यूपी में भी चुनाव लड़ेगा महागठबंधन, योजना तैयार
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प्रदेश में कांग्रेस, जनता दल यू, एनसीपी समेत कई छोटे दल मिलकर 2017 के विधानसभा चुनाव में राजनीतिक विकल्प पेश कर सकते हैं। ये दल महागठबंधन करके चुनाव मैदान में उतरने की तैयारी में हैं। कांग्रेस के रणनीतिकार प्रशांत किशोर (पीके) इसकी पटकथा तैयार कर चुके हैं।
पीके जहां नीतीश कुमार को 2019 में भाजपा विरोधी मोर्चे के अगुवा के तौर पर प्रोजेक्ट कर रहे हैं, वहीं 2017 में यूपी में सपा, बसपा और भाजपा के मुकाबले एक और राजनीतिक विकल्प जनता के सामने पेश करना चाहते हैं। इसकी धुरी कांग्रेस रहेगी। उसके इर्द-गिर्द दूसरे दलों की लामबंदी होगी। इनमें जदयू और एनसीपी समेत अन्य छोटे दल होंगे।
जदयू नेताओं ने कई छोटे दलों से बातचीत शुरू भी कर दी है। जदयू बिहार में महागठबंधन तोड़ने के कारण यूपी में सपा को अलग रखना चाहता है जबकि बसपा किसी दल से गठबंधन करना नहीं चाहती।
ऐसे में कांग्रेस व छोटे दलों को जोड़ने की रणनीति बनाई गई है। जद यू के प्रमुख महासचिव केसी त्यागी कह चुके हैं कि कांग्रेस के साथ जद यू और अन्य छोटे दलों का गठबंधन हो सकता है।
ये होगी रणनीति
कांग्रेस की अगुवाई में प्रदेश में जिस गठबंधन की भूमिका बनाई जा रही है, उसकी नजर अगड़ों-पिछड़ों के साथ ही मुस्लिम वोटों पर है। दरअसल, यूपी की राजनीति में जातियों की अहम भूमिका है। हर दल वोट बैंक को साधने पर ध्यान दे रहा है।
नीतीश कुमार की छवि पिछड़ों, दलितों, मुस्लिमों के हितैषी की है, लेकिन उन पर अगड़ों के विरोध का ठप्पा नहीं है। कांग्रेस का वोट बैंक भले ही गिर गया हो लेकिन किसी वर्ग विशेष में उसके खिलाफ रिएक्शन नहीं है।
वहीं, छोटे दलों के जरिये सीमित क्षेत्रों में प्रभाव रखने वाले जातीय समूहों पर नजर है। कोशिश है कि नीतीश की छवि के सहारे अन्य वर्गों के साथ ही कुर्मी बिरादरी को गठबंधन से जोड़ा जाए।
प्रियंका बनें चेहरा, दूसरे नेता दें बैकअप
गठबंधन के रणनीतिकार चाहते हैं कि विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस को यूपी में प्रियंका गांधी वढेरा की सक्रियता बढ़ानी बढ़ाए। अभी तक उनके दौरे रायबरेली और अमेठी तक सीमित हैं। प्रियंका प्रदेश में कांग्रेस का चेहरा बनें। उन्हें मुख्यमंत्री पद के दावेदार के रूप में पेश किया जाए। इससे ब्राह्मण और युवाओं समेत अन्य वर्ग में कांग्रेस के प्रति हमदर्दी का माहौल बन सकता है।
यूं ही नहीं हो रहे नीतीश और पवार के दौरे
जदयू अध्यक्ष नीतीश कुमार और एनसीपी मुखिया शरद पवार के प्रदेश में दौरे यूं ही दौरे नहीं हो रहे। उनकी मंशा यूपी में अपनी प्रभावी मौजूदगी दर्ज कराने की है।
नीतीश जहां 12 मई को वाराणसी के पिंडरा में प्रदेश स्तरीय कार्यकर्ता सम्मेलन को संबोधित करेंगे, वहीं 15 मई को राजधानी लखनऊ में भू, शराब व खनन माफिया के खिलाफ अभियान की शुरुआत करेंगे।
शरद पवार ने दो दिन पहले ही लखनऊ में कार्यकर्ता सम्मेलन को संबोधित किया था। उन्होंने अगस्ता मामले में न केवल सोनिया गांधी की तरफदारी की, वरन मोदी सरकार को निशाने पर भी लिया। वे नीतीश कुमार की तारीफ कर बातचीत के रास्ते खोल चुके हैं।