मथुरा कांड से लिया सबक राज्यपाल ने मुख्यमंत्री अखिलेश को लिखा पत्र
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राज्यपाल राम नाईक ने राज्य सरकार से प्रदेश में अवैध कब्जों पर श्वेतपत्र जारी करने को कहा है। नाईक ने मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को भेजे पत्र में कहा है कि अनधिकृत व्यक्तियों व संगठनों द्वारा कब्जा किए गए पार्कों, मैदानों, चारागाहों, तालाबों तथा सार्वजनिक महत्व व उपयोग की भूमि व भवनों आदि संपत्तियों का क्षेत्रफल, उसका अनुमानित बाजार मूल्य, उन पर कब से अवैध कब्जा है तथा इससे राज्य सरकार, स्थानीय निकायों एवं विकास प्राधिकरणों आदि को हुए नुकसान के अनुमानित मूल्य के संबंध में जिलाधिकारियों, विकास प्राधिकरणों तथा स्थानीय निकायों से रिपोर्ट प्राप्त करके ‘श्वेतपत्र’ का प्रकाशन किया जाए।
अवैध कब्जेदारों को हटाकर सरकार विकास प्राधिकरणों एवं स्थानीय निकायों आदि के स्वामित्व वाली संपत्तियों को पुन: अपने कब्जे में ले जिससे मथुरा के जवाहरबाग जैसी दूसरी भयावह घटना फिर से घटित न हो।
मुख्यमंत्री को भेजे गए पत्र में राज्यपाल ने कहा है कि विभिन्न जिलों में राज्य सरकार, निकायों तथा विकास प्राधिकरणों आदि की भूमि व भवनों पर अनधिकृत व्यक्तियों ने लंबे समय से अवैध कब्जा किया हुआ है। उन्हें वहां से हटाने के लिए न्यायालयों द्वारा समय-समय पर आदेश भी दिए जाते रहे हैं, लेकिन कब्जेदारों को हटाया नहीं जा सका है।
जवाहरबाग मामले में हुई चूक का दिया हवाला
राज्य सरकार, निकायों तथा विकास प्राधिकरणों की संपत्तियों पर किया गया अवैध कब्जा उ.प्र. पार्कों खेलकूद के मैदानों एवं खुले स्थानों का (संरक्षण एवं नियमन) अधिनियम 1975, उ.प्र. व़ृक्ष संरक्षण अधिनियम 1976, उ.प्र. सार्वजनिक संपत्ति क्षति निवारण 1984 तथा उत्तर प्रदेश भू राजस्व संहिता 2006 आदि कानूनों एवं विभिन्न स्तर के न्यायालयों द्वारा समय-समय पर दिए गए निर्देशों के सर्वथा विपरीत है।
गौरतलब है कि मथुरा के जवाहरबाग में राज्य सरकार के स्वामित्व वाली संपत्ति पर एक निजी संगठन ने पिछले कुछ वर्षों से अनधिकृत रूप से न केवल कब्जा कर लिया था बल्कि वहां कई तरह की गैरकानूनी गतिविधियां भी संचालित की जा रही थीं।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अवैध कब्जेदारों को जवाहरबाग से हटाने का निर्देश भी दिया था, जिसका अनुपालन राज्य सरकार नहीं करा सकी।
हाईकोर्ट के समक्ष अवमानना याचिका दाखिल होने पर जब मथुरा प्रशासन ने अवैध कब्जेदारों को जवाहरबाग से हटाने का प्रयास किया तो न केवल दो पुलिस अधिकारियों की हत्या कर दी गई अपितु बड़ी संख्या में अन्य लोग भी हताहत हुए।