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Lucknow News: डाउन सिंड्रोम से पीड़ित बच्चों को दें हेल्दी डाइट
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डाउन सिंड्रोम पर कार्यक्रम।
लखनऊ। डाउन सिंड्रोम से पीड़ित बच्चों के पेट में कई दिक्कतें होती हैं। ऐसे में उनके खानपान पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। इन बच्चों के लिए हेल्दी डाइट बेहद जरूरी है। डाइट सही रखकर बच्चों को पेट संबंधी बीमारियों से बचाया जा सकता है। डाउन सिंड्रोम फेडरेशन ऑफ इंडिया की ओर से हुए इंडिया इंटरनेशनल डाउन सिंड्रोम सम्मेलन के दूसरे दिन विशेषज्ञों ने ये बातें साझा कीं।
इस आयोजन में दोस्ती स्टडी हाॅल का सहयोग है। स्कूल टीचर भी कार्यक्रम में शामिल हुए। इस दौरान सिंड्रोम से पीड़ित बच्चों ने नाटक के जरिये अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। इस आयोजन में अमर उजाला मीडिया पार्टनर है।
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रिया व डॉ. प्रदीप ने कहा सिंड्रोम वाले बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण बेहद जरूरी है। बच्चों का हर साल मेडिकल चेकअप कराना चाहिए। इससे बच्चों में होने वाले किसी तरह की बीमारी समय रहते पकड़ में आ जाती है, जिससे उसे निजात दिलाई जा सकती है। नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रीति सिंह बताया कि बच्चों की आंखों में कई तरह की परेशानियां होती हैं। ऐसे में उनकी देखभाल बेहद जरूरी है। कोई दिक्कत आने पर तुरंत विशेषज्ञ को दिखाना चाहिए। रूटीन चेकअप कराते रहना चाहिए।
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ऑर्थोपैडिक विशेषज्ञ डॉ. शंकर ने बताया कि बच्चों की मांसपेशियां कमजोर होती हैं। इससे उन्हें चलने-फिरने में दिक्कत आती है। ऐसे में अभिभावक बच्चों की थेरेपी कराएं, ताकि उनकी मांसपेशियां मजबूत हो सकें। इस मौके पर फेडरेशन की अध्यक्ष सुरेखा रामचंद्रन ने कहा डाउन सिंड्रोम से पीड़ित बच्चों की समय रहते पहचान कर उन्हें प्रशिक्षण दिलाकर उनकी समस्या का निराकरण संभव है।
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इस आयोजन में दोस्ती स्टडी हाॅल का सहयोग है। स्कूल टीचर भी कार्यक्रम में शामिल हुए। इस दौरान सिंड्रोम से पीड़ित बच्चों ने नाटक के जरिये अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। इस आयोजन में अमर उजाला मीडिया पार्टनर है।
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बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रिया व डॉ. प्रदीप ने कहा सिंड्रोम वाले बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण बेहद जरूरी है। बच्चों का हर साल मेडिकल चेकअप कराना चाहिए। इससे बच्चों में होने वाले किसी तरह की बीमारी समय रहते पकड़ में आ जाती है, जिससे उसे निजात दिलाई जा सकती है। नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रीति सिंह बताया कि बच्चों की आंखों में कई तरह की परेशानियां होती हैं। ऐसे में उनकी देखभाल बेहद जरूरी है। कोई दिक्कत आने पर तुरंत विशेषज्ञ को दिखाना चाहिए। रूटीन चेकअप कराते रहना चाहिए।
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ऑर्थोपैडिक विशेषज्ञ डॉ. शंकर ने बताया कि बच्चों की मांसपेशियां कमजोर होती हैं। इससे उन्हें चलने-फिरने में दिक्कत आती है। ऐसे में अभिभावक बच्चों की थेरेपी कराएं, ताकि उनकी मांसपेशियां मजबूत हो सकें। इस मौके पर फेडरेशन की अध्यक्ष सुरेखा रामचंद्रन ने कहा डाउन सिंड्रोम से पीड़ित बच्चों की समय रहते पहचान कर उन्हें प्रशिक्षण दिलाकर उनकी समस्या का निराकरण संभव है।