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मेट्रो की राह में सरकारी विभागों की अड़ंगेबाजी
ऋषि मिश्र/अमर उजाला, लखनऊ
Updated Sat, 15 Nov 2014 10:02 AM IST
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प्रदेश सरकार जिस परियोजना को अपनी सबसे बड़ी उपलब्धि के तौर पर प्रचारित कर रही है, वहीं सरकार एजेंसियां राह का कांटा बनती जा रही हैं। कभी फंड देने में आनाकानी तो कभी दफ्तर खाली करने में हीलाहवाली जारी है।
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मेट्रो प्रोजेक्ट को लेकर होने वाली बैठकों में ही कर्मचारियों के भेज काम चलाया जा रहा है। लखनऊ मेट्रो रेल कॉरपोरेशन के अधिकारी जो नियम बना रहे हैं।
उनको लागू कराने में नगर निगम और यातायात पुलिस का पूरा सहयोग नहीं मिल पा रहा है। ये हाल तो राज्य सरकार के विभागों का है।
दूसरी ओर, रेलवे भी परियोजना के शुरू होने के बावजूद मवैया पुल के पास निर्माण के लिए एनओसी नहीं दे रहा है। जबकि, पब्लिक इन्वेस्टमेंट बोर्ड की हरी झंडी अब तक परियोजना को नहीं मिल सकी है।
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ऐसे में राजधानी की लाइफलाइन के तौर विकसित किए जाने वाले प्रोजेक्ट 2016 दिसंबर तक पूरा होने पर सवाल उठने लगे हैं। उत्तर प्रदेश औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीएसआईडीसी) को इस परियोजना के लिए 100 करोड़ रुपये देने हैं।
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अब यूपीएसआईडीसी ये रकम देने से आनाकानी कर रहा है। एलएमआरसी के अधिकारी मान रहे हैं कि नियमों का बहाना बना कर अधिकारी धन देने से मना करने लगे हैं।
कहा जा रहा है कि प्राधिकरण की नियमावली में इस तरह से रुपया देने का कोई प्रावधान नहीं है। हालांकि आवास विकास परिषद और एलडीए लगातार अपने हिस्से का धन मेट्रो के लिए दे रहे हैं।
मुख्य सचिव आलोक रंजन का आदेश होने के बावजूद ग्रामीण आजीविका मिशन विभाग एलएमआरसी के लिए दफ्तर खाली करने में आनाकानी कर रहा है।
डॉ. भीमराव अंबेडकर सामाजिक परिवर्तन स्थल के सामने प्रशासनिक भवन में पिछले करीब एक साल से मिशन का दफ्तर है।खाली न करना पड़े, इसलिए मिशन की ओर से बिना एग्रीमेंट ही 11 लाख का चेक भेज दिया गया।
चेक अस्वीकार किए जाने के बावजूद मिशन अब तक ऑफिस खाली नहीं कर रहा है। वहीं, यातायात पुलिस की ओर से मेट्रो की निर्माण साइट के आसपास पर्याप्त यातायात पुलिस तैनात नहीं की गई है।
इसके अलावा नो स्टॉपिंग और नो पार्किंग जोन होने के बावजूद नगर निगम का वाहन उठाने वाला क्रेन भी यहां नहीं लगाया गया है। ऐसे में लखनऊ-कानपुर हाईवे पर जाम की स्थिति पैदा हो रही है।
मगर एलएंडटी के मार्शल के अतिरिक्त यातायात संभालने में कोई मदद एलएमआरसी को नहीं मिल रही है। इससे पहले ट्रैफिक मैनेजमेंट प्लान को लेकर हुई बैठकों में सब इंस्पेक्टर रैंक के कार्मिकों भी भेजा जा चुका है।
राज्य सरकार के अलावा केंद्रीय एजेंसियों से भी मेट्रो रेल परियोजना कोई खास मदद नहीं मिल पा रही है। मवैया पुल से निर्माण के लिए एलएमआरसी को रेलवे की एनओसी जरूरी है।
अलाइनमेंट में खामियां और ध्वस्त किए जाने वाले निर्माणों को पहले बनाने की शर्त रख कर फिलहाल रेलवे ने एनओसी देने से भी इंकार कर दिया है।
एक ओर तो अहमदाबाद मेट्रो रेल परियोजना है, जिसका प्रस्ताव केंद्र सरकार को बाद में मिला था, उसको हरी झंडी पब्लिक इन्वेस्टमेंट बोर्ड (पीआईबी) से लेकर यूनियन कैबिनेट तक से मिल चुकी है।
अब तक लखनऊ मेट्रो को पीआईबी से स्वीकृति ही नहीं मिली है। केवल केंद्र सरकार की सैद्धांतिक सहमति और 100 करोड़ रुपये का बजट भर ही स्वीकृत किया गया है। ऐसे में विदेशी ऋण से लेकर कई अन्य महत्वपूर्ण प्रकरणों के फंसने की आशंका हो गई है।