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Lucknow News: हरितालिका तीज का व्रत, शुभ मुहूर्त में करें शिव-पार्वती का पूजन
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साभार इंटरनेट
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भाद्रपद शुक्ल पक्ष की तृतीया को हरितालिका तीज व्रत मनाया जाता है। इस वर्ष 26 अगस्त को पड़ रहा है। मां पार्वती ने भगवान शिव को प्राप्त करने के लिए अन्न, जल त्याग दिया था। कठिन तपस्या के बाद भगवान शिव ने प्रकट होकर मां पार्वती को पत्नी के रूप में स्वीकार करने का वचन दिया था। इस व्रत को करने से कन्याओं को मनचाहा वर तथा सौभाग्यवती महिलाओं को अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है।
कृष्णानगर स्थित आशुतोष महादेव मंदिर के पुजारी आशुतोष पांडेय ने बताया कि इस दिन गणेश पूजन के बाद शिव और पार्वती की उपासना की जाती है। व्रत की शुरूआत एक दिन पहले आधी रात से शुरू होती है। व्रती स्त्रियां निर्जला व्रत रखती हैं। शुद्ध वस्त्र पहनकर प्रदोष काल में शिव व पार्वती की पूजा की जाती है। माता पार्वती को सुहाग का जोड़ा और शृंगार की वस्तुएं भेंट की जाती हैं और हरितालिका तीज की व्रत कथा सुनी जाती है।
ज्योतिषाचार्य एसएस नागपाल ने बताया कि भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि का प्रारंभ 25 अगस्त को दोपहर 12:34 बजे से हुआ। तृतीया तिथि का समापन 26 अगस्त दोपहर 01:54 बजे होगा। उदया तिथि के अनुसार, हरितालिका तीज का व्रत 26 अगस्त को रखा जाएगा। इस बार चंद्रमा हस्त नक्षत्र कन्या राशि में, चंद्र मंगल का लक्ष्मी योग रहेगा। ऐसी मान्यता है कि इस व्रत को पहली बार मां पार्वती ने भगवान शंकर को प्राप्त करने के लिए रखा था। हरितालिका पूजा प्रातः काल का मुहूर्त 5ः56 बजे से 8ः31 बजे तक शुभ है और सायंकाल प्रदोषकाल में ही शिव-पार्वती की पूजा करें।
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कृष्णानगर स्थित आशुतोष महादेव मंदिर के पुजारी आशुतोष पांडेय ने बताया कि इस दिन गणेश पूजन के बाद शिव और पार्वती की उपासना की जाती है। व्रत की शुरूआत एक दिन पहले आधी रात से शुरू होती है। व्रती स्त्रियां निर्जला व्रत रखती हैं। शुद्ध वस्त्र पहनकर प्रदोष काल में शिव व पार्वती की पूजा की जाती है। माता पार्वती को सुहाग का जोड़ा और शृंगार की वस्तुएं भेंट की जाती हैं और हरितालिका तीज की व्रत कथा सुनी जाती है।
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ज्योतिषाचार्य एसएस नागपाल ने बताया कि भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि का प्रारंभ 25 अगस्त को दोपहर 12:34 बजे से हुआ। तृतीया तिथि का समापन 26 अगस्त दोपहर 01:54 बजे होगा। उदया तिथि के अनुसार, हरितालिका तीज का व्रत 26 अगस्त को रखा जाएगा। इस बार चंद्रमा हस्त नक्षत्र कन्या राशि में, चंद्र मंगल का लक्ष्मी योग रहेगा। ऐसी मान्यता है कि इस व्रत को पहली बार मां पार्वती ने भगवान शंकर को प्राप्त करने के लिए रखा था। हरितालिका पूजा प्रातः काल का मुहूर्त 5ः56 बजे से 8ः31 बजे तक शुभ है और सायंकाल प्रदोषकाल में ही शिव-पार्वती की पूजा करें।
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