गोरखपुर लाइव: भाजपा के गढ़ में गठबंधन की सीधी चुनौती
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गुरु गोरक्षनाथ की नगरी गोरखपुर यहां के रामगढ़ ताल के लिए भी जानी जाती है। लेकिन यह शहर सियासी तौर पर भाजपा के गढ़ के रूप में भी माना जाता है। यहां की शहर विधानसभा सीट के भाजपा प्रत्याशी डा. राधा मोहन दास अग्रवाल जीत की हैट्रिक लगा चुके हैं और चौथी जीत के लिए फिर मैदान में हैं।
यहां की लोकसभा सीट पर महंत आदित्यनाथ लगातार पांचवी बार भाजपा के ही सांसद हैं और कई बार से लगातार भाजपा का महापौर होता आ रहा है। इतना सब कुछ होने के बावजूद सपा-कांग्रेस गठबंधन के युवा प्रत्याशी राणा राहुल सिंह ने इस गढ़ में हलचल मचा रखी है और कई लोग चुनाव के झुकाव के सवाल पर चुप्पी साध जाते हैं।
चुनाव के मिजाज को टटोलने पर शहर के प्रतिष्ठित अधिवक्ता हरिनंदन श्रीवास्तव कुछ दुखी हो जाते हैं। कहते हैं तकलीफ यह है कि प्रत्याशी शहर में क्या करना चाहते हैं।
यहां की समस्या क्या है इसकी चर्चा कोई नहीं करता कि विकास रुका क्यों हैं, इस पर कोई मुंह नहीं खोलना चाहता। बस एक दूसरे के खिलाफ पर्चे बांटे जा रहे हैं कि कौन कितना ईमानदार है और कितना बेईमान।
हालांकि वे यह जरूर कहते हैं कि मुख्य मुकाबला भाजपा के डा. राधा मोहन अग्रवाल और कांग्रेस-सपा गठबंधन के राणा राहुल के बीच है। वे बताते हैं कि शहर के चुनाव की दिशा चुनाव के दो दिन पहले तय होती है। अभी इसके लिए थोड़ा इंतजार करना होगा।
गोरखपुर विश्वविद्यालय छात्र संघ के पूर्व महामंत्री नीरज शाही कहते हैं कि डा. राधा मोहन तामझाम से दूर और जनता को सर्वसुलभ रहे हैं। वह गनर बैठाकर भौकाल टाइट करने वाले विधायक नहीं हैं। जब भी विधानसभा चली, डा गोरखपुर की समस्याओं को लेकर बोलते नजर आए।
एम्स पूर्वांचल की सबसे बडी मांग
इसके अलावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गोरखपुर में एम्स और फर्टिलाइजर कारखाने का शिलान्यास कर चुके हैं। इन दोनों प्रोजेक्ट के लिए महंत आदित्यनाथ लंबे समय से लड़ाई लड़ रहे थे और यह पूर्वांचल की सबसे बडी मांग थी।
अग्रवाल को इसका बहुत फायदा मिल रहा है। शाही बताते हैं कि यहां का मुकाबला कांग्रेस व सपा गठबंधन के प्रत्याशी राणा राहुल से है लेकिन नतीजा अग्रवाल के पक्ष में ही जाएगा। हालांकि शाही जितनी ताकत से अग्रवाल की बेहतर स्थिति का दावा करते हैं, उस तरह की स्थिति नजर नहीं आती है।
हीरापुरी कालोनी की एक गृहिणी सुधा शुक्ला कहती हैं कि डा. साहब पिछले 15 साल से विधायक हैं। लोग पूछ रहे हैं कि इन्होंने इस 15 साल में शहर को क्या खास दिया जिसकी वजह से इन्हें फिर मौका दिया जाए? वह यह भी कहती हैं कि युवाओं का झुकाव राहुल की ओर नजर आ रहा है।
