खुशखबरी: एकेटीयू में अब जरूरत के मुताबिक मिलेंगे ग्रेस मार्क्स
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डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय से संबद्ध कॉलेजों में पढ़ रहे छात्र-छात्राओं के लिए अब हर साल सीमित सीमा तक ही ग्रेस मार्क्स पाने की बाध्यता नहीं रहेगी। बल्कि वह पूरे कोर्स के दौरान मिलने वाले कुल ग्रेस मार्क्स को किसी एक साल में हासिल करके भी अपने पेपर क्लियर कर पाएंगे।
नौ जुलाई को होने वाली परीक्षा समिति की बैठक में यह अहम प्रस्ताव रखा जाने वाला है। इसे स्वीकृति मिलने से विवि के करीब 35 हजार छात्र-छात्राएं लाभान्वित होंगे।
इनमें हजारों छात्र-छात्राएं ऐसे हैं जिनकी डिग्री सिर्फ एक या दो पेपर में उत्तीर्ण न होने की वजह से रुकी हुई है। इनमें बहुत से छात्र-छात्राओं को तो 7-8 साल तक का समय बीत चुका है।
यह प्रस्ताव बीटेक, एमबीए, एमसीए सहित विभिन्न कोर्स के लिए लागू होगा। बीटेक में जहां प्रति वर्ष 10 ग्रेस अंक मिलने की व्यवस्था है वहीं एमबीए में 20 अंक। लेकिन नई व्यवस्था में एक साथ ही पूरे कोर्स के लिए 40-40 ग्रेस अंक मिल जाएंगे।
एकेटीयू की परीक्षा समिति में विवि के एग्जामिनेशन कंडक्शन मैनुअल को भी परखा जाएगा। परीक्षा विभाग द्वारा तैयार इस मैनुअल में छात्रों, शिक्षकों, स्टाफ व अन्य सभी संबंधित लोगों के लिए परीक्षा से जुड़े दिशा-निर्देश को लिखित रूप में एक हैंडबुक के रूप में तैयार किया गया है। इसके अनुसार परीक्षा सम्पन्न कराना पहले से अधिक सुविधाजनक रहेगा।
कोर्स के शुरू में ही आवंटित हो जाएंगे पूरे ग्रेस अंक
वर्तमान में यदि कोई एकेटीयू से बीटेक की पढ़ाई करता है तो उसे हर साल 10-10 अंक तक ग्रेस मार्क मिलने की व्यवस्था है। किसी भी साल में इससे अधिक अंक नहीं मिल सकते।
विवि के हजारों ऐसे छात्र हैं, जिन्हें किसी सेमेस्टर के किसी पेपर में उत्तीर्ण होने के लिए 10 से अधिक ग्रेस मार्क्स की आवश्यकता है, या वह एक ही साल में दो पेपर में ग्रेस अंक पाकर पास हो सकते हैं, लेकिन विवि चाहकर भी नहीं दे सकता।
नई व्यवस्था लागू होने के बाद छात्र को शुरू में ही 40 अंक ग्रेस के लिए आवंटित हो जाएंगे। वह चाहे तो इनका प्रयोग पहले ही सेमेस्टर में कर ले या आखिर तक किसी में भी।
अब यदि कोई छात्र किसी पेपर में 15 अंक पाता है लेकिन उसे उत्तीर्ण होने के लिए 30 अंक चाहिए तो उसे 15 अंक ग्रेस दिए जा सकेंगे। इतना ही नहीं यदि यह छात्र दो पेपर में 15-15 अंक पाता है तो दोनों में ही 15-15 ग्रेस अंक देकर उसे अगले वर्ष में प्रोन्नत किया जा सकता है।
एक साथ मिल जाएंगी सभी लाइफ लाइन
सूत्रों की मानें तो इस समय केवल कंप्यूटर साइंस से इंजीनियरिंग करने वाले ही 700 से अधिक ऐसे छात्र-छात्राएं हैं जिनकी एक-दो पेपर में बैक होने से डिग्री नहीं दी जा सकती।
इनमें कई तो ऐसे हैं जिनकी मैकेनिकल से जुड़े पेपर में बैक है, जबकि विशेषज्ञों की मानें तो उनके लिए मैकेनिकल के पेपर का फील्ड में काम भी नहीं, क्योंकि स्पेशलाइजेशन कंप्यूटर साइंस है।
ऐसे में यदि इन्हें पूरे 40 ग्रेस अंक एक साथ मिल जाएं तो विभिन्न पेपर में एडजस्ट किया जा सकता है। जिससे उनका रिजल्ट क्लियर हो जाएगा। विवि में बीटेक में उत्तीर्ण होने के लिए 100 में 30 अंक अनिवार्य है। इसमें यदि न्यूनतम 15 अंक हों तभी ग्रेस अंकों का भी लाभ दिया जाता है।
एक तरह से पहले छात्र को हर साल एक-एक कर पूरे कोर्स में चार लाइफ लाइन मिलती थीं, लेकिन अब उसे वह चारों लाइफ लाइन शुरू में मिल जाएंगी। जिनका वह कभी भी इस्तेमाल कर सकता है।
थ्योरी और प्रैक्टिकल को मिलाकर होगा मूल्यांकन
विवि में नए सत्र से चॉइस बेस्ड क्रेडिट सिस्टम लागू किया जा रहा है। इसमें छात्र को न्यूनतम 23 क्रेडिट मिलने पर दूसरे वर्ष में प्रोन्नती मिलेगी। पहले से विवि में पढ़ रहे छात्रों को भी नई व्यवस्था की तरह लाभ मिले इससे जुड़ा प्रस्ताव भी परीक्षा समिति की बैठक में रखा जाएगा।
वर्तमान में छात्रों को थ्योरी और प्रैक्टिकल दोनों में उत्तीर्ण होने के लिए अलग-अलग अंक हासिल करने पड़ते हैं। अमूमन छात्रों को प्रैक्टिकल में अधिक अंक मिलते हैं, लेकिन इनमें से बहुत से छात्र थ्योरी में फेल हो जाते हैं।
नए प्रस्ताव में छात्रों को थ्योरी और प्रैक्टिकल के अंक जोड़कर प्रोन्नत किया जाएगा। ऐसे में यदि कोई छात्र थ्योरी में कम अंक पाने से बैक पेपर आ रहा होगा तो संभव है कि प्रैक्टिकल के अंक जुड़ने के बाद वह न्यूनतम अंकों का मानक पूरा कर ले और दूसरी कक्षा में प्रोन्नत हो जाए।