खुशखबरी: प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों की आधी सीटों पर सरकारी फीस पर पढ़ाई
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सरकारी मेडिकल कॉलेजों की तरह अब प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों की आधी सीटों पर सरकारी फीस में पढ़ाई होगी। इसके लिए युवाओं को मात्र 36 हजार रुपये सालाना फीस देनी होगी।
प्रदेश सरकार ने यह महत्वपूर्ण फैसला शुक्रवार को कैबिनेट बाई सर्कुलेशन से लिया। शनिवार से इन सीटों में दाखिले के लिए काउंसलिंग भी शुरू हो जाएगी। प्रदेश सरकार ने निजी मेडिकल कॉलेजों की मनमानी फीस पर लगाम कस दी है।
सूबे में पहली बार एमबीबीएस व बीडीएस की आधी सीटें सरकारी फीस से भरने का फैसला लिया गया है। इनमें दाखिला नीट के जरिए कंबाइंड काउंसलिंग से लिया जाएगा। सूबे में प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस व बीडीएस की कुल 5400 सीटें हैं।
इसमें 2700 सीटें सरकारी फीस से भरी जाएंगी। प्रमुख सचिव चिकित्सा शिक्षा अनूप चन्द्र पांडेय ने बताया कि निजी मेडिकल कॉलेजों की भी काउंसलिंग सरकारी मेडिकल कॉलेजों के साथ होगी।
मेरिट के हिसाब से होगा दाखिला
मेरिट के अनुसार मेधावियों को इसमें दाखिला दिया जाएगा। छात्र अपनी इच्छा के अनुसार सरकारी या फिर निजी मेडिकल कॉलेज चुन सकते हैं। एमबीबीएस व बीडीएस दोनों की ही सरकारी मेडिकल कॉलेजों में 36000 हजार रुपये सालाना फीस ली जा रही है।
इसलिए निजी मेडिकल कॉलेजों की भी आधी सीट इसी फीस पर भरने का निर्णय लिया गया है। सरकार के इस फैसले से गरीब मेधावी छात्रों को काफी फायदा मिलेगा।
इस फैसले से सरकारी मेडिकल कॉलेजों की 1860 सीटों के साथ ही 2700 सीटें निजी मेडिकल कॉलेजों की और मिल गई हैं। पहली बार 4560 एमबीबीएस व बीडीएस सीटों पर सरकारी फीस में दाखिला लिया जाएगा।
प्रमुख सचिव ने बताया कि निजी मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस की बची हुई आधी सीटों की फीस 18 से 20 लाख रुपये सालाना तय की गई है। सरकार के इस फैसले से निजी मेडिकल कॉलेजों को कोई नुकसान नहीं होगा। क्योंकि अभी तक वे सभी सीटों पर आठ से 10 लाख रुपये सालाना फीस वसूलते थे। अब आधी सीटों पर सरकारी फीस लागू कर दी गई हैं जबकि आधी सीटों पर फीस 18 से 20 लाख रुपये कर दी गई है।
निजी मेडिकल कॉलेजों में बीडीएस की आधी सीटें 36 हजार रुपये सालाना में भरने के बाद बची हुई आधी सीटों पर चार से पांच लाख रुपये सालाना की फीस वसूली जाएगी। प्रदेश सरकार ने सभी निजी डेंटल कॉलेजों की भी फीस तय कर दी है। इन सभी में दाखिले सरकारी काउंसलिंग के जरिए ही होंगे।