सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों के लिए गाइडलाइन तय, यहां देखें
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प्रदेश सरकार ने राज्य वेतन समिति के लिए तीन मुख्य सिद्धांत तय किए हैं। यह समिति सातवें वेतन आयोग की संस्तुतियों को यूपी के कार्मिकों पर लागू करने के लिए अपनी सिफारिशें देगी। समिति इसी के दायरे में काम करेगी।
इसके अलावा समिति के सदस्यों की सुविधाएं भी तय कर दी गई हैं। मुख्यमंत्री की ओर से समिति का चेयरमैन नामित करने के साथ ही समिति काम शुरू कर देगी।
शासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि राज्य वेतन समिति को तीन मुख्य सिद्धांतों पर काम करना होगा। पहला, जो पद पूर्व से ही केंद्र सरकार के समकक्ष हैं उनके संबंध में केंद्र सरकार द्वारा स्वीकृत वेतनमानों के आधार पर पुनरीक्षण वेतनमान पर समिति विचार करेगी।
जो पद केंद्र के समकक्ष नहीं है उनके संबंध में केंद्र में उपलब्ध पदों से समकक्षता पर संस्तुति करते हुए पुनरीक्षित वेतनमान बताएगी। इसके अलावा जो पद बच रहे हैं उन पर वर्तमान में स्वीकृत वेतनमान का ही सामान्य पुनरीक्षण (रिवीजन) किया जाएगा।
इस पर आधारित होंगी समिति की संस्तुतियां
अधिकारी ने बताया कि शासन ने इन सिद्धांतों को मुख्य रूप से 1986 में गठित समता समिति की संस्तुतियों के आधार पर ही लिया है। अब इन्हीं सिद्धांतों पर केंद्रित होकर समिति को अपनी संस्तुतियां देनी होंगी।
मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को समिति के अध्यक्ष का नाम तय करना है। नाम तय होते ही समिति का गठन और उसकी गतिविधि शुरू हो जाएगी।
समता समिति की संस्तुतियां होंगी मुख्य आधार
वित्त विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि प्रदेश सरकार ने 1986 में राज्य कर्मचारियों की मांग पर अपने कर्मियों का वेतनमान केंद्र सरकार से समकक्षता के आधार पर तय करने का सिद्धांत स्वीकार कर लिया था। 14 अक्टूबर 1988 को प्रदेश सरकार ने समता समिति का गठन किया।
समिति की संस्तुतियों को कुछेक संशोधनों के साथ एक जनवरी 1986 को लागू किया गया था। इसके मुताबिक प्रदेश सरकार ने वेतनमान व महंगाई भत्ते के संबंध में केंद्र से समकक्षता स्वीकार कर ली लेकिन अन्य भत्तों व सुविधाओं के बाबत यह सिद्धांत स्वीकार नहीं किया था।
समिति के सदस्यों को मिलेंगी ये सुविधाएं
शासन ने वेतन समिति के चेयरमैन को जहां राजस्व परिषद के चेयरमैन का दर्जा देने का फैसला किया है, उसी तरह सदस्यों को प्रमुख सचिव स्तर की सुविधाएं मिलेंगी।
सूत्रों ने बताया कि समिति के अध्यक्ष को जहां समिति की प्रति बैठक 8000 रुपये प्रतिदिन की दर से मानदेय मिलेगा वहीं, सदस्यों के लिए मानदेय 6000 रुपये प्रतिदिन तय किया गया है। सरकारी वाहन भी मिलेगा।
यदि अध्यक्ष वाहन नहीं लेते हैं तो 20 हजार रुपये महीने और सदस्य वाहन नहीं लेते हैं तो 15 हजार रुपये महीने मिलेंगे। अध्यक्ष को राजस्व परिषद अध्यक्ष की तरह यात्रा भत्ता मिलेगा जबकि सदस्यों को प्रमुख सचिव की तरह यात्रा भत्ता स्वीकृत होगा। कार्यालय व आवास से जुड़ी अन्य तमाम सुविधाएं भी मिलेंगी।
पिछली वेतन समिति ने 39 महीने में दी थीं सिफारिशें
प्रदेश सरकार ने राज्य वेतन समिति से अपनी संस्तुतियां छह महीने में देने को कहा है। मगर, छठे वेतन आयोग के बाद प्रदेश में गठित वेतन समिति ने अपनी सिफारिशें देने में तीन साल से ज्यादा समय लिया था। छठे वेतन आयोग की संस्तुतियां आनेके बाद राज्य सरकार ने 29 अगस्त 2008 को वेतन समिति बनाई थी। इसने 39 महीने का समय लेकर अपनी अंतिम रिपोर्ट 30 नवंबर 2011 को दी।
इनके संबंध में समिति करेगी सिफारिशें
- सहायता प्राप्त शिक्षण व प्राविधिक शिक्षण संस्थाओं के शिक्षणेतर कर्मचारी।
- संविधान के 73 वें व 74 वें संशोधनों को ध्यान में रखते हुए स्थानीय व जिला पंचायतों के कर्मचारियों व अधिकारियों के साथ जल संस्थान व विकास प्राधिकरणों के कर्मचारी।
- विभिन्न स्वशासी संस्थाओं के कर्मचारी व अधिकारी।
- ऐसे शिक्षक जिनकेवेतनमान यूजीसी की संस्तुतियों पर तय नहीं होते।
- यूजीसी, एआईसीटीई, आईसीएआर के लिए तय वेतनमानों में कार्यरत कर्मियों को छोड़कर अन्य कर्मचारी।
- जूनियर डॉक्टर व कार्य प्रभारित (वर्कचार्ज) कर्मचारी।
इन पर भी होगा विचार
- समयमान वेतनमान, चयन वेतनमान, एसीपी का रिव्यू।
- विभिन्न तरह के भत्तों व सुविधाओं का पुनरीक्षण।
- राज्य कर्मचारियों का पेंशन निर्धारण व पुनरीक्षण।
- उन सार्वजनिक निगमों, उपक्रमों के कर्मचारी व अधिकारी जो वेतन समिति 2008 की परिधि में थे, उनके वेतनमान, समय वेतनमान, एसीपी, पेंशन, भत्ते व अन्य सुविधाएं।