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मनोरोग में प्रभावी है गेस्टेल्ट थैरेपी
लखनऊ/इंटरनेट डेस्क
Updated Sun, 25 Aug 2013 10:54 AM IST
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गंभीर, सामान्य और मनोरोगों में भी गेस्टेल्ट थैरेपी बेहद उपयोगी है। इससे
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डर और विषाद जैसी समस्याओं से निजात पाया जा सकता है।
एमिटी विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित कार्यशाला में जेएसएस मेडिकल कॉलेज, मैसूर के डिपार्टमेंट ऑफ साइकैट्री से आए डॉ. एलएसएस मैनिकेम ने ये दावा किया।
डॉ. मैनिकेम के अनुसार यह पद्धति सभी उम्र के लोगों पर समान रूप से प्रभाव डालती है। प्राकृतिक आपदा और विनाश से प्रभावित लोगों के साथ ही गंभीर अपराधियों की मानसिकता बदलने में भी इसका उपयोग किया जा सकता है।
डॉ. सुनील चौधरी ने कहा कि गेस्टेल्ट थैरेपी के दौरान व्यक्ति अपने अंतर्विरोधों और मानसिक आघातों को समझना शुरू करते हुए धीरे-धीरे इससे निजात पा लेता है।
गेस्टेल्ट थैरेपी अन्य मनोचिकित्सा प्रणालियों से भिन्न है क्योंकि यह व्यक्ति के मन और भावना दोनों पर केंद्रित होकर काम करती है।
कार्यशाला के दौरान एआईबीएएस की निदेशिका मंजू अग्रवाल ने प्रतिभागियों को प्रशिक्षण के दौरान छोटे-छोटे समूहों में कई रोचक मनोवैज्ञानिक खेल और गतिविधियां करवाईं जिससे उन्हें विषय को समझने और ग्रहण करने में सहायता मिली।
एमिटी विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित कार्यशाला में जेएसएस मेडिकल कॉलेज, मैसूर के डिपार्टमेंट ऑफ साइकैट्री से आए डॉ. एलएसएस मैनिकेम ने ये दावा किया।
डॉ. मैनिकेम के अनुसार यह पद्धति सभी उम्र के लोगों पर समान रूप से प्रभाव डालती है। प्राकृतिक आपदा और विनाश से प्रभावित लोगों के साथ ही गंभीर अपराधियों की मानसिकता बदलने में भी इसका उपयोग किया जा सकता है।
डॉ. सुनील चौधरी ने कहा कि गेस्टेल्ट थैरेपी के दौरान व्यक्ति अपने अंतर्विरोधों और मानसिक आघातों को समझना शुरू करते हुए धीरे-धीरे इससे निजात पा लेता है।
गेस्टेल्ट थैरेपी अन्य मनोचिकित्सा प्रणालियों से भिन्न है क्योंकि यह व्यक्ति के मन और भावना दोनों पर केंद्रित होकर काम करती है।
कार्यशाला के दौरान एआईबीएएस की निदेशिका मंजू अग्रवाल ने प्रतिभागियों को प्रशिक्षण के दौरान छोटे-छोटे समूहों में कई रोचक मनोवैज्ञानिक खेल और गतिविधियां करवाईं जिससे उन्हें विषय को समझने और ग्रहण करने में सहायता मिली।