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Lucknow News: मुफ्त में मिलने वाली हरी धनिया भी इतराई
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लखनऊ। कभी सब्जियों की खरीदारी के साथ मुफ्त में मिल जाने वाली हरी धनिया इन दिनों नखरे दिखा रही है। थोक बाजार में यह 300 तो फुटकर बाजार में 400 रुपये प्रति किलो में बिक रही है। वहीं, सलाद में खाया जाने वाला प्याज, टमाटर और नींबू भी महंगा हो चला है।
इन दिनों बाहर से आ रहे टमाटर, प्याज, नींबू, धनिया के लिए ज्यादा जेब ढीली करनी पड़ रही है। सब्जी विक्रेता मुन्ना, छोटे ने बताया कि राजधानी के आस-पास बोआई न होने से इन दिनों बंगलूरू से हरी धनिया आ रही है। पिछले महीने इसके दाम 200-300 रुपये किलो थे, जो 400-500 रुपये हो गए हैं।
वहीं, कुछ दिन पहले 100 रुपये किलो में मिलने वाला नींबू 160 में हो गया है। टमाटर 30 रुपये से 40 से 50 रुपये किलो तक पहुंच गया है। प्याज पहले से ही 60 रुपये के करीब है।
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अपने यहां खेती न होने से महंगी है हरी धनिया : चंद्रगुप्त कृषि विश्वविद्यालय के प्रो. सत्येंद्र कुमार सिंह का कहना है कि अपने इलाके में हरी धनिया की खेती कम है। इसके अलावा यह महंगा सौदा है, जिसके लिए 20 डिग्री का तापमान चाहिए। इस कारण इसकी खेती ग्रीन हाउस में होती है। एसी लगाकर तापमान मेंटेन करना पड़ता है। धनिया की पैदावार भी कम होती है। लखनऊ व पड़ोसी जिलों का तापमान अक्तूबर से गिरना शुरू होता है। इसी समय साधारण तरीके से धनिया पैदा हो सकती है। सितंबर के आखिरी हफ्ते से बोआई शुरू हो जाएगी।
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इन दिनों बाहर से आ रहे टमाटर, प्याज, नींबू, धनिया के लिए ज्यादा जेब ढीली करनी पड़ रही है। सब्जी विक्रेता मुन्ना, छोटे ने बताया कि राजधानी के आस-पास बोआई न होने से इन दिनों बंगलूरू से हरी धनिया आ रही है। पिछले महीने इसके दाम 200-300 रुपये किलो थे, जो 400-500 रुपये हो गए हैं।
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वहीं, कुछ दिन पहले 100 रुपये किलो में मिलने वाला नींबू 160 में हो गया है। टमाटर 30 रुपये से 40 से 50 रुपये किलो तक पहुंच गया है। प्याज पहले से ही 60 रुपये के करीब है।
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अपने यहां खेती न होने से महंगी है हरी धनिया : चंद्रगुप्त कृषि विश्वविद्यालय के प्रो. सत्येंद्र कुमार सिंह का कहना है कि अपने इलाके में हरी धनिया की खेती कम है। इसके अलावा यह महंगा सौदा है, जिसके लिए 20 डिग्री का तापमान चाहिए। इस कारण इसकी खेती ग्रीन हाउस में होती है। एसी लगाकर तापमान मेंटेन करना पड़ता है। धनिया की पैदावार भी कम होती है। लखनऊ व पड़ोसी जिलों का तापमान अक्तूबर से गिरना शुरू होता है। इसी समय साधारण तरीके से धनिया पैदा हो सकती है। सितंबर के आखिरी हफ्ते से बोआई शुरू हो जाएगी।