राज्यपाल बोले, गरीबों की शिक्षा के लिए दी जा रही सरकारी मदद नाकाफी
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राज्यपाल राम नाईक ने कहा कि गरीबों व पिछड़े लोगों को शिक्षा दिलाने के लिए सरकारों द्वारा मदद के तौर पर तमाम योजनाएं तो शुरू की गई हैं, लेकिन यह नाकाफी है। इसके लिए स्वंयसेवी संस्थाओं को भी आगे आना होगा।
उन्होंने कहा कि यदि बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के ‘पढ़ो-सिखो और आगे बढ़ो’ के नारा को सार्थक करना है तो समाज के सभी सक्षम लोगों को गरीब व कमजोर लोगों को शिक्षित बनाने के लिए काम की जरूरत है।
राज्यपाल रविवार को गोमती नगर स्थित सीएमएस स्कूल में आयोजित अंबेडकर ट्रस्ट ऑफ इंडिया के चौथे वार्षिक अधिवेशन को संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के तौर पर उन्होंने कहा कि डॉ. अंबेडकर को सिर्फ संविधान निर्माता के तौर पर ही नहीं, बल्कि उन्हें शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय काम करने के लिए भी जाना जाता है।
राज्यपाल ने कहा, वह तो हम सबके गुरू थे। बाबा साहेब अपने शुरूआती दौर में काफी दुश्वारियों के बीच खुद के बल पर शिक्षा ग्रहण की थी। उन्होंने समाज में व्याप्त छूआ-छूत को मिटाने के लिए शिक्षा को ही हथियार बनाया।
बाबा साहेब ने संदेश ही ‘पढो-सीखो और आगे बढ़ो’ का दिया
अंबेडकर ट्रस्ट द्वारा गरीब बच्चों को पढ़ाने के क्षेत्र में किए जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए राज्यपाल ने कहा, बाबा साहेब ने अपना पहला संदेश ही ‘पढो-सीखो और आगे बढ़ो’ का दिया था। इसलिए समाज के सभी वर्ग के लोगों को शिक्षा से वंचित लोगों के लिए काम करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि आजादी के बाद सरकारों ने गरीब व अशिक्षित बच्चों को स्कूल तक पहुंचाने की तमाम योजनाएं शुरू की हैं, लेकिन अभी भी यह नाकाफी है। इसलिए अंबेडकर ट्रस्ट की तरह अन्य संस्थाओं को भी इस क्षेत्र में आगे आना चाहिए।
समाज के वंचित लोगों को शिक्षा दिलाने पर बल देते हुए राज्यपाल ने कहा कि अभी भी समाज में बुहत से ऐसे बच्चे हैं, जो मेधावी होने के बाद भी आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने की वजह से शिक्षा नहीं ग्रहण कर पा रहे हैं।
इस मौके पर राज्यपाल ने बाबा साहेब द्वारा शिक्षा के साथ-साथ समाज के उत्थान के लिए किए गए कार्यों की भी चर्चा की। उन्होंने अपने भी कई संस्मरण भी सुनाए। अंबेडकर ट्रस्ट की सदस्यता लेने वाले 12 लोगों को राज्यपाल ने ट्रस्टीशिप का सर्टिफिकेट भी दिया। इससे पहले राज्यपाल ने दीप प्रज्जवलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।
संस्था के अध्यक्ष जे राम बौध ने ट्रस्ट के उद्देश्य व संचालित गतिविधियों के बारे में बताया। इस मौके पर लखनऊ विवि के प्रो. कालीचरन स्नेही ने भी अंबेडकर के विचारों पर प्रकाश डाला।
‘मैं सुझाव देने से परहेज नहीं करता’
ट्रस्ट के नए सदस्यों को अंगेजी में दिए गए सर्टिफिकेट को हिन्दी में लिखने और लेमिनेट कराकर देने की सुझाव देते हुए राज्यपाल ने कहा, मैं तो सुझाव देने में परहेज नहीं करता हूं इसलिए यह सुझाव दे दिया। इस प्ररिप्रेक्ष्य में राज्यपाल ने लखनऊ के स्पीड ब्रेकरों की भी चर्चा की।
कहा, एक ही स्थान पर कई स्पीड ब्रेकर बना दिए गए हैं। जबकि सिर्फ एक से भी काम चल जाता। कई बार जब मेरी गाड़ी भी हिचकोले खाई तो मैने इस बारे में डीएम और परिवहन आयुक्त को पत्र लिखा, तो उसमें सुधार किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि इसी तरह मैंने मेट्रो रेल परियोजना के निर्माण के लिए लगाए गए नुकीलेदार रेलिंग और एमवी क्लब कैंट में ड्रेस कोड केचलते सिया धर्मगुरू को प्रवेश नहीं दिए जाने पर भी सुझाव दिया था।
उन्होंने कहा, यह राज्यपाल का काम नहीं है, लेकिन मुझे लगा कि इसमें सुधार होना चाहिए तो मैंने सुझाव दिया।