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लखनऊ से नक्सलियों को हो रही असलहों की सप्लाई
विष्णु मोहन/लखनऊ
Updated Tue, 17 Dec 2013 01:26 AM IST
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तस्करी से जुड़े यूपी के कई असलहा विक्रेता नक्सलियों व अपराधियों के साथ ही पूर्वोत्तर राज्यों के नामी आतंकी संगठन नेशनल डेमोक्रेटिक फ्रंट ऑफ बोडोलैंड (एनडीएफबी) को भी असलहों व कारतूसों की सप्लाई कर रहे हैं।
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लखनऊ के अमीनाबाद स्थित किसान गन हाउस से बरामद दस्तावेजों की पड़ताल में इस बात के संकेत सामने आए हैं। एटीएस इस बाबत और साक्ष्य जुटाने की कोशिश कर रही है।
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पूर्वोत्तर राज्यों में होने वाली असलहों व कारतूसों की सप्लाई के सिलसिले में व आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए एटीएस ने केंद्रीय खुफिया एज़ेंसी को सतर्क किया है।
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एनडीएफबी असम व समीपवर्ती राज्यों में सक्रिय एक बड़ा आतंकी संगठन है। इसके सदस्यों के यूपी के कुछ असलहा विक्रेताओं से तार जुड़े होने की जानकारी से चौंकी जांच एजेंसियों ने हर पहलू की जांच शुरू कर दी है।
इसी वजह से एटीएस ने पकड़े गए लोगों को रिमांड पर लेकर पूछताछ करने का फैसला किया है। इस दौरान दुकान से बरामद दस्तावेजों की जांच जारी है।
एटीएस ने इसके साथ ही गिरफ्तार लोगों के मोबाइल नंबरों की कॉल डिटेल भी हासिल करने की कवायद शुरू कर दी है। वह पता करना चाहती है कि आरोपियों के कहां-कहां संपर्क हैं।
मामला संवेदनशील होने की वजह से एटीएस अधिकारी इस बात पर चुप्पी साधे हुए हैं। हालांकि, वे इतना जरूर मान रहे हैं कि अवैध तरीके से असलहा व कारतूस खरीदने वालों के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है।
सूत्रों के अनुसार जांच अधिकारी अभी तक असलहों व कारतूसों की अवैध तस्करी के मामले में प्रकाश में आए विक्रेताओं के आपसी संपर्क के बारे में जानकारी टटोल रहे हैं।
पहले भी हुई हैं गिरफ्तारियां
इस रैकेट का भंडाफोड़ अप्रैल 2013 में हुआ था। तब एटीएस ने अमीनाबाद स्थित नेशनल गन हाउस चलाने वाले चौक क्षेत्र के पुल गुलाम हुसैन निवासी मोहम्मद खालिद को पकड़ा था।
उसकी निशानदेही पर दो बेरेटा व एक लामा पिस्टल बरामद की गई थी। बेरेटा कंपनी का ही एक और पिस्टल, चार विदेशी पिस्टल के फ्रेम, विदेशी पिस्टलों के पुर्जे, एक लाख 32 हजार रुपये व अन्य सामान भी बरामद हुआ था।
एटीएस ने इसके अलावा खालिद के आवास से विदेशी असलहों का कैटलाग, उनके पुर्जे, पिस्टलों की ग्रिप आदि बरामद की।
खालिद से पूछताछ के बाद एटीएस ने कानपुर से तीन लोगों को पकड़ा था। इनके पास से भी विदेशी शस्त्र बनाने के पुर्जे, नाल, बट आदि सामान बरामद हुआ था।
इसके कुछ दिनों बाद एटीएस ने इसी मामले में कानपुर के मेस्टन रोड स्थित रामदास आर्मरी के संचालक अमित पाल सिंह को पकड़ा था।
इसके बाद एटीएस ने हरियाणा के सिरसा में असलहे की दुकान चलाने वाले अनिल जैन नामक विक्रेता को गिरफ्तार किया था।
उसने यह भी स्वीकार किया था कि उत्तर प्रदेश के कई शस्त्र विक्रेताओं से वह जुड़ा था, जिनके माध्यम से उसने नक्सलियों को कई बार असलहे व कारतूसों की सप्लाई दी है।
मुंबई के डीसा से जुड़ाव
विदेशी असलहों के पुर्जों की तस्करी में कई दुकानदार मुंबई के डीसा से जुड़े थे। इस पूरे मामले में एटीएस को कई अलग पहलू मिले। मुंबई के एल्विन डीसा और शिवानंद शेट्टी का नाम सामने आया था।
ये दुकानदारों को विभिन्न विदेशी असलहों के पुर्जे विदेश से लाकर मुहैया कराते थे। एटीएस ने बाद में डीसा को भी गिरफ्तार किया था, जिसने कई दुकानदारों के नाम बताए थे।
तिहरा लाभ कमा रहे दुकानदार
असलहों व कारतूसों की तस्करी व अवैध कारोबार से जुड़े विक्रेताओं को एक साथ तिहरा लाभ हो रहा था।
दुकान से होने वाले लाभ के अलावा जहां वे डीसा के गिरोह से जुड़ कर लाखों के वारे-न्यारे कर रहे थे, वहीं नक्सलियों, उग्रवादी संगठनों और आपराधिक गिरोहों को अवैध तरीके से कारतूस व शस्त्र बेच कर अलग लाभ कमा रहे थे।