाम गुलिस्ता क्या होगा।’ यह शेर सुनाते हुए बाबरी मस्जिद के 93 वर्षीय बुजुर्ग मुद्दई हाशिम अंसारी लोकसभा चुनाव में राम मंदिर सियासत पर बिफर पड़ते हैं।

गंभीर रूप से बीमारी की हालत में भी रामकोट बूथ पर सुबह 9 बजे वोट डालकर घर लौटे हाशिम अपनी अंतिम इच्छा अब ‘राम की आजादी’ बताते हैं।

कहते हैं कि आजादी के बाद नेताओं ने देश के दो टुकड़े किए, तो बाबरी मस्जिद के तीन टुकड़े हुए। अब थक चुके हैं, मस्जिद की लड़ाई नहीं लड़ेंगे।

सुप्रीम कोर्ट जाने से शिकायत

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नरेंद्र मोदी की सियासत पर बोले कि ‘मोदी कुछ दिनों के लिए राम की हालत में रह लें, तो हम और हनुमानगढ़ी के महंत ज्ञानदास मिलकर फैसला कर देंगे।

बोले, देखिए हम जिंदगी से परेशान हो चुके हैं, राम को आजाद देखना चाहते हैं। हम पहले भी फैसला करना चाहते थे, लेकिन हिंदू महासभा सुप्रीम कोर्ट चला गया।

हाशिम अंसारी राममंदिर मुद्दे पर सियासी फायदा लेने में कांग्रेस-भाजपा दोनों को कोसते हुए कहते हैं कि वे नहीं चाहते कि मुद्दा हल हो, क्योंकि तब उनकी हर चुनाव में वोट बैंक की राजनीति कैसे चलेगी। अच्छा लीडर और मजबूत लीडर किसी पार्टी में नहीं है।

आजादी बाद कांग्रेस ने बाबरी मस्जिद में मंदिर बनाकर दे दिया, लेकिन राम आज तक आजाद नहीं हो पाए हैं। जबकि मुसलमान-हिंदू दोनों उलझे हुए हैं।

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हाईकोर्ट तक की पैरवी

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सवाल किया कि क्या अगर मंदिर बन गया तो प्रवीण तोगड़िया उसके पुजारी बनेंगे और गिरीराज किशोर महंत। हाशिम कहते हैं कि हमारे मकान पर बाबरी मस्जिद का फोटो लगा था, हम राम को आजाद देखना चाहते थे, इसलिए फोटो उतार दिया।

पहले हर 15 दिन पर परिसर के अंदर जाते थे, अब जाना छोड़ दिए। हम मस्जिद की लड़ाई नहीं लड़ना चाहते, इससे हमारा मुल्क बर्बाद होगा।

हाशिम कहते हैं ‘मैं सन् 1950 से धारा 145 का मुद्दई हूं, जब मस्जिद में मूर्ति रखी गई थी।’ 11 साल तक तारीख पर तारीख पड़ती रही। लखनऊ हाईकोर्ट तक पैरवी की, मगर फैसला आया तो मंजूर नहीं हुआ। मुसलमान कहता है फैसला हो, बंदरबांट नहीं। या तो मुसलमान को मिले या हिंदू को।

हाशिम मानते हैं कि विवाद का हल कोर्ट से बाहर हो सकता है। अब मुसलमान इस समस्या का हल चाहता है। लेकिन मोदी भी ईमानदारी से प्रयास करते नहीं दिखते। इनका दावा है कि बहुमत में सरकार बनेगी तो हल करेंगे, यानि बहुमत मिलने तक राम को ऐसे ही टाट के नीचे देखना चाहते हैं।

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