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ऑफिस टाइम से समय निकालकर साहित्य रचने वालों को मिला सम्मान, राज्यपाल ने दिया इनाम

Mon, 12 Mar 2018 12:41 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Updated Mon, 12 Mar 2018 12:41 AM IST
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governor ram naik in rajya karmchari sahitya samman,
कार्यक्रम में मौजूद राज्यपाल रामनाईक। - फोटो : amar ujala

सरकारी कार्यों से समय निकाल कर साहित्य सृजन करना बहुत ही सराहनीय कार्य है। राज्यकर्मियों का साहित्य सृजन और सम्मान यूपी को छोड़कर कहीं और नहीं देखा। देश के अन्य प्रदेशों को भी इससे सीख लेनी चाहिये। यह विचार राज्यपाल रामनाईक ने राज्य कर्मचारी साहित्य संस्थान उत्तर प्रदेश की ओर से रविवार को हिंदी संस्थान में हुए पुरस्कार एवं सम्मान समारोह में व्यक्त किए। इस दौरान बतौर मुख्य अतिथि राज्यपाल और विशिष्ट अतिथि ग्राम्य विकास आयुक्त पार्थसारथी सेन शर्मा ने 20 कर्मचारियों को एक-एक लाख रुपये, प्रशस्ति पत्र, अंगवस्त्र व स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया।

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धनराशि बैंक अकाउंट में जाए तो अच्छा
राज्यपाल ने कहा, समारोह ने अपने 18 साल पूरे कर लिये, इसका मतलब है कि अब ये परिपक्व हो गया है। आज पुरस्कार की घोषणा होते ही शिकायत शुरू हो जाती है। इसलिए मैं भी कहता हूं कि मैंने अपने ऑफिस टाइम से बचे वक्त में एक पुस्तक लिखी है, इस लिहाज से मुझे पुरस्कार क्यों नही दिया गया? इस पर यशपाल सभागार में खूब ठहाके लगे।
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उन्होंने महाराष्ट्र सरकार के एक अच्छे कदम का उदाहरण देकर सुझाव दिया कि सम्मान की राशि सीधे संबंधित के अकाउंट में चली जाए तो अच्छा रहे। उन्होंने चिंता जताई कि आज कल लोगों में पढ़ने की आदत कम हो गई। ऐसे में साहित्यकारों पर दबाव बढ़ जाता है कि वे ऐसा साहित्य सृजन करें, जिसे लोग पढ़ने को मजबूर हो जाएं। ऐसी किताब लिखें कि हाथों में आने के बाद लोग पढ़कर ही छोड़ें।
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इन्हें मिला सम्मान
हिंदी पुरस्कार - सेवानिवृत्त राज्यकर्मी
प्रताप नारायण मिश्र - पूर्व डीजपी महेश चंद्र द्विवेदी, लखनऊ।
शिव सिंह सरोज -रिटा. आईएएस जयशंकर मिश्र, लखनऊ।
बालकृष्ण भट्ट - वरिष्ठ अधिकारी गोपाल नारायण श्रीवास्तव, लखनऊ।
कवयित्री महादेवी वर्मा - रिटा. पुलिस अधिकारी नंदल हितैषी, इलाहाबाद।

उर्दू सेवानिवृत्त राज्यकर्मी
मीर तकी मीर - वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी शाहनवाज कुरैशी, लखनऊ।

इन्हें दिया गया सम्मान

governor ram naik in rajya karmchari sahitya samman,
राज्यपाल रामनाईक - फोटो : amar ujala

राज्यकर्मी हिंदी श्रेणी
पंडित महावीर प्रसाद द्विवेदी- डॉ. रश्मिशील, वरिष्ठ सहायक राज्य संपत्ति विभाग लखनऊ।
भगवती चरण वर्मा - मूसा खान अशांत बाराबंकवी, वरिष्ठ सहायक डीडीओ बाराबंकी।
सुमित्रानंदन पंत - डॉ. पीवी जगनमोहन, कमिश्नर बरेली।
अमृत लाल नागर - बलदेव त्रिपाठी, जिला समाज कल्याण अधिकारी निदेशालय लखनऊ।
डॉ. विद्या निवास मिश्र - राम नगीना मौर्य, संयुक्त सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग लखनऊ।

श्यामसुंदर दास - डॉ. शोभा दीक्षित भावना, निजी सचिव ग्रेड-2 शासन।
जयशंकर प्रसाद - डॉ. उमेश चंद्र वर्मा आदित्य सचिवालय।
शिव मंगल सिंह सुमन - अनुराग मिश्र ‘गैर’, सहायक आबकारी आयुक्त बस्ती।
गया प्रसाद शुक्ल सनेही - वीर पाल सिंह निश्छल, हेड कांस्टेबल अभिसूचना विभाग लखनऊ।
डॉ. हरिवंश राय बच्चन - गीता कैथल, प्रवर वर्ग सहायक, योजना भवन लखनऊ।
रामधारी सिंह दिनकर - राकेश ऋषभ, क्षेत्रीय खाद्य अधिकारी हमीरपुर।

राज्यकर्मी उर्दू
मिर्जा असदउल्ला खां गालिब - मो. फारुख, उर्दू अनुवादक सहकारिता विभाग उप्र।
फिराक गोरखपुरी - डॉ. बिजारत नबी, नाजिर सदर, बिजनौर कलेक्ट्रेट
अमीर खुसरो - मो. मोईन अंजुम सिद्दीकी, वैयक्तिक सहायक ग्रेड-2 उपनिदेशक, विद्युत सुरक्षा उप्र शासन लखनऊ रीजन।
अकबर इलाहाबादी - सगीर अहमद सगीर नूरी, उर्दू अनुवादक, बाराबंकी।

21 हजार रुपये की राशि वाले पुरस्कार
ओम प्रकाश चतुर्वेदी पराग गीत - कौशल कुमार, मेरठ।

11 हजार रुपये की राशि वाले पुरस्कार
रमन लाल अग्रवाल -डॉ. निरंजन सहाय, प्रो. काशी विद्यापीठ वाराणसी।

साहित्य गौरव से सम्मानित
संस्थान की साहित्यिक त्रैमासिक पत्रिका अपरिहार्य में योगदान देने वाले सुरेश चंद्र विश्वकर्मा, राज स्मृति, योगेंद्र शर्मा, प्रीति चौधरी, राम स्वरूप, शुकदेव पांडेय, डॉ. रविकांत, मुकेश सिंह, हौसला प्रसाद त्रिपाठी, रेनू हुसैन को सम्मानित किया गया। वहीं, गिरीश मिश्र, सोनरुपा, रोली शंकर, प्रमोद द्विवेदी, अलका प्रमोद, रूपा पांडेय, सिद्धेश्वर शुक्ला, कुसुम वर्मा, चंद्र देव दीक्षित, अनीता श्रीवास्तव, अवधेश गुप्त, अनिल कुमार वर्मा, विजय कर्ण, अलंकार रस्तोगी, सतीश कुमार सिंह, संध्या सिंह, भावना मौर्य, आयशा अयूब को संस्थान की ओर से वर्ष 2017-18 का साहित्य गौरव सम्मान दिया गया। सभी को 2100 रुपये नगद, अंगवस्त्र, प्रशस्ति पत्र, स्मृति चिह्न दिए गए।

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