ट्रॉमा में इंजेक्शन लगने के बाद बिगड़ी किशोरी की हालत, मौत, भाई ने लगाए ये आरोप
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केजीएमयू के ट्रॉमा सेंटर में बुधवार दोपहर इंजेक्शन लगने के बाद किशोरी की हालत बिगड़ गई। डॉक्टरों ने उसे ऑक्सीजन स्पोर्ट पर डाला, लेकिन उसे नहीं बचाया जा सका। इससे नाराज तीमारदारों ने गलत इलाज करने का आरोप लगाकर हंगामा किया।
उनका कहना था कि सात दिन से डॉक्टर सिर्फ जांच के लिए इधर-उधर दौड़ाते रहे और इलाज में लापरवाही बरती। रायबरेली स्थित थाना गुरुबख्श सिंह ब्लॉक खीरों की रोशनी (16) को पेट दर्द की शिकायत पर परिवारीजन नजदीकी अस्पताल ले गए।
वहां डॉक्टरों ने हालत गंभीर बताकर तीन जुलाई को ट्रॉमा सेंटर भेज दिया। भाई रिंकू का आरोप है कि पहले तो डॉक्टर भर्ती करने से इनकार करते रहे। काफी इंतजार बाद मरीज को ट्रॉमा के जनरल सर्जरी विभाग में शिफ्ट कराया।
हालांकि, सात दिन भर्ती रहने के दौरान डॉक्टरों ने यह भी नहीं बताया कि रोशनी को क्या बीमारी थी और उसका क्या इलाज चल रहा था। इस दौरान सिर्फ जांचें करवाते रहे।
ढाई घंटे तक पड़ा रहा शव
रिंकू ने बताया कि बुधवार दोपहर 12 बजे रोशनी बातचीत कर रही थी। थोड़ी देर बाद एक नर्स ने उसे इंजेक्शन लगाया। इसके दस मिनट बाद रोशनी को सांस लेने में तकलीफ होने लगी।
उसे ऑक्सीजन मास्क लगाया गया, पर उसकी मौत हो गई।
डॉक्टरों ने सीपीआर किया, लेकिन सांस वापस न लौटी। इस पर रिंकू ने गलत इंजेक्शन लगाने का आरोप लगाते हंगामा शुरू कर दिया। बाद में कर्मचारियों ने तीमारदारों को समझाकर मामला शांत कराया।
रिंकू का आरोप है कि दोपहर करीब एक बजे मौत के बाद उसकी बहन का शव विभाग से बाहर स्ट्रेचर पर रख दिया गया। कागजी कार्रवाई पूरी करने में ढाई घंटे बीत गए। इस दौरान शव ऐसे ही पड़ा रहा।
इलाज में लापरवाही नहीं
मरीज को गलत इंजेक्शन नहीं लगाया गया। उसकी हालत गंभीर थी। इलाज में लापरवाही के आरोप बेबुनियाद हैं। -, डॉ. संदीप तिवारी, प्रभारी, ट्रॉमा सर्जरी