{"_id":"6a7a3c497b3070440109ac55","slug":"government-jubilee-inter-college-a-139-year-legacy-now-with-a-new-identity-as-a-smart-school-lucknow-news-c-13-lko1070-1869841-2026-08-11","type":"story","status":"publish","title_hn":"राजकीय जुबिली इंटर कॉलेज : 139 साल की विरासत, अब स्मार्ट स्कूल की नई पहचान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
राजकीय जुबिली इंटर कॉलेज : 139 साल की विरासत, अब स्मार्ट स्कूल की नई पहचान
विज्ञापन
राजकीय जुबिली इंटर कॉलेज
लखनऊ। 139 साल की शैक्षिक विरासत को संजोए राजधानी का राजकीय जुबिली इंटर कॉलेज अब आधुनिकता की नई इबारत लिखने की तैयारी में है। कभी ब्रिटेन की महारानी विक्टोरिया के शासनकाल के स्वर्ण जयंती वर्ष की स्मृति में स्थापित हुआ यह ऐतिहासिक विद्यालय अब स्मार्ट सुविधाओं से लैस होगा। कॉलेज के कायाकल्प की कवायद शुरू हो गई है। सोमवार को पीडब्ल्यूडी और शिक्षा विभाग की संयुक्त टीम ने कॉलेज का निरीक्षण कर कक्षाओं, प्रयोगशालाओं और अन्य बुनियादी सुविधाओं की मौजूदा स्थिति का आकलन किया।
कायाकल्प के तहत कक्षाओं को आधुनिक शिक्षण उपकरणों से सुसज्जित करने के साथ प्रयोगशालाओं को भी उन्नत किया जाएगा। कॉलेज के समग्र स्वरूप को बेहतर बनाकर विद्यार्थियों के लिए प्रेरणादायक और प्रभावी सीखने का माहौल तैयार करने की योजना है। अधिकारियों के अनुसार परियोजना का विस्तृत खाका तैयार किया गया है। इसके साथ ही टाटा की ड्रीम लैब का काम भी शुरू हो गया है।
कॉलेज में वर्तमान में विज्ञान, गणित, कॉमर्स, इतिहास, भूगोल, अर्थशास्त्र और कंप्यूटर की पढ़ाई होती है। यहां करीब 900 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं, जबकि प्रधानाचार्य सहित 47 शिक्षक हैं। नए सत्र 2027-28 से ऑनलाइन प्रवेश की सुविधा भी शुरू होगी। बेहतर मेरिट वाले विद्यार्थियों को स्कॉलरशिप की सुविधा देने की भी योजना है।
विज्ञापन
50 कंप्यूटरों की लैब में दिखेगा तकनीक का सफर
कॉलेज में 50 कंप्यूटरों की आधुनिक प्रयोगशाला स्थापित की जाएगी। इसमें पहली पीढ़ी से लेकर आज तक के कंप्यूटर शामिल होंगे। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को कंप्यूटर के विकास, उनके आपसी जुड़ाव और भौतिक उपकरणों की जानकारी देना है। कंप्यूटर से जुड़ा अतिरिक्त पाठ्यक्रम विद्यार्थियों के लिए निशुल्क होगा।
यह पहल ‘कबाड़ से जुगाड़’ की अवधारणा पर आधारित होगी। पुराने और नए कंप्यूटरों के जरिए विद्यार्थी कंप्यूटर के आंतरिक घटकों और उनकी कार्यप्रणाली को करीब से समझ सकेंगे। इसमें हार्डवेयर विषय को भी शामिल किया गया है।
मुंशी नवल किशोर की पहल से शुरू हुई थी कहानी
राजकीय जुबिली इंटर कॉलेज का इतिहास भी इसकी खास पहचान है। इतिहास के मुताबिक नवल किशोर प्रेस के संस्थापक मुंशी नवल किशोर की पहल पर वर्ष 1885 में अवध के तत्कालीन स्कूल निरीक्षक जेसी नेसफील्ड को लखनऊ में एक उत्कृष्ट विद्यालय खोलने का प्रस्ताव भेजा गया था। 24 मार्च 1887 को प्रस्ताव स्वीकार करते हुए इसकी स्थापना ‘जुबिली हाई स्कूल’ के रूप में हुई।
वर्ष 1887 में ब्रिटेन की महारानी विक्टोरिया के शासनकाल का स्वर्ण जयंती वर्ष मनाया जा रहा था। इसी के उपलक्ष्य में विद्यालय के नाम के साथ ‘जुबिली’ शब्द जोड़ा गया था। अब 139 साल बाद इसी ऐतिहासिक संस्थान को आधुनिक सुविधाओं से नई पहचान देने की तैयारी है।
परेड ग्राउंड से बैंड तक बदलेगा माहौल
कॉलेज को राजधानी के पहले स्मार्ट राजकीय कॉलेज के रूप में तैयार करने की दिशा में भी काम किया जा रहा है। परेड ग्राउंड में बदलाव किया जा रहा है। विद्यार्थियों को बैंड की सुविधा भी दी जाएगी। सप्ताह में एक दिन बैंड के साथ परेड का परीक्षण शुरू होगा। वर्तमान में छात्रों की एक टुकड़ी बैंड के लिए तैयार है।
कोट
“इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य राजकीय जुबिली इंटर कॉलेज को एक आदर्श शिक्षण संस्थान के रूप में विकसित करना है। आधुनिक सुविधाओं से युक्त होने पर यह कॉलेज छात्रों को बेहतर शिक्षा प्रदान कर सकेगा।”
देवेंद्र पांडेय, जिला विद्यालय निरीक्षक
कोट
“नई शिक्षा नीति के तहत कॉलेज में विद्यार्थियों की सुविधा के लिए हर बिंदु पर काम चल रहा है। विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले, इसका खाका तैयार है।”
सुमित कुमार श्रीवास्तव, प्रधानाचार्य
विज्ञापन
कायाकल्प के तहत कक्षाओं को आधुनिक शिक्षण उपकरणों से सुसज्जित करने के साथ प्रयोगशालाओं को भी उन्नत किया जाएगा। कॉलेज के समग्र स्वरूप को बेहतर बनाकर विद्यार्थियों के लिए प्रेरणादायक और प्रभावी सीखने का माहौल तैयार करने की योजना है। अधिकारियों के अनुसार परियोजना का विस्तृत खाका तैयार किया गया है। इसके साथ ही टाटा की ड्रीम लैब का काम भी शुरू हो गया है।
विज्ञापन
कॉलेज में वर्तमान में विज्ञान, गणित, कॉमर्स, इतिहास, भूगोल, अर्थशास्त्र और कंप्यूटर की पढ़ाई होती है। यहां करीब 900 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं, जबकि प्रधानाचार्य सहित 47 शिक्षक हैं। नए सत्र 2027-28 से ऑनलाइन प्रवेश की सुविधा भी शुरू होगी। बेहतर मेरिट वाले विद्यार्थियों को स्कॉलरशिप की सुविधा देने की भी योजना है।
विज्ञापन
50 कंप्यूटरों की लैब में दिखेगा तकनीक का सफर
कॉलेज में 50 कंप्यूटरों की आधुनिक प्रयोगशाला स्थापित की जाएगी। इसमें पहली पीढ़ी से लेकर आज तक के कंप्यूटर शामिल होंगे। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को कंप्यूटर के विकास, उनके आपसी जुड़ाव और भौतिक उपकरणों की जानकारी देना है। कंप्यूटर से जुड़ा अतिरिक्त पाठ्यक्रम विद्यार्थियों के लिए निशुल्क होगा।
यह पहल ‘कबाड़ से जुगाड़’ की अवधारणा पर आधारित होगी। पुराने और नए कंप्यूटरों के जरिए विद्यार्थी कंप्यूटर के आंतरिक घटकों और उनकी कार्यप्रणाली को करीब से समझ सकेंगे। इसमें हार्डवेयर विषय को भी शामिल किया गया है।
मुंशी नवल किशोर की पहल से शुरू हुई थी कहानी
राजकीय जुबिली इंटर कॉलेज का इतिहास भी इसकी खास पहचान है। इतिहास के मुताबिक नवल किशोर प्रेस के संस्थापक मुंशी नवल किशोर की पहल पर वर्ष 1885 में अवध के तत्कालीन स्कूल निरीक्षक जेसी नेसफील्ड को लखनऊ में एक उत्कृष्ट विद्यालय खोलने का प्रस्ताव भेजा गया था। 24 मार्च 1887 को प्रस्ताव स्वीकार करते हुए इसकी स्थापना ‘जुबिली हाई स्कूल’ के रूप में हुई।
वर्ष 1887 में ब्रिटेन की महारानी विक्टोरिया के शासनकाल का स्वर्ण जयंती वर्ष मनाया जा रहा था। इसी के उपलक्ष्य में विद्यालय के नाम के साथ ‘जुबिली’ शब्द जोड़ा गया था। अब 139 साल बाद इसी ऐतिहासिक संस्थान को आधुनिक सुविधाओं से नई पहचान देने की तैयारी है।
परेड ग्राउंड से बैंड तक बदलेगा माहौल
कॉलेज को राजधानी के पहले स्मार्ट राजकीय कॉलेज के रूप में तैयार करने की दिशा में भी काम किया जा रहा है। परेड ग्राउंड में बदलाव किया जा रहा है। विद्यार्थियों को बैंड की सुविधा भी दी जाएगी। सप्ताह में एक दिन बैंड के साथ परेड का परीक्षण शुरू होगा। वर्तमान में छात्रों की एक टुकड़ी बैंड के लिए तैयार है।
कोट
“इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य राजकीय जुबिली इंटर कॉलेज को एक आदर्श शिक्षण संस्थान के रूप में विकसित करना है। आधुनिक सुविधाओं से युक्त होने पर यह कॉलेज छात्रों को बेहतर शिक्षा प्रदान कर सकेगा।”
देवेंद्र पांडेय, जिला विद्यालय निरीक्षक
कोट
“नई शिक्षा नीति के तहत कॉलेज में विद्यार्थियों की सुविधा के लिए हर बिंदु पर काम चल रहा है। विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले, इसका खाका तैयार है।”
सुमित कुमार श्रीवास्तव, प्रधानाचार्य