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सुना है क्या: 'सरकार से भी ताकतवर हैं साहब'; साथ ही 'सबको बदल डालो और तनाव से नेता परेशान' के किस्से

Mon, 20 Jul 2026 01:22 PM IST
Bhupendra Singh अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ Published by: Bhupendra Singh Updated Mon, 20 Jul 2026 01:22 PM IST
सार

यूपी के राजनीतिक गलियारे और प्रशासन में तमाम ऐसे किस्से हैं, जो हैं तो उनके अंदरखाने के... लेकिन, चाहे-अनचाहे बाहर आ ही जाते हैं। ऐसे किस्सों को आप अमर उजाला के "सुना है क्या" सीरीज में पढ़ सकते हैं। तो आइए पढ़ते हैं इस बार क्या है खास...

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He is more powerful than govt itself along with replace everyone and politicians distressed by stress
सुना है क्या/suna hai kya - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

यूपी के राजनीतिक गलियारे और प्रशासनिक गलियों में आज तीन किस्से काफी चर्चा में रहे। चाहे-अनचाहे आखिर ये बाहर आ ही जाते हैं। इन्हें रोकने की हर कोशिश नाकाम होती है। आज की कड़ी में 'सरकार से भी ताकतवर हैं साहब' की कहानी। इसके अलावा 'खुद को बचाना है तो सबको बदल डालो' और 'नौकरशाहों के बीच तनाव से नेता परेशान' के किस्से भी चर्चा में रहे। आगे पढ़ें, नई कानाफूसी...

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सरकार से भी ताकतवर हैं साहब

आमतौर पर सरकार को सर्वशक्तिमान माना जाता है लेकिन एक साहब को सरकार से भी ज्यादा ताकतवर माना जा रहा है। तभी तो सरकार के बार-बार फरमान के बाद भी साहब अपने अधीन काम करने वाली कार्यदायी संस्था के मुखिया को नहीं हटा पा रहे हैं जबकि कई घोटाले के आरोपी मुखिया को हटाने के लिए ऊपर से दो-दो बार आदेश आ चुका है। साफ है कि खेतों को पानी पिलाने वाले महकमे के साहब अब तो सरकार को भी पानी पिलाने पर तुले हैं। चर्चा तो यह भी है कि कार्यदायी संस्था के मुखिया की कलाकारी पर साहब इतने फिदा हैं कि मुखिया को साहब के घर का दरवाजा दिन के बजाय पूरी रात खुला रहता है।

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खुद को बचाना है तो सबको बदल डालो

ब्यूरोक्रेसी में बड़ी कुर्सियों वाली तबादला सूची आने की सुगबुगाहट कई लोगों को बेचैन कर रही है। अब लड़ाई में जब लक्ष्य साफ नहीं दिखे तो तलवार भांजना ही सही तरीका होता है। ठीक इसी तरह कई अफसर अपने मातहतों को ताश के पत्तों की तरह फेंट रहे हैं। भले ही कोई वजह न हो, तबादले पर तबादले जारी हैं। उनको उम्मीद है, इससे शासन में संदेश जाएगा कि जिले में सारे कील-कांटे दुरुस्त हो रहे हैं तो बदलने की वजह क्या है? वैसे यह तरीका पुराना है और ट्रांसफर करने वाले उतने की घाघ। वे भी ऐसे ही तरीके आजमा कर यहां तक पहुंचे हैं।

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नौकरशाहों के बीच तनाव से नेता परेशान

एक ही विभाग में तैनात दो नौकरशाहों के बीच मतभेद से प्रगति का चक्का थम रहा है। जनसुविधा से जुड़े विकास कार्यों को आगे बढ़ाने की फाइलें डंप हो गई हैं। बताते हैं कि मंत्रीजी ने भी दखल दिया। इस संबंध में वे फाइल पर भी लिख चुके हैं लेकिन बात नहीं बनी। एक अन्य विभाग के मंत्रीजी भी इससे परेशान हैं, क्योंकि उनके चुनावी क्षेत्र की जनसुविधा की एक परियोजना भी प्रभावित हो रही है। वह भी इसकी शिकायत कर चुके हैं। अब चुनाव में जाना है तो जनप्रतिनिधियों की चिंता और डर भी स्वाभाविक है।

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