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Gonda News : डीएम ने सीएमएस से मांगी रिपोर्ट, पुत्र की गोद में पिता की हो गई थी मौत
Thu, 25 Aug 2022 07:18 PM IST
पंकज श्रीवास्तव
संवाद न्यूज एजेंसी, अमर उजाला, गोंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, अमर उजाला, गोंडा
Published by: पंकज श्रीवास्तव
Updated Thu, 25 Aug 2022 07:18 PM IST
सार
सोहन लाल अपने बुजुर्ग पिता राम उदित को सांस लेने की समस्या होने पर जिला अस्पताल आए थे। सोहन का कहना है कि भीड़ होने से उन्हें बाहर बैठा दिया गया। कुछ देर बात पिता की हालत और बिगड़ गई, सिर लटक गया और शरीर में हरकत बंद हो गई।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : Social Media
विस्तार
गोंडा में मोतीगंज क्षेत्र निवासी सांस से परेशान मरीज की जिला अस्पताल में इमरजेंसी में इलाज के दौरान हुई मौत मामला तूल पकड़ रहा है। डीएम ने सख्त रुख अपनाते हुए सीएमएस से रिपोर्ट मांगी है। सीएमएस डॉ. इंदु बाला ने बताया कि जांच शुरू कर दी गई है। इमरजेंसी में ड्यूटी पर रहे चिकित्सकों के साथ अन्य स्टाफ से स्पष्टीकरण मांगा गया है। करीब आधा दर्जन लोग जांच की जद में आ गए हैं।
बीते बुधवार को मोतीगंज के भिटौरा गांव निवासी सोहन लाल अपने बुजुर्ग पिता राम उदित को सांस लेने की समस्या होने पर जिला अस्पताल आए थे। वहां इमरजेंसी में गए और पिता के इलाज के लिए कहा। सोहन का कहना है कि भीड़ होने से उन्हें बाहर बैठा दिया गया। पिता भी बाहर बैठे रहे और इलाज के इंतजार में आधे घंटे तक बैठे रहे।
कुछ देर बात पिता की हालत और बिगड़ गई, सिर लटक गया और शरीर में हरकत बंद हो गई। उन्होंने फिर देखने को कहा। इस पर उनके पिता को अंदर बुलाया गया। जहां ऑक्सीजन लगाकर थोड़ी देर बाद कहा गया कि मौत हो गई है। शव ले जाने को कह दिया, लेकिन कोई स्ट्रेचर नहीं मिल सका। पिता को गोद में लेकर बाहर निकला तो कोई शव वाहन नहीं मिला। काफी देर तक गोदी में पिता का शव लेकर भटकता रहा, बाद में प्राइवेट वाहन से अपने पिता के शव को लेकर घर गया। प्रकरण का वीडियो भी वायरल हुआ जिसमें दावा किया गया कि पुत्र की गोद में ही पिता की मौत हुई है।
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अस्पताल में हुआ मामला जब सामने आया तो प्रशासन हरकत में आया। सपा ने ट्विटर से मामले को उठाया और योगी सरकार की स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल उठाए। जिलाधिकारी डॉ. उज्जवल कुमार ने सीएमएस से फोन पर जानकारी की। उन्होंने नाराजगी जताई, अस्पताल की व्यवस्था को बेहतर करने की हिदायत के साथ पूरे मामले की रिपोर्ट मांगी है। सीएमएस ने जांच भी शुरू कर दी है। उन्होंने इस मामले में इमरजेंसी में लगे स्टाफ से जवाब तलब किया है। जिसमें चिकित्सक के साथ फार्मासिस्ट व अन्य कर्मचारी शामिल हैं। शव वाहन के बारे में भी जानकारी की है। बताया जा रहा है कि इमरजेंसी में जिन फार्मासिस्ट की ड्यूटी थी, वह थे ही नहीं। दूसरे कर्मिक से काम करा रहे थे। फिलहाल अब जांच के बाद स्थिति साफ होगी।
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बीते बुधवार को मोतीगंज के भिटौरा गांव निवासी सोहन लाल अपने बुजुर्ग पिता राम उदित को सांस लेने की समस्या होने पर जिला अस्पताल आए थे। वहां इमरजेंसी में गए और पिता के इलाज के लिए कहा। सोहन का कहना है कि भीड़ होने से उन्हें बाहर बैठा दिया गया। पिता भी बाहर बैठे रहे और इलाज के इंतजार में आधे घंटे तक बैठे रहे।
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कुछ देर बात पिता की हालत और बिगड़ गई, सिर लटक गया और शरीर में हरकत बंद हो गई। उन्होंने फिर देखने को कहा। इस पर उनके पिता को अंदर बुलाया गया। जहां ऑक्सीजन लगाकर थोड़ी देर बाद कहा गया कि मौत हो गई है। शव ले जाने को कह दिया, लेकिन कोई स्ट्रेचर नहीं मिल सका। पिता को गोद में लेकर बाहर निकला तो कोई शव वाहन नहीं मिला। काफी देर तक गोदी में पिता का शव लेकर भटकता रहा, बाद में प्राइवेट वाहन से अपने पिता के शव को लेकर घर गया। प्रकरण का वीडियो भी वायरल हुआ जिसमें दावा किया गया कि पुत्र की गोद में ही पिता की मौत हुई है।
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अस्पताल में हुआ मामला जब सामने आया तो प्रशासन हरकत में आया। सपा ने ट्विटर से मामले को उठाया और योगी सरकार की स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल उठाए। जिलाधिकारी डॉ. उज्जवल कुमार ने सीएमएस से फोन पर जानकारी की। उन्होंने नाराजगी जताई, अस्पताल की व्यवस्था को बेहतर करने की हिदायत के साथ पूरे मामले की रिपोर्ट मांगी है। सीएमएस ने जांच भी शुरू कर दी है। उन्होंने इस मामले में इमरजेंसी में लगे स्टाफ से जवाब तलब किया है। जिसमें चिकित्सक के साथ फार्मासिस्ट व अन्य कर्मचारी शामिल हैं। शव वाहन के बारे में भी जानकारी की है। बताया जा रहा है कि इमरजेंसी में जिन फार्मासिस्ट की ड्यूटी थी, वह थे ही नहीं। दूसरे कर्मिक से काम करा रहे थे। फिलहाल अब जांच के बाद स्थिति साफ होगी।