सुना है क्या: आपदा में अवसर तलाश रहे मंत्री के खास, विपरीत ध्रुवों का निधि मिलन; जांच ऐसी की पूरी न हो सकी
यूपी के राजनीतिक गलियारे और प्रशासन में तमाम ऐसे किस्से हैं, जो हैं तो उनके अंदरखाने के... लेकिन, चाहे-अनचाहे बाहर आ ही जाते हैं। ऐसे किस्सों को आप अमर उजाला के "सुना है क्या" सीरीज में पढ़ सकते हैं। तो आइए पढ़ते हैं इस बार क्या है खास..
विस्तार
यूपी के राजनीतिक गलियारे और प्रशासनिक गलियों में आज तीन किस्से काफी चर्चा में रहे। चाहे-अनचाहे आखिर ये बाहर आ ही जाते हैं। इन्हें रोकने की हर कोशिश नाकाम होती है। आज की कड़ी में माननीयों के बीच कमीशन का खेल का किस्सा है। साथ ही दो और कहानियां जो यह बताएंगी कि आखिर राजनीति में आरोप और प्रत्यारोप का खेल कैसे चल रहा है? आगे पढ़ें, नई कानाफूसी...
आपदा में अवसर तलाश रहे मंत्री के खास
राजधानी से सटे एक जिले में मंत्री के खास जनप्रतिनिधि आपदा में अवसर तलाश रहे हैं। सरकार ने वक्फ बोर्ड के कील-कांटे दुरुस्त करने शुरू किए तो उनकी लालची नजर तमाम लावारिस संपत्तियों को तलाशने लगी। गिरोह बनाकर उसे खुर्द-बुर्द कराने की कवायद में जुट गए।
जिले में कुछ ऐसा नेक्सस भी बना लिया कि अधिकारी उनके इशारे पर दूसरे पक्ष पर मुकदमे लादने और जांच कराने में जुट गए। सुना है कि मंत्री और उनके कुनबे के पास पहले ही जिले की अधिकांश जमीनें हैं। लगता है कि वक्फ की संपत्तियों को भी हासिल कर कोई रियासत बनाने वाले हैं।
विपरीत ध्रुवों का निधि मिलन
विपक्ष के एक माननीय ने भी गजब कर दिया। उनके कई स्कूल चल रहे हैं और उन्होंने इन स्कूलों के लिए सत्ता पक्ष के एक माननीय की निधि से 5-5 लाख रुपये के पांच पत्र लिखवा लिए हैं। इनमें से एक-दो पत्र इन दिनों खूब वायरल हो रहे हैं। राजनीतिक गलियारों में इसके निहितार्थ तलाशे जा रहे हैं। कोई अंदरखाने चुनाव में मदद के भरोसे के रूप में देख रहा है तो कोई कुछ और कह रहा है...। खबर है मामला टॉप लेवल तक पहुंच चुका है। देखते हैं आगे क्या होता है।
जांच ऐसी की पूरी न हो सकी
लखनऊ मंडल के एक जिले में तैनात महिला अधिकारी डेढ़ साल पहले एक खेल में फंसी थीं। प्रमोशन के बाद भी बैक डेट में दाखिल खारिज कर दिए थे। मामला खुला तो मैडम ने वहां के बाबू को फोन पर खूब हड़काया। रिकॉर्डिंग वायरल हुई, जिसमें खेल का खुद ही कबूलनामा भी था।
ऊपर से जांच के आदेश हुए। हैरानी है कि अब तक मैडम पद पर काबिज हैं। जांच अधिकारी बयान ले चुके हैं लेकिन जांच अब तक फाइनल नहीं हो सकी है। अब ये इत्तेफाक है या फिर मैडम के बचाव के लिए जांच की रफ्तार धीमी है, ये चर्चा का विषय बना हुआ है।