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Lucknow News: फ्लैट दे या ब्याज सहित भुगतान करे सहारा सिटी
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लखनऊ। राज्य उपभोक्ता आयोग ने सहारा सिटी को आदेश दिया है कि वह आवंटी को फ्लैट उपलब्ध कराए। ऐसा नहीं करने की स्थिति में उसे ब्याज सहित पूरी धनराशि लौटाने के भी निर्देश दिए हैं।
भोपाल निवासी बृजेश कुमार तिवारी ने राज्य उपभोक्ता आयोग में 2014 में परिवाद दायर किया। इसमें सहारा प्राइम सिटी लिमिटेड कपूरथला लखनऊ, सहारा प्राइम सिटी लिमिटेड, सहारा सिटी होम्स मार्केटिंग एंड सेल्स काॅरपोरेशन गाजियाबाद के प्रबंधक को आरोपी बनाया। इसमें कहा कि उन्होंने 31 मार्च 2005 को गाजियाबाद में शुरू की गई सहारा सिटी होम्स के स्वर्ण-रजत योजना में फ्लैट बुक कराया था। कुछ कारणों से गाजियाबाद का प्रोजेक्ट समय से शुरू नहीं हो पाने पर उन्हें लखनऊ में फ्लैट देने के लिए कहा गया। इसके लिए 17,38,594 रुपये जमा कराए गए।
उन्हें सितम्बर, 2011 तक कब्जा देने के लिए कहा गया था। लेकिन फ्लैट नहीं दिया गया। मामले की सुनवाई करते हुए आयोग के न्यायाधीश राजेंद्र सिंह ने वादी को सहारा सिटी होम लखनऊ में 83.30 वर्गमीटर का फ्लैट देने का आदेश दिया। साथ ही यह भी निर्देश दिया कि यदि आयोग के आदेश का 30 दिन के भीतर आदेश का पालन नहीं होता है तो प्रतिमाह 50 हजार रुपये भुगतान करना होगा। आयोग ने अपने फैसले में यह भी कहा है कि वादी को फ्लैट का कब्जा दिया जाना सम्भव न हो तो उसे लखनऊ या गाजियाबाद स्थित अपनी किसी अन्य पूर्ण विकसित योजना में फ्लैट उपलब्ध कराएं। यदि इस प्रकार से भी फ्लैट का कब्जा देना सम्भव न हो तब जमा की गई पूरी धनराशि पर 12 फीसदी वार्षिक ब्याज देते हुए 30 दिन में भुगतान करे।
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भोपाल निवासी बृजेश कुमार तिवारी ने राज्य उपभोक्ता आयोग में 2014 में परिवाद दायर किया। इसमें सहारा प्राइम सिटी लिमिटेड कपूरथला लखनऊ, सहारा प्राइम सिटी लिमिटेड, सहारा सिटी होम्स मार्केटिंग एंड सेल्स काॅरपोरेशन गाजियाबाद के प्रबंधक को आरोपी बनाया। इसमें कहा कि उन्होंने 31 मार्च 2005 को गाजियाबाद में शुरू की गई सहारा सिटी होम्स के स्वर्ण-रजत योजना में फ्लैट बुक कराया था। कुछ कारणों से गाजियाबाद का प्रोजेक्ट समय से शुरू नहीं हो पाने पर उन्हें लखनऊ में फ्लैट देने के लिए कहा गया। इसके लिए 17,38,594 रुपये जमा कराए गए।
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उन्हें सितम्बर, 2011 तक कब्जा देने के लिए कहा गया था। लेकिन फ्लैट नहीं दिया गया। मामले की सुनवाई करते हुए आयोग के न्यायाधीश राजेंद्र सिंह ने वादी को सहारा सिटी होम लखनऊ में 83.30 वर्गमीटर का फ्लैट देने का आदेश दिया। साथ ही यह भी निर्देश दिया कि यदि आयोग के आदेश का 30 दिन के भीतर आदेश का पालन नहीं होता है तो प्रतिमाह 50 हजार रुपये भुगतान करना होगा। आयोग ने अपने फैसले में यह भी कहा है कि वादी को फ्लैट का कब्जा दिया जाना सम्भव न हो तो उसे लखनऊ या गाजियाबाद स्थित अपनी किसी अन्य पूर्ण विकसित योजना में फ्लैट उपलब्ध कराएं। यदि इस प्रकार से भी फ्लैट का कब्जा देना सम्भव न हो तब जमा की गई पूरी धनराशि पर 12 फीसदी वार्षिक ब्याज देते हुए 30 दिन में भुगतान करे।

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