राहुल गांधी और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का प्रचार भी करने आ चुके हैं। हालांकि लड़ाई डा. और राहुल के बीच ही होगी। वी पार्क में मिले गोलधर के रहमत अली कहते हैं कि शहर में समस्याओं का अंबार है।
साफ-सफाई, शुद्ध पेयजल और जाम लाइलाज बीमारी है। इसकी कोई चर्चा नहीं करता। चुनाव है तो गठबंधन और भाजपा प्रत्याशी के बीच मुकाबला हो रहा है। बसपा के जनार्दन चौधरी ठीक से लड़े तो त्रिकोण बन जाएगा।
पर, डाक्टर भारी लग रहे हैं। हालांकि गोलघर के बिजनेसमैन वीरेंद्र अवस्थी कहते हैं कि भाजपा थोड़ा कमजोर हुई है। क्षत्रिय मतदाता एक ओर जाते नजर आ रहे हैं। युवा भी बंट रहे हैं।
ऐसे में बसपा, भाजपा और कांग्रेस गठबंधन के बीच लड़ाई रोचक हो सकती है। मोहददीपुर के पप्पू कहते हैं कि लड़ाई एकतरफा नहीं दिख रही है। गोरखनाथ के राम कैलाश कहते हैं कि यहां का चुनाव महाराज की प्रतिष्ठा से जुड़ा रहता है। वे भाजपा के स्टार प्रचारक भी हैं। ऐसे में भाजपा बेफिक्र रह सकती है।
तीन गुना के अंतर से होगी जीत: डा. राधा मोहन
लगातार निष्ठा व समर्थन से काम कर रहे हैं। जनता के चेहरे के उत्साह को देखकर कह सकता हूं कि इस बार की जीत पिछले की तीन गुना, नहीं तो कम से कम दो गुने के अंतर से होगी।
वह कहते हैं कि 2002 से लगातार विधायक हूं। सिर्फ काम और काम ही किया है। काम के अलावा किसी तरह की घटिया राजनीति नहीं की। सभी वर्गों व गरीबों की सेवा का लक्ष्य लेकर राजनीति में आया था।
वही कर रहा हूं। डा अग्रवाल कहते हैं कि भाजपा सत्ता में आ रही है। मैं यह लक्ष्य लेकर चल रहा हूं कि गोरखपुर को प्रदेश का सबसे विकसित शहर बनाना है। इसके अलावा पूर्वी यूपी के पिछडे़पन को दूर करना है।
कांग्रेस-सपा गठबंधन के प्रत्याशी राणा राहुल सिंह कहते हैं कि गठबंधन की सरकार बनना तय है। सरकार बनते ही एम्स का निर्माण शुरू कराएंगे। वह कहते हैं कि इस एम्स के लिए उन्होंने 40 दिनों तक लगातार सत्याग्रह किया है।
इसके अलावा गोरखपुर को स्मार्ट सिटी के तौर पर डवलप करेंगे। यहां सीवेज सिस्टम का विकास कराएंगे। गोरखपुर में महंगी शिक्षा एक बडी चुनौती है। वह प्रयास करेंगे कि यहां के लोगों को सस्ती और गुणवत्तापरक शिक्षा प्राप्त हो सके।
वह कहते हैं कि उनकी किसी व्यक्ति या दल से कोई लड़ाई नहीं है। हर उस व्यक्ति से लड़ाई है जो गोरखपुर शहर के विकास में बाधक है। वह बताते हैं कि कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव मेरे समर्थन में प्रचार कर चुके हैं। यहां उनकी जीत तय है।
जानें, किस पार्टी को कितने मिले वोट
2012 में किस पार्टी को कितने वोट
भाजपा : 81148
कांग्रेस : 11171
सपा : 33694
बसपा : 23811
2014 के लोकसभा चुनाव में गोरखपुर संसदीय सीट की स्थिति
भाजपा : 5,39,127
सपा : 2,26,344
बसपा : 1,78,412
कॉंग्रेस : 45,719
नोट : लोकसभा चुनाव में गोरखपुर शहर में भाजपा को 1,33,892 वोट मिले थे। दूसरे नंबर सपा रही जिसे 31005 वोट मिले थे।