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HC का हुक्म, छिनेगी 288 दागियों की सुरक्षा

Tue, 04 Mar 2014 12:43 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Tue, 04 Mar 2014 12:43 PM IST
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government to withdraw security of 288 tainted VIP's says court

हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने राज्य सरकार को सूबे के आपराधिक पृष्ठभूमि वाले 288 लोगों को मिली सरकारी सुरक्षा 10 दिन में हटाए जाने के निर्देश दिए हैं।

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इनमें कई पूर्व मंत्री, पूर्व सांसद, पूर्व विधायक भी शामिल हैं। इनके खिलाफ आपराधिक मामले होने के बावजूद सुरक्षा मुहैया कराई गई है।

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जस्टिस इम्तियाज मुर्तजा एवं जस्टिस देवेन्द्र कुमार उपाध्याय की खंडपीठ ने सोमवार को यह आदेश स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता नूतन ठाकुर की जनहित याचिका पर दिया है।
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इसमें पूर्व सांसदों, पूर्व विधायकों समेत जनप्रतिनिधियों व राजनेताओं को सरकारी सुरक्षा दिए जाने के राज्य सरकार के निर्णय को चुनौती दी गई है। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 7 अप्रैल को निर्धारित की है।


कोर्ट ने कहा है इनमें से जरूरी लोगों को फिर से सुरक्षा दी जा सकती है। कोर्ट ने सुरक्षा के खर्च की रकम संबंधित लोगों से वसूल किए जाने के पिछले आदेशों के पालन की रिपोर्ट भी सरकार से तलब की है।

पहले कोर्ट ने इस मामले में राज्य सरकार से जवाब-तलब किया था। याची नूतन ठाकुर के मुताबिक सूबे के गृह सचिव कमल सक्सेना के 429 पन्नों के दायर हलफनामे में 288 ऐसे लोगों की सूची पेश की, जिनका आपराधिक इतिहास होने के बावजूद सुरक्षा दी गई थी।



साथ ही 562 ऐसे लोगों की सूची भी हलफनामे में लगाई गई, जिन्हें शस्त्र लाइसेंस होने के बावजूद सुरक्षा प्रदान की गई।

याची के मुताबिक इन 288 लोगों में पूर्व मंत्री राम अचल राजभर, राकेशधर त्रिपाठी, दद्दू प्रसाद, नन्द गोपाल गुप्ता, पूर्व सांसद हरीश नागपाल, डॉ. पी यादव, पंकज चौधरी समेत कई पूर्व विधायक और राजनेताओं के नाम शामिल हैं।


खंडपीठ ने कहा है कि इन सबकी सुरक्षा वापस लेकर आवश्यकता का आकलन करने के बाद अलग-अलग स्पष्ट लिखित आदेश के जरिए इनमें से उन्हीं को सुरक्षा दी जाए जिन्हें इसकी जरूरत है।

कोर्ट ने राज्य सरकार को कहा है कि सरकार के हलफनामे से यह स्पष्ट नहीं हो रहा है कि सुरक्षा समिति की संस्तुति के बगैर दी गई सुरक्षा में कितने लोगों की सुरक्षा हटाई गई है।

कोर्ट ने इस संबंध में सरकार को स्थिति स्पष्ट करने केनिर्देश भी दिए है। साथ ही शस्त्र लाइसेंस धारकों को सुरक्षा न दिए जाने की अपेक्षा भी की है।

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