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जातीय आधारित रैलियों का मामला : चार प्रमुख राजनैतिक पार्टियों को हाईकोर्ट द्वारा दोबारा जारी किया गया नोटिस
Sun, 04 Dec 2022 08:01 PM IST
पंकज श्रीवास्तव
माई सिटी रिपोर्टर, अमर उजाला, लखनऊ
माई सिटी रिपोर्टर, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: पंकज श्रीवास्तव
Updated Sun, 04 Dec 2022 08:01 PM IST
सार
11 नवंबर को सुनवाई के दौरान न्यायालय ने पाया कि वर्ष 2013 में ही चारो प्रमुख राजनीतिक पार्टियों को नोटिस जारी किया गया था इसके बावजूद चारों प्रमुख राजनीतिक दलों की ओर से कोई न्यायलय में उपस्थित नहीं हुआ है।
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लखनऊ हाईकोर्ट
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विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने उत्तर प्रदेश में जातीय रैलियों पर रोक लगाने की मांग वाले एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए, मुख्य चुनाव आयुक्त समेत प्रदेश के चार प्रमुख दलों भाजपा, कांग्रेस, सपा व बसपा को दोबारा नई नोटिस जारी करने का आदेश दिया है। मामले की अगली तारीख 15 दिसम्बर को नियत की है।
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यह आदेश मुख्य न्यायमूर्ति राजेश बिंदल व न्यायमूर्ति जसप्रीत सिंह की खंडपीठ ने स्थानीय अधिवक्ता मोतीलाल यादव द्वारा वर्ष 2013 में दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया। याचिका की 11 नवंबर को सुनवाई के दौरान न्यायालय ने पाया कि वर्ष 2013 में ही चारो प्रमुख राजनीतिक पार्टियों को नोटिस जारी किया गया था इसके बावजूद चारों प्रमुख राजनीतिक दलों की ओर से कोई न्यायलय में उपस्थित नहीं हुआ है। इस पर न्यायालय ने नई नोटिस जारी करने का आदेश दिया।
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इस जनहित याचिका के माध्यम से प्रदेश में जातीय रैलियों पर प्रतिबंध लगाए जाने की मांग की गई थी । याचिका पर सुनवाई के पश्चात न्यायालय ने 11 जुलाई 2013 को प्रदेश में राजनीतिक दलों द्वारा जातीय आधारित रैलियाँ किए जाने पर रोक लगा दी थी। न्यायालय ने अंतरिम आदेश पारित करते हुए कहा था कि जातीय सिस्टम समाज को विभाजित करता है और इससे भेदभाव उत्पन्न होता है। न्यायालय ने कहा कि जाति आधारित रैलियों को अनुमति देना संविधान की भावना, मौलिक अधिकारों व दायित्वों का उल्लंघन है।
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