नाई समाज के लिए केशकला बोर्ड बनाने की तैयारी में सरकार, पिछड़े समाज को जोड़ने को चला दांव
प्रजापति समाज के लिए माटीकला बोर्ड का गठन करने के बाद योगी सरकार अब नाई समाज के लिए केशकला बोर्ड के गठन की तैयारी में है। शासन स्तर पर केशकला बोर्ड का खाका तैयार करने की कवायद शुरू हो गई है। राजस्थान की तर्ज पर प्रदेश में बनने वाले के शकला बोर्ड के जरिये नाई समाज के लोगों को कौशल विकास के कार्यक्रमों से जोड़ने की योजना है।
जल्द ही इससे संबंधित प्रस्ताव कैबिनेट की बैठक में रखा जा सकता है। राज्य सरकार के इस कदम को अति पिछड़ी जातियों में शुमार नाई समाज को भाजपा के पाले में खड़ा करने की मुहिम का हिस्सा माना जा रहा है।
2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव में विपक्ष की चुनौती को ध्वस्त करने के लिए भाजपा ओबीसी मतों को साधने की रणनीति पर काम कर रही है। मोदी सरकार ने जहां ओबीसी कमीशन को संवैधानिक दर्जा देकर बड़ा दांव चला है वहीं प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार भी ओबीसी की अलग-अलग जातियों का समर्थन हासिल करने के लिए उन्हें सरकार में प्रतिनिधित्व और योजनाओं से जोड़ने की मुहिम में जुटी है।
माटीकला बोर्ड का गठन करके प्रजापति समाज का हिमायती होने का संदेश देने के बाद अब योगी सरकार नाई समाज को रिझाने की कोशिश में जुटी है। भरोसेमंद सूत्रों का कहना है कि राज्य सरकार ने सैद्धांतिक तौर पर राजस्थान की तर्ज पर यूपी में केशकला बोर्ड का गठन करने का फैसला कर लिया है। सरकार की मंशा के मुताबिक शासन स्तर पर बोर्ड का प्रारूप तैयार कराया जा रहा है। इसके लिए राजस्थान में गठित किए गए बोर्ड के बार में विस्तृत जानकारी मंगवाई गई है।
सूत्रों का कहना है कि केशकला बोर्ड के जरिये जहां कौशल विकास के कार्यक्रमों नाई समुदाय के लोगों को हिस्सेदारी दिलाई जाएगी वहीं बोर्ड समाज के विकास की योजनाओं प्रारूप भी तैयार करेगा। साथ ही सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग की योजनाओं में समाज के लोगों को तरजीह दिए जाने पर भी नजर रखेगा।
शासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि केशकला बोर्ड के गठन के संबंध में प्रस्ताव तैयार कराया जा रहा है। जल्द ही इसे कैबिनेट के समक्ष रखा जा सकता है।
कर्पूरी ठाकुर के नाम का भी सहारा
नाई समाज को अपने पाले में लाने के लिए भाजपा ओबीसी के मसीहा माने जाने वाले बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री कर्पूरी ठाकुर के नाम का भी सहारा ले रही है। अगस्त-सितंबर में भाजपा ने लखनऊ में अलग-अलग जातियों की समाजिक प्रतिनिधि बैठक करके पार्टी के पक्ष में ओबीसी की गोलबंदी का अभियान भी चलाया।
नाई समाज की बैठक में उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने एलान भी किया कि प्रदेश के हर जिले में कम से कम एक सड़क का नाम कर्पूरी ठाकुर के नाम पर रखा जाएगा। गौरतलब है कि कर्पूरी ठाकु र नाई समाज के थे और उन्हें बिहार में सामाजिक न्याय के सबसे बड़े मसीहा के तौर पर जाना जाता है। लोकसभा चुनाव में सपा-बसपा के महागठबंधन को लेकर भाजपा सशंकित है।
महागठबंधन को लेकर भाजपा नेता खासे चौकन्ने हैं क्योंकि उन्हें इसका अहसास है कि सिर्फ सवर्णों के सहारे सत्ता में वापसी संभव नहीं है। ऐसे में भाजपा कर्पूरी ठाकुर जैसे उन तमाम नेताओं के नाम को भुनाने में जुटी है, जिन्हें सपा और बसपा ने अपने शासनकाल में ज्यादा तवज्जो नहीं दी गई